बांकीपुर सीट पर प्रशांत किशोर का दिखेगा जलवा या फिर हो जाएंगे फेल?भाजपा ने भी कर ली है बड़ी तैयारी

 बांकीपुर सीट पर प्रशांत किशोर का दिखेगा जलवा या फिर हो जाएंगे फेल?भाजपा ने भी कर ली है बड़ी तैयारी
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भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने राज्यसभा सांसद बनने के बाद बांकीपुर विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया है. जहां आने वाले कुछ दिनों में उपचुनाव का ऐलान होना है. इसको लेकर अभी से दावेदारी शुरू हो गई है. चर्चा है कि जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर भी मैदान में उतर सकते हैं. अगर वह खुद चुनाव लड़ते हैं तो सत्ता पक्ष के लिए चुनौती बढ़ सकती है. हालांकि बीजेपी इस उप-चुनाव को बहुत ही सहजता के साथ ले रही है. उनका दावा है कि इस बार भी बांकीपुर में ‘कमल’ ही खिलेगा.जब से बांकीपुर विधानसभा सीट अस्तित्व में आई है, तब से नितिन नबीन ही यहां से बीजेपी के विधायक रहे हैं. इससे पहले पटना पश्चिम में यह सीट थी तो वहां से उनके पिता नवीन किशोर सिन्हा विधायक थे. ऐसे में बीजेपी नेताओं को लगता है कि यहां से भारतीय जनता पार्टी का कोई भी कार्यकर्ता चुनाव लड़े, जीत तय है. राजनीतिक विश्लेषक भी मानते हैं कि सामाजिक समीकरण ऐसा है कि बीजेपी को हराना लगाना नामुमकिन है।2010 विधानसभा चुनाव में बीजेपी के नितिन नबीन ने आरजेडी के विनोद कुमार श्रीवास्तव चुनाव को 60 हजार वोटों से हराया था. 2020 में कांग्रेस ने नितिन नबीन के सामने शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे लव सिन्हा को चुनाव लड़ाया लेकिन वह भी लगभग 40 हजार वोट से चुनाव हार गए. 2015 में महागठबंधन की तरफ से कांग्रेस के युवा नेता आशीष कुमार ने चुनाव लड़ा और वह भी लगभग 40 हजार वोट से चुनाव हार गए. 2025 में नितिन नबीन ने आरजेडी की रेखा कुमारी को 52 हजार वोट से शिकस्त दी.सबसे दिलचस्प बात यह है कि बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से 2025 में प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज ने अपना उम्मीदवार भी उतारा था. वंदना कुमारी को बांकीपुर से जनसुराज का उम्मीदवार बनाया गया था. जिन्हें 7717 वोट मिले थे. वंदना कुमारी का वोट प्रतिशत महज 4.92 था. ऐसे में एक बार फिर से प्रशांत किशोर बांकीपुर से चुनाव लड़ने का दम भर रहे हैं तो जाहिर से बात है उनके पास और भी कोई रणनीति होगी. प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने 2025 विधानसभा चुनाव में 238 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे लेकिन एक भी सीट पर सफलता नहीं मिली. बांकीपुर समेत 236 सीटों पर उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई. सिर्फ पश्चिम चंपारण की चनपटिया में मनीष कश्यप और सारण की मढ़ौरा सीट पर नवीन कुमार सिंह उर्फ अभय सिंह ही जमानत बचाने में कामयाब रहे.अगर बांकीपुर में बीजेपी की जीत पहले से तय है तो फिर ये उपचुनाव इतनी अहम क्यों है? असल में इसकी वजह पीके हैं. चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर इस उपचुनाव से अपनी चुनावी राजनीति की शुरुआत कर सकते हैं.

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हालांकि वह खुलकर अपनी उम्मीदवारी की बात को नहीं स्वीकारते लेकिन ये जरूर कहते हैं कि बांकीपुर की जनता इस उप-चुनाव में जन सुराज को जिताकर बिहार और देश को बड़ा संदेश देने जा रही है.प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार में एनडीए को अब सीधी चुनौती जनसुराज ही दे सकती है, क्योंकि इससे पहले बांकीपुर में महागठबंधन के उम्मीदवार लड़ चुके हैं लेकिन वे लोग बीजेपी को कभी भी नहीं हरा पाए. पीके ने कहा कि पिछले 40-45 साल से बीजेपी एक ही परिवार को चुनाव लड़ाती रही है. नितिन नबीन राष्ट्रीय अध्यक्ष हो चुके हैं. अब जनसुराज ही उनको सीधी चुनौती दे सकती है. इसलिए बांकीपुर में उनके गढ़ में घुसकर हमलोग को हराएंगे. बांकीपुर की जनता के पास मौका है कि वह इस उप-चुनाव के माध्यम से देश को बड़ा संदेश दे सकें.बांकीपुर सवर्ण जाति डोमिनेटेड सीट है. ऐसे में प्रशांत किशोर और उनकी पार्टी जन सुराज यूजीसी के मसले को उठाने वाली है और यूजीसी के मामले पर लोगों के बीच में जाकर यह बताने वाली है कि किस तरीके से भारतीय जनता पार्टी आम जन मानस को बेवकूफ बना रही है. यूजीसी एक्टिविटी एक्ट पर भले ही फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की रोक लगी है लेकिन पीके की कोशिश बांकीपुर में जोर-शोर से उठाने की है.इसके साथ ही प्रशांत किशोर लगातार महंगाई के मुद्दे को उठाकर आम जनमानस की भावनाओं को कुरेद रहे हैं. लगातार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि और गैस सिलेंडर को लेकर मोदी सरकार को घेरने की कोशिश हो रही है. वह महंगाई पर काफी मुखर है. हर रैली और सभा में इसको प्रमुखता से उठाते हैं.हालांकि प्रशांत किशोर की संभावित दावेदारी और जन सुराज तैयारियों पर भारतीय जनता पार्टी बेफिक्री दिखाती है. प्रदेश प्रवक्ता पंकज सिंह कहते हैं कि जिस सेवा भाव से नितिन नबीन ने बांकीपुर को सहेजा है, उनको नहीं लगता है कि बांकीपुर की जनता नासमझी की शिकार होगी. वह कहते हैं कि जब विधानसभा चुनाव में बिहार की जनता जन सुराज पार्टी के झांसे में नहीं आई तो बांकीपुर की जनता क्यों आएगी? वह प्रशांत किशोर को फिर से उनके पुराने कार्यक्षेत्र में लौटने की सलाह देते हैं।बांकीपुर में कायस्थ, यादव, राजपूत, भूमिहार और वैश्य मतदाताओं की अहम भूमिका है लेकिन कायस्थ समाज के लोग निर्णायक भूमिका में है. हालांकि ब्राह्मण, कोइरी, कुर्मी और पासवान की भी अच्छी संख्या है. मुसलमान की संख्या लगभग 8 से 10 फीसदी है. वहीं एससी समाज के लोग 7 से 8% यहां रहते हैं. यादव-मुस्लिम और दलित मतदाताओं के आसरे महागठबंधन चुनाव तो लड़ता है लेकिन कभी सफलता नहीं मिली, जबकि कायस्थ जाति से आने वाले नितिन नबीन हर बार बड़े अंतर से चुनाव जीतते रहे हैं।

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