ट्रंप के बयान से दिखी पाकिस्तान की हकीकत,सरकार नहीं बल्कि वहां सेना का कंट्रोल है
ईरान से युद्ध में उलझे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब मिडिल ईस्ट में शांति के लिए बड़े बदलाव लाने की तैयारी में है. उन्होंने इजरायल के साथ खाड़ी के मुस्लिम देशों के रिश्तों को सामान्य करने के लिए अपनी नई योजना पेश की. इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति की सोशल मीडिया पोस्ट में कई राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों और राजाओं का नाम लिया गया, लेकिन पाकिस्तान से एक बड़ा नाम गायब था. नाम भी ऐसा कि उसने एक बार फिर साबित कर दिया कि पाकिस्तान में चलती किसकी है. दरअसल डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक लंबा बयान पोस्ट किया. उन्होंने कहा कि ईरान के साथ बातचीत “अच्छे तरीके से आगे बढ़ रही है” और इसे एक बड़े बदलाव का मौका बताया. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बातचीत नाकाम हुई, तो हालात फिर “जंग के मैदान” में लौट सकते हैं, और पहले से “ज्यादा बड़े और ताकतवर” संघर्ष की स्थिति बन सकती है. लेकिन उन्होंने कहा कि अगर बातचीत सफल रही, तो अब्राहम समझौते के बड़े ढांचे के तहत एक ऐतिहासिक समझौता हो सकता है.ट्रंप की इस लिस्ट में पाकिस्तान का नाम भी शामिल था. लेकिन उसकी नागरिक सरकार का नहीं. ट्रंप ने पाकिस्तान की ओर से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का नहीं, बल्कि सेना प्रमुख आसिम मुनीर का नाम लिया. ट्रंप ने अब्राहम समझौते को सफल समझौता बताया. उन्होंने कहा कि इसमें पहले से जुड़े देशों- संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, मोरक्को, सूडान और कजाखस्तान में “वित्तीय, आर्थिक और सामाजिक उछाल” आया है.अब्राहम समझौता यानी “अब्राहम अकॉर्ड्स” एक ऐसा समझौता है, जिसके तहत कुछ मुस्लिम देशों ने इजरायल के साथ अपने रिश्ते सामान्य किए है. अमेरिका की पहल पर 2020 में इसकी शुरुआत हुई थी. इसके बाद UAE, बहरीन, मोरक्को और सूडान जैसे देशों ने इजरायल से दोस्ताना संबंध बनाए, व्यापार और यात्रा शुरू की और कई समझौते किए. अमेरिका का कहना है कि इससे मिडिल ईस्ट में शांति और आर्थिक सहयोग बढ़ेगा.

हालांकि कई देश और संगठन इसका विरोध भी करते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि फिलिस्तीन मुद्दे का समाधान हुए बिना इजरायल से रिश्ते सामान्य नहीं होने चाहिए.ट्रंप के इतने बड़े भू-राजनीतिक बयान के बीच पाकिस्तान को लेकर की गई टिप्पणी अलग नजर आई. जहां बाकी नेताओं को उनके संवैधानिक पदों से पहचाना गया, वहीं पाकिस्तान की तरफ से सेना प्रमुख का नाम लिया गया. शहबाज शरीफ का कहीं जिक्र नहीं था. हाल ही में इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान बातचीत से जुड़ी कूटनीतिक गतिविधियों के दौरान भी फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ही सबसे ज्यादा सक्रिय नजर आए. उन्होंने विदेशी प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात की, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से सीधे बातचीत की और पूरे समय प्रक्रिया में प्रमुख भूमिका निभाई.पाकिस्तान में सेना और नागरिक सरकार के बीच ताकत का असंतुलन कोई नई बात नहीं है. आजादी के बाद से ही सेना विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में बड़ा प्रभाव रखती रही है और कई बार चुनी हुई सरकारों पर भारी पड़ी है. बता दें कि पाकिस्तान ऐतिहासिक रूप से इजरायल को मान्यता देने से इनकार करता रहा है. उसका कहना रहा है कि सामान्य संबंध तभी संभव हैं जब एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी देश की स्थापना हो जाए. ऐसे में अगर पाकिस्तान अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने की तरफ बढ़ता है, तो उसे देश के अंदर राजनीतिक और आम जनता दोनों स्तर पर बड़े विरोध का सामना करना पड़ सकता है.
