ट्रंप के राज में शेयर बाजार क्रैश!निवेशकों के डूबे लाखों करोड़
अमेरिकी शेयर बाजार में पिछले कई महीनों से जिस खतरे की आहट सुनाई दे रही थी, गुरुवार को वो सच साबित हो गई. न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में बाजार खुलने की घंटी बजते ही बिकवाली का ऐसा तूफान आया, जिसने पूरे बाजार को हिलाकर रख दिया. दिन ढलने के साथ गिरावट का ये सिलसिला गहराता चला गया. आलम ये रहा कि हाई-प्रोफाइल चिप बनाने वाली कंपनी एनवीडिया से लेकर सुरक्षित माने जाने वाले वॉलमार्ट तक के शेयर जमीन पर आ गिरे.इस तबाही की सबसे बड़ी मार उन कंपनियों पर पड़ी, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तेजी के केंद्र में थीं. इसी साल इन कंपनियों ने बाजार को एक के बाद एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचाया था.

हालांकि, इसके साथ ही ये डर भी पैदा हो रहा था कि ये एक गुब्बारा है जो कभी भी फूट सकता है. गुरुवार को निवेशकों के बीच अचानक बाहर निकलने की होड़ मच गई. कारोबार खत्म होने तक नैस्डैक 100 इंडेक्स 6 फीसदी से ज्यादा टूट चुका था. ये मार्च 2020 में कोविड-19 महामारी के बाद की सबसे बड़ी गिरावट है. इस एक दिन की गिरावट में नैस्डैक से 2.3 ट्रिलियन डॉलर की मार्केट वैल्यू साफ हो गई.बाजार की इस सुनामी का सबसे बुरा असर टेक शेयरों पर पड़ा है. अमेरिकी टेक कंपनियों का मुख्य इंडेक्स नैस्डैक करीब 6 फीसदी तक लुढ़क गया है. इसके अलावा S&P 500 में 4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जबकि डाउ जोन्स भी 3 फीसदी नीचे आ गिरा. चौंकाने वाली बात ये है कि सेमीकंडक्टर इंडेक्स करीब 11 फीसदी टूट गया है. मार्च 2020 के बाद से सेमीकंडक्टर सेक्टर में आई ये अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है.दुनिया की सबसे कीमती कंपनी एनवीडिया के शेयरों में 9 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई. ये जनवरी 2025 के बाद कंपनी की सबसे बड़ी गिरावट है. इस एक झटके ने कंपनी की इस साल की पूरी बढ़त को खत्म कर दिया. बाजार का हाल इतना बुरा था कि डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज में शामिल सभी 30 कंपनियों के शेयर लुढ़क गए. वहीं, S&P 500 में 4.4 फीसदी की गिरावट आई.चिप कंपनियों पर नजर रखने वाला फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स (SOX) 12 फीसदी टूट गया. इसमें एनवीडिया, इंटेल, एडवांस्ड माइक्रो डिवाइसेज (AMD) जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं. महामारी की शुरुआत के बाद से ये इसका सबसे खराब दिन रहा. अपने 22 जून के उच्चतम स्तर से ये इंडेक्स अब 38 फीसदी से ज्यादा नीचे गिरकर बियर मार्केट में जा चुका है. छोटे शेयरों वाला रसेल 2000 इंडेक्स भी 4.5 फीसदी टूटकर करेक्शन जोन में चला गया.बाजार में आई इस भारी गिरावट के पीछे अमेरिकी कांग्रेस के चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की बड़ी जीत को मुख्य वजह माना जा रहा है. निवेशकों को डर है कि इस राजनीतिक बदलाव से नीतियों में सख्ती आएगी, जिससे AI इंडस्ट्री की तेज रफ्तार पर ब्रेक लग सकता है. अभी तक इस सेक्टर के कंप्यूटर उपकरणों में सैकड़ों अरब डॉलर का निवेश किया जा रहा था.मतदाताओं ने महंगे गैस दामों के अलावा टेक्सास जैसी जगहों पर बन रहे AI डेटा सेंटर्स के असर से नाराज होकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को झटका दिया है. बुधवार को शुरुआती प्रतिक्रिया में बाजार चढ़ा था. तब निवेशकों को लगा था कि वॉशिंगटन में सत्ता बंटने से ट्रंप की ताकत पर लगाम लगेगी. साथ ही ईरान में चल रहा युद्ध जल्दी खत्म होगा, जिसने महंगाई के साथ ब्याज दरों को बढ़ा दिया था. लेकिन गुरुवार को हवा का रुख बदल गया.दरअसल, AI तकनीक को चलाने के लिए बड़े-बड़े डेटा सेंटर्स की जरूरत होती है. पिछले कुछ समय से इन नए डेटा सेंटर्स के निर्माण को लेकर स्थानीय स्तर पर कड़ा विरोध हो रहा है. इसके पीछे तीन मुख्य कारण सामने आए हैं. पहला कारण बिजली की तेजी से बढ़ती खपत है, जिससे आम लोगों पर बोझ बढ़ रहा है. दूसरा बड़ा मुद्दा पानी की भारी खपत का है, जो सीधे तौर पर पर्यावरण से जुड़े गंभीर सवाल खड़े कर रहा है.इन्हीं विरोधों के चलते अब निवेशकों को डर सता रहा है कि आने वाले दिनों में AI इंफ्रास्ट्रक्चर में होने वाले निवेश की रफ्तार धीमी पड़ सकती है. AI कंपनियों ने भविष्य के मुनाफे को देखते हुए पहले ही अरबों डॉलर का भारी निवेश कर रखा है. अगर सरकारी सख्ती बढ़ती है, तो इन कंपनियों की कमाई पर सीधा असर पड़ेगा. इसी डर ने बाजार में बिकवाली का माहौल बना दिया.शेयर बाजार में मचे इस कत्लेआम पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए इस गिरावट के लिए सीधे तौर पर चुनाव नतीजों को जिम्मेदार ठहराया. ट्रंप ने लिखा कि चुनाव परिणामों की वजह से शेयर बाजार को इतिहास के सबसे बुरे दिनों में से एक का सामना करना पड़ा है. इसे देखना बेहद दुखद है.ट्रंप ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा कि बाजार को एक ऐसे स्तर पर पहुंचाने में बहुत मेहनत लगी थी, जिसे पहले कभी किसी ने नहीं देखा था, लेकिन अब ये हाल हो गया है. उन्होंने आम अमेरिकी नागरिकों को आगाह करते हुए कहा कि इस गिरावट की वजह से आपके 401(k) यानी रिटायरमेंट फंड का पैसा भी घट गया है. ट्रंप ने तंज कसते हुए लिखा कि याद रखिएगा, ये सब रिपब्लिकन की वजह से नहीं, बल्कि ‘डमोक्रेट्स’ (डेमोक्रेट्स) की वजह से हुआ है.पेंडरफंड कैपिटल मैनेजमेंट के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर ग्रेग टेलर ने इस गिरावट पर कहा कि उन्हें 2008 के हाउसिंग संकट या 2001 के इंटरनेट बबल के फूटने की याद आ रही है. उनके मुताबिक, बाजार का पूरा ध्यान सिर्फ एक ही थीम (AI) पर था. ये बाजार का बहुत बड़ा हिस्सा बन चुका था, इसलिए इसका टूटना जरूरी था.बाजार में डर को मापने वाला इंडेक्स VIX 11.57 अंक उछलकर 28.18 पर बंद हुआ, जो मार्च के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है. हेज फंड्स द्वारा अपनी पोजीशन बेचने की अफवाहों के बीच निवेशकों ने सुरक्षित ठिकाने के तौर पर सरकारी बॉन्ड्स (Treasuries) की तरफ रुख किया. मोमेंटम ट्रेडिंग करने वाला iShares MSCI USA Momentum Factor ETF 8.2 फीसदी लुढ़क गया, जो 2020 के बाद का इसका सबसे बुरा दिन था. फाउंडर ईटीएफ के पार्टनर माइकल मोनाघन ने बताया कि बड़े फंड्स खरीदारी से दूर हैं, जबकि छोटे हेज फंड्स (पॉड शॉप्स) अपनी हर पोजीशन बेचने पर मजबूर हैं.गोल्डमैन सैक्स के आंकड़ों के मुताबिक, बिना मुनाफे वाली टेक कंपनियों (जैसे रोकू, पेलोटन) का बास्केट 7.7 फीसदी गिर गया. वहीं, भारी कर्ज वाली कमजोर कंपनियों के शेयर भी करीब 4 फीसदी टूट गए. वेल्थ एलायंस के प्रेसिडेंट एरिक डिटन का कहना है कि डेटा सेंटर्स के खिलाफ हो रहा विरोध कंपनियों की कमाई पर असर डाल सकता है. इसीलिए वो अब सतर्क रुख अपनाते हुए महंगे तेल से बचने के लिए एनर्जी शेयरों में पैसा लगा रहे हैं.
