इबोला वायरस पर सरकार का आया गाइडलाइन,जानिए कैसे फैलता है यह वायरस और कैसे करें बचाव?

 इबोला वायरस पर सरकार का आया गाइडलाइन,जानिए कैसे फैलता है यह वायरस और कैसे करें बचाव?
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इबोला वायरस का संक्रमण अफ्रीकी देशों में बढ़ता जा रहा है. संक्रमण के सबसे ज्‍यादा मामले कांगो में सामने आ रहे हैं. इबोला वायरस के अब तक कांगो में 101 पॉज‍िट‍िव केस, 900 से ज्यादा संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं. ऐसे में भारत सरकार भी अलर्ट मोड में आ गई है. इबोला वायरल संक्रमण को लेकर सरकार ने नई गाइडलाइंस जारी कर दी हैं. इनमें युगांडा और कांगो से आने वाले यात्रियों की थर्मल स्‍क्रीनिंग से लेकर सेल्फ डिक्लेरेशन तक शामिल है. हालांकि, बता दें कि भारत में अभी तक इबोला वायरस संक्रमण का एक भी मामला सामने नहीं आया है. अफ्रीका के कुछ हिस्सों में इबोला वायरस के प्रकोप के मद्देनजर, विमानन नियामक डीजीसीए ने एयरलाइनों के लिए नई गाइडलाइन जारी कर दी हैं. विमान कंपनियों को युगांडा और कांगो के साथ (प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष) संपर्क रखने वाली एयरलाइनों को यात्रियों को विमान से उतारने से पहले सेल्‍फ डिक्‍लेरेशन फॉर्म भरवाना और क्‍लेक्‍ट करना होगा.एयर इंडिया, इंडिगो, अकासा एयर, एमिरेट्स, एयर फ्रांस, एतिहाद एयरवेज और इजिप्टएयर उन 13 एयरलाइनों में शामिल हैं, जो डीजीसीए द्वारा कांगो से यात्रियों को ले जाने वाली एयरलाइनों की लिस्‍ट में हैं. वहीं, युगांडा से यात्रियों को ले जाने वाली 17 एयरलाइनों की सूची में एअर इंडिया, इंडिगो और केएलएम शामिल हैं.एयरलाइनों को उड़ान के दौरान यह डिक्‍लेरेशन करना भी जरूरी किया गया है कि इबोला रोग के मौजूदा खतरे को देखते हुए, बुखार, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, गले में खराश, उल्टी, दस्त, चकत्ते, रक्तस्राव जैसे लक्षण वाले किसी भी यात्री को आगमन पर तुरंत चालक दल और इमिग्रेशन/हेल्‍थ यूनिट को सूचित करना चाहिए.डीजीसीए द्वारा 22 मई को जारी एडवाइजरी के अनुसार, उड़ान के दौरान की जाने वाली डिक्‍लेरेशन में एयरलाइनों को यह भी उल्लेख करना होगा कि सभी यात्रियों (यात्रियों और चालक दल), चाहे उनकी राष्ट्रीयता कुछ भी हो, वे इबोला वायरस से संक्रमित नहीं हैं. इसे लेकर एक सेल्‍फ डिक्‍लेरेशन फॉर्म भरकर उसे इमिग्रेशन काउंटर पर जमा करना होगा.विमान में संदिग्ध मामलों के लिए डीजीसीए ने कहा कि अन्य उपायों के अलावा, यात्री को विमान के पिछले हिस्से में भेजा जाना चाहिए और यदि संभव हो तो संबंधित यात्री के आगे और बगल की तीन पंक्तियां खाली रखी जानी चाहिए.एयरलाइनों को यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि उनके पास ट्रिपल लेयर वाले मास्क, एक बार उपयोग में लाये जाने वाले दस्ताने, पीपीई किट, सैनिटाइजर के पर्याप्त भंडार हो.राहत की बात ये है कि भारत में अब तक इबोला का कोई मामला सामने नहीं आया है. सरकार ने बताया कि देश में अब तक इबोला वायरस के संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है. लेकिन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने भारत में बीमारी के किसी भी प्रसार को रोकने के लिए तैयारियों और निगरानी शुरू कर दी है.

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नड्डा ने अधिकारियों को देश भर में हवाई अड्डों, बंदरगाहों और भूमि सीमा पार करने सहित देश के सभी एंट्री प्‍वाइंट पर इबोला स्क्रीनिंग व्यवस्था को पूरी तरह से सतर्क और मजबूत रखने का निर्देश दिया. उन्होंने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) को निर्देश दिया कि इबोला का पता लगाने, जांच करने और निगरानी रखने के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं लगातार प्रभावी रहें.विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इबोला के प्रकोप को ‘अंतरराष्ट्रीय चिंता वाला सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ घोषित किया है, जिसके बाद केंद्र सरकार ने एहतियाती कदम तेज कर दिए हैं.‘अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन’ ने भी इसे ‘महाद्वीपीय सुरक्षा के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ घोषित किया है. अधिकारियों ने कहा कि प्रवेश बिंदुओं पर निगरानी और एजेंसियों के बीच तालमेल पर कड़ी नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी संदिग्ध मामले का जल्दी पता लगाया जा सके और तुरंत कार्रवाई की जा सके. डब्‍ल्‍यूएचओ प्रमुख ने कहा कि डब्‍ल्‍यूएचओ और ह्यूमनिटेरियन हेल्थ पार्टनर्स ने अभी भी इतुरी के कई इलाकों में मौजूद हैं, जिनमें कुछ बहुत दूर और असुरक्षित जगहें भी शामिल हैं. वहां लोग सिर्फ इबोला ही नहीं बल्कि कई दूसरीबीमारियों से भी जूझ रहे हैं. डब्‍ल्‍यूएचओ के अनुसार, इबोला एक गंभीर बीमारी है जो अक्सर जानलेवा भी हो सकती है और यह इंसानों तथा कुछ जानवरों (जैसे बंदर) को प्रभावित करती है.इबोला वायरस आमतौर पर जंगली जानवरों (चमगादड़, साही और कुछ बंदर) से इंसानों में फैलता है. इसके बाद यह इंसान से इंसान में भी फैल सकता है, जब किसी संक्रमित व्यक्ति के खून, पसीने, शरीर के तरल पदार्थ या उसके संपर्क में आई चीजों (जैसे कपड़े, बिस्तर) से संपर्क से भी फैल सकता है.

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