UCC लागू करके शरीयत पर सीधा हमला कर रही है सरकार!सड़क पर उतरेगा मुस्लिम समाज
असम में हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार ने विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड असम बिल, 2026 पेश किया है. ये बिल सोमवार को विधानसभा में लाया गया, जिसमें शादी, लिव-इन रिलेशनशिप, एक से ज्यादा शादियों को लेकर कई तरफ के नियम बताए गए हैं. ये बिल राज्य में एक समान सिविल कानून लागू करने की दिशा में बड़ा कदम है. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया X पर पोस्ट किया कि असम विधानसभा में ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड 2026 बिल’ का पेश होना, इस बात पर आधिकारिक चर्चा के रास्ते को खोलता है कि असम में UCC की जरूरत इस समय क्यों है और ये हमारे राष्ट्र निर्माताओं की तरफ से दिखाए गए रास्ते को साकार करने में कैसे मदद करेगा.लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा.बहुविवाह (पॉलीगैमी) पर पूरी तरह से रोक की बात कही गई है.दो लोगों में एक पार्टनर भी अगर असम राज्य से है तो उसे शादी और तलाक के लिए रजिस्ट्रेशन करना जरूरी होगा.आदिवासी (ट्राइबल) समुदायों को इस बिल के दायरे से बाहर रखा गया है.UCC शुरुआत से ही विवादित मुद्दा रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि इस बिल का मतलब है सभी नागरिकों के लिए शादी, तलाक, विरासत और उत्तराधिकार जैसे निजी मामलों के लिए कानूनों का एक समान सेट बनाया जाना. संविधान का अनुच्छेद 44, राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों में से एक है. इस अनुच्छेद में UCC के बिल के बारे में बताया गया है. लेकिन आजादी के बाद से अलग-अलग धर्मों पर आधारित सिविल कोड ही निजी मामलों को कंट्रोल करते आए हैं.असम के मंत्री अतुल बोरा ने ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड असम बिल, 2026’ पेश किया. इसमें आदिवासियों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है. BJP-शासित राज्यों में ऐसा कानून लाने वाला असम तीसरा राज्य बन गया है. इस बिल पर चर्चा और वोटिंग मंगलवार को होगी. अप्रैल में चुनावों के बाद बनी असम की 16वीं विधानसभा के पहले सत्र का आखिरी दिन है.BJP ने 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले अपने घोषणापत्र में असम में UCC लागू करने का वादा किया था. राज्य कैबिनेट ने 13 मई को अपनी पहली बैठक में इस कानून को मंजूरी दे दी.

विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस ने संबंधित पक्षों से पहले से सलाह-मशविरा किए बिना इस बिल को पेश किए जाने का विरोध किया. लेकिन स्पीकर रंजीत कुमार दास ने ध्वनि मत के बाद इस कानून को पेश करने की अनुमति दे दी।ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष उबेदुल्लाह आजमी ने बोर्ड अध्यक्ष को पत्र लिखकर कई मुद्दों पर अपनी बात रखी. आजमी ने कहा कि इतिहास गवाह है, जब शरीयत और अस्तित्व पर हमला होता है तो जनता की अदालत में जाना अनिवार्य हो जाता है. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्तर पर उठाई गई संगठित आवाजों लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों और सड़कों पर दिखाई देने वाली एकता का सरकारों पर सीधा असर पड़ता है.उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करना और पूरे देश में इसकी तैयारी का चलना हमारे शरीयत पर सीधा हमला है. आजमी ने मांग की कि बिना किसी देरी के ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की आपात बैठक बुलाई जाए. दो-टूक शब्दों में यह कहना चाहता हूं कि अब केवल औपचारिकता, रस्मी बयानों और कागजी कार्यवाही का समय पूरी तरह खत्म हो चुका है.आजमी ने आरोप लगाते हुए कहा कि धार की ‘कमल मौला मस्जिद’ तथा अन्य ऐतिहासिक मस्जिदों और वक्फ संपत्तियों पर अतिक्रमण और उन्हें नष्ट करने का सिलसिला जारी है. यह संतोष की बात है और राष्ट्र भी इस बात की सराहना करता है कि बोर्ड इन मामलों में पूरी सतर्कता के साथ न्यायिक और कानूनी लड़ाई लड़ रहा है।
