बिहार में भी घुसपैठियों के खिलाफ शुरू होगा एक्शन,केंद्र से लेकर राज्य तक बढ़ी सख्ती
बिहार में घुसपैठ को नियंत्रित करने और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए सरकार ने कई ठोस कदम उठाए हैं. पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने और पुशबैक नीति लागू करने के बाद सीमांचल क्षेत्र में संभावित घुसपैठ की आशंका बढ़ गई है. यह क्षेत्र विशेष रूप से किशनगंज, अररिया, कटिहार और पूर्णिया जैसे जिले हैं, जो अवैध घुसपैठ का मुख्य मार्ग रहे हैं. विस्तार से जानें बिहार में एसआईआर के दौरान कितने घुसपैठिये पाए गए और अब इनके खिलाफ क्या एक्शन प्लान अपनाया गया है.बिहार में विधानसभा चुनाव के समय घुसपैठिए को लेकर खूब सियासत हुई थी. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे बड़ा मुद्दा बनाया था. प्रधानमंत्री ने भी बिहार से घुसपैठियों को निकालने की बात कही थी. बाद में सम्राट चौधरी ने भी कहा कि घुसपैठिए को चुन-चुन कर निकालेंगे.SIR में बिहार में वोटर लिस्ट से 65 लाख नाम कटा था. उसके आधार पर बिहार सरकार ने आधार कार्ड, राशन कार्ड से लोगों का नाम काट दिया है. बिहार में सीमांचल का इलाका हमेशा घुसपैठिए को लेकर चर्चा में रहता है, जिस प्रकार से मुस्लिम जनसंख्या बढ़ी है उसको लेकर भी सियासत हो रही है.बीजेपी का लगातार आरोप रहा है कि बड़ी संख्या में घुसपैठिए बाहर से आए हैं. पूर्व विधान पार्षद हरेंद्र प्रताप ने तो किताब भी लिखी है और इस मामले को उन्होंने विधान परिषद में उठाया भी था. बिहार सरकार के मंत्री का कहना है कि केंद्र सरकार ने जो एक्सपर्ट कमेटी बनाई है, यह अच्छी पहल है. क्योंकि घुसपैठिए को हटाना जरूरी है.बिहार के सीमावर्ती जिलों में 1971 के बाद बड़ी संख्या में बांग्लादेशी रिफ्यूजी आए थे और उसमें से बड़ी संख्या में यहीं रह गए. 1983 में सरकार ने पहली बार स्क्रीनिंग कराकर उन्हें नोटिस दिया. कुछ नाम भी काटे गए लेकिन बांग्लादेशी घुसपैठिए का सिलसिला जारी रहा.सीमांचल के इलाके में डेमोग्राफी चेंज के रूप में यह सामने भी आया है कि किशनगंज में अल्पसंख्यकों की आबादी 68 फ़ीसदी तक पहुंच गई है. जबकि 1951 के आसपास सीमांचल में जब कटिहार, किशनगंज, अररिया संयुक्त रूप से पूर्णिया जिले के साथ थे तो उस समय 31% के आसपास ही मुस्लिम आबादी थी.2011 की जनसंख्या को ही मानें तो 6 दशकों में 16-17 प्रतिशत की रफ्तार से सीमांचल में मुस्लिम आबादी बढ़ी है और पूरा डेमोग्राफी चेंज हो गया है. 2011 में सिर्फ किशनगंज में ही 11.49 लाख आबादी थी जो 2024- 25 में बढ़कर 14.18 लाख के करीब पहुंच गया है.बिहार में मुस्लिम आबादी लगभग 17% के करीब है लेकिन जब सीमांचल की बात आती है तो यहां यह संख्या कहीं अधिक है.

किशनगंज में 68 फ़ीसदी, कटिहार में 44 फ़ीसदी, अररिया में 43 फ़ीसदी और पूर्णिया में 38% फीसदी मुस्लिम आबादी है.केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने विधानसभा चुनाव के समय घुसपैठियों को निकालने की बात कही थी. हरेंद्र प्रताप ने कहा कि चुनाव के बाद भी अमित शाह बिहार आए थे और इस पर अब काम हो रहा है. अमित शाह ने बिहार दौरे के दौरान राज्य के अधिकारियों और सशस्त्र सीमा बल व अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ बैठक कर जरूरी दिशा- निर्देश भी घुसपैठियों से निपटने के दिए थे.बंगाल में तो घुसपैठिए पर ही चुनाव लड़ा गया है. अभी जिस प्रकार से बांग्लादेश बॉर्डर पर भीड़ दिख रहा है, यह बड़ा सबूत है कि बड़ी संख्या में घुसपैठिए बांग्लादेश से आए थे. बिहार में भी सीमांचल की स्थिति चिंताजनक है. एसआईआर में सबसे अधिक नाम इन्हीं इलाकों से कटे हैं. अब सरकार इसकी जांच पड़ताल करवा रही है. कुछ कार्रवाई भी हुई है, लेकिन बिहार में कितनी संख्या में घुसपैठिये हैं, बिहार में इसका सही आंकड़ा सरकार के पास भी नहीं है और इस पर काम करना होगा.बिहार सरकार के खाद्य उपभोक्ता संरक्षण मंत्री अशोक चौधरी का कहना है कि जिनका भी एसआईआर में नाम कट गया है. राशन कार्ड से उनका नाम हटा दिया गया है. घुसपैठियों को लेकर केंद्र सरकार की एक्सपर्ट कमिटी पर अशोक चौधरी ने कहा कि सही फैसला है क्योंकि किसी भी बाहरी देश से चाहे वह श्रीलंका हो नेपाल हो बांग्लादेश हो घुसपैठियों आते हैं तो उनको चिन्हित कर बाहर निकालना चाहिए।
