आखिर क्यों झुकी मोदी सरकार?युवाओं के डर से कांपी भाजपा
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने आंदोलन को समाप्त करने की घोषणा की है. शनिवार की शाम 5.30 को CJP ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस आशय की घोषणा कर दी. उन्होंने कहा कि सरकार ने उनकी मांगें मान ली हैं, इसलिए अब आंदोलन समाप्त किया जा रहा है और सभी आंदोलनकारियों को जंतर-मंतर से अपने घर जाने की अपील की. अपने प्रेस वार्ता के पहले CJP की तरफ से आशुतोष रांका और सौरभ दास केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह एवं जेपी नड्डा से कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में मिले थे.मालूम हो कि आज ही एक बजे शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. इस इस्तीफे की घोषणा होते ही अभिजीत दिपके ने इसे लोकतंत्र की जीत बताया था. आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल ने भी यही बात कही. दूसरी तरफ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को साझा विपक्ष की जीत कहा है.प्रियंका गांधी ने कहा है कि छात्रों के आंदोलन से सरकार को सबक मिला. लेकिन इसमें किसी को शक नहीं कि मोदी सरकार का यह कदम सभी दलों को हतप्रभ कर गया है. यूं भी मोदी सरकार के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी जन आंदोलन के दबाव में कोई मंत्री इस्तीफा दे.

यहां तक कि कृषि कानूनों की वापसी को लेकर जब किसानों ने धरना दिया था, तब 22 महीने बाद तीनों कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा की थी, परंतु कृषि मंत्री का इस्तीफा नहीं लिया था.मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने इस्तीफा दिया था. लेकिन उसकी वज़ह मी टू में उनका नाम आना था, लेकिन जेन-जी छात्रों के आंदोलन ने सरकार को विवश कर दिया कि उनकी मांग मानी जाए और धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा लिया जाए.जंतर-मंतर पर इस्तीफे की खबर आते ही वहां जुटे युवाओं में जोश आ गया. अभिजीत दिपके ने तो अति उत्साह में कह दिया, सुबह हो गई मामू! उन्होंने यह भी कहा कि अभी हमारी कुछ और मांगें हैं. जैसे नीट (NEET) पेपर लीक के बाद जिन छात्रों ने सुसाइड किया, उनके परिवार वालों को सरकार एक करोड़ का मुवाअजा दे.उनकी दूसरी मांग थी, 20 जुलाई को जिन पुलिस अधिकारियों ने छात्रों की पिटाई की, उन पर सरकार कार्रवाई करे. हालांकि तब ही लगा था कि सरकार इन मांगों को मांग लेगी. फिर कांस्टीट्यूशन क्लब में केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने उनकी इन मांगों को मान लेने का भरोसा दिया. इसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने आंदोलन के समाप्ति की घोषणा कर दी. एक तरह से धर्मेंद्र प्रधान ने खुद इस्तीफा देकर मोदी सरकार को ऊहापोह से उबार लिया. इसलिए सरकार के इस फैसले को कह सकते हैं, देर आयद, दुरुस्त आयद!सरकार ने इस कदम का क्रेडिट जेन-जी आंदोलन को दिया है. इस तरह सरकार ने परोक्ष रूप से विपक्ष को यह भी बता दिया कि सरकार विपक्ष के धरने-प्रदर्शन को लेकर परेशान नहीं हुई. उसके द्वारा उठाया यह कदम तो छात्रों के गुस्से को खत्म करना है. मगर यही कदम अगर सरकार पहले उठा लेती तो इतना हंगामा न होता. बीजेपी सरकार बंगाल जीत लेने और बिहार में अपना परचम लहरा देने से इतनी गदगद थी कि 20 जून से चल रहे CJP के आंदोलन की अनदेखी करती रही.यहां तक कि सोनम वांगचुक के अनशन को भी नजरअंदाज किया गया. शुक्र है कि गुरुवार को उन्हें अनशन समाप्त करने के लिए मना लिया गया. फिर भी जंतर-मंतर पर जुटे छात्र नहीं हटे, उलटे वे और आक्रामक हुए. मोदी सरकार ने जेन-जी को मनाने की पूरी कोशिश की. इंस्टाग्राम पर प्रधानमंत्री ने अपनी रील भी वायरल की. किंतु आंदोलन देशव्यापी होता गया.आखिरकार धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो गया. इस कदम से सरकार को भी राहत मिली और प्रदर्शनकारियों को भी. दिल्ली के लोगों को भी राहत मिली, क्योंकि रोज-रोज दिल्ली डाउन टाउन (कनाट प्लेस) में मेट्रो के उन स्टेशनों का बंद हो जाना, जो दफ्तरों के करीब हैं, इससे ऑफिस जाने वालों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती थी. उनका वक्त भी बर्बाद होता और ऑटो एवं टैक्सी में काफी पैसा बर्बाद होता. लेकिन यही कदम यदि सरकार पहले उठा लेती तो शायद उसको इस तरह बेइज्जत नहीं होना पड़ता.अब अभिजीत दिपके भी सरकार को मामू बता रहे हैं. भले यह बीजेपी सरकार की दूरंदेशी हो किंतु इसमें भी शक नहीं कि बहुत बेआबरू हो कर तेरे कूचे से हम निकले! चूंकि 20 जुलाई की हिंसा के बाद प्रदर्शनकारी भी बढ़ते जा रहे थे और इस धरने में कई अराजक तत्त्व भी आंदोलन में घुस आए थे, उनको संयमित रखना CJP के लिए भी मुश्किल था.युवाओं का आंदोलन शुरू करना अलग बात है परंतु उस आंदोलन को लंबे समय तक संभाले रखना बहुत बड़ी बात है. कॉकरोच जनता पार्टी के नेता भी इसे लेकर बेचैन थे, क्योंकि बिना किसी संगठित राजनीतिक दल की मदद के वे लंबे समय तक इसे कैसे खींचते. हालांकि आम आदमी पार्टी इस आंदोलन को बैक कर रही थी.मगर जैसे ही कांग्रेस ने छात्रों के आंदोलन को लेकर पीएम आवास के समीप धरना दिया, वैसे ही आप पार्टी बिफर गई. आप के नेता संजय सिंह ने ट्वीट कर कहा कि राहुल गांधी की बीजेपी से मिलीभगत है. जाहिर है छात्रों के आंदोलन का श्रेय लेने के लिए सभी विपक्षी दल लगे हुए थे परंतु कॉकरोच जनता पार्टी ने जंतर-मंतर पर चल रहे जेन-जी के इस आंदोलन की अगुआई किसी को नहीं सौंपी. उधर केंद्र सरकार ने भी 20 जुलाई के बाद जो दो वार्ताएं कीं वे भी कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधियों से की. यहां तक कि वांगचुक का अनशन तुड़वाने दो मंत्री गए.सरकार भी यथाशीघ्र इस आंदोलन को समाप्त करवा देना चाहती थी. इसकी दो मुख्य वजह थी, संसद का मानसून सत्र निपटाना और अपने बिल पारित करवा लेना. अब उसके लिए बीजेपी के अपने एजेंडे वाले बिल पास करवाना आसान होगा. उसके अपेक्षित बहुमत पा लेने की संभावनाएं भी बढ़ी हैं. उसको खतरा कांग्रेस से था, किंतु शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कांग्रेस के हौसले पस्त पड़े हैं.इसलिए यह कहा जा सकता है कि दो क़दम पीछे हटने से मोदी सरकार की कोई हेठी नहीं हुई है. उलटे सरकार लोगों को यह समझाने में सफल रही है कि बीजेपी सरकार छात्रों को लेकर संजीदा है. और किसी भी परीक्षा के पेपर लीक होने के बाबत जिस तरह का कठोर बिल लेकर आ रही है. इसलिए विपक्ष के लिए मुश्किल होगा कि अब वह सरकार का उस तरह विरोध कर सके जैसे कि वह 21 जुलाई को कर रही थी.छात्रों, किसानों के लिए सोमवार को आने वाला बिल सरकार की जीत है. भले आज के कदम से वह पीछे हटती हुई प्रतीत हुई हो. अब विपक्ष को लड़ने के और मुद्दे तलाशने होंगे. यही कारण है कि कांग्रेस के तेवर आज खिसियाये हुए लगे. धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे में साफ-साफ लिखा है कि वे पिछले दस दिनों के घटनाक्रम से बहुत व्यथित और आहत थे. इसलिए युवाओं के हित और उनकी मांगों को सर्वोपरि मानते हुए वे इस्तीफा दे रहे हैं. उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस्तीफे की एक वजह यह भी है कि कहीं छात्रों के आंदोलन की आड़ में राष्ट्र विरोधी बाहरी ताकतें इस परिस्थिति का फायदा न उठा लें. उन्होंने यह भी लिखा कि वे पिछले चार दशकों से शिक्षा की उन्नति के लिए समर्पित हैं. एक तरह से धर्मेंद्र प्रधान जाते-जाते उधर, नेता विपक्ष राहुल गांधी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में पेपर लीक के मामलों में मोदी सरकार और RSS दोनों को बराबर दोषी ठहराया. मगर छात्रों ने सरकार को झुकने के लिए मजबूर कर दिया. उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन के दौरान पुलिस ने छात्रों के साथ जो हिंसा की उसकी भी जांच हो और दोषियों को सजा मिले. साथ ही प्रधानमंत्री छात्रों से माफी मांगें. इस आंदोलन में सिर्फे कॉकरोच जनता पार्टी ही नहीं थी, बल्कि वामपंथी संगठन आईसा (AISA) की छात्राएं भी थीं, वे भी 23 दिन से अनशन कर रही थीं.
