बाबा बागेश्वर के बयान से मचा बवाल!2027 में BJP को होगा नुकसान?
मौसम के गिरते तापमान के बीच यूपी का सियासी तापमान बढ़ गया है. चुनाव से पहले यूपी में सियासी चिंगारियां भड़क रही है. वैसे तो विवाद के कई एपिसोड हैं. इसके मुख्य किरदार एक ही हैं, नाम हैं पंडित धीरेंद्र शास्त्री यानी बाबा बागेश्वर. जबसे उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को लेकर टिप्पणी की है. इस पर विवादों की नई सीरिज शुरू हो गई है, जिसमें जबरदस्त सियासी टक्कर है.पूरी कहानी की सबसे बड़ी और सबसे चर्चित बात ये है कि भगवान श्रीकृष्ण के अपमान पर दंगल में चुनावी एंगल आ गया है. यूपी में अगले वर्ष चुनाव होने हैं. सभी पार्टियां चुनावी तैयारियों में जुटी हैं. इस बीच बाबा बागेश्वर के बयान के बाद राजनीतिक विमर्श शुरू हो गया है. अब ये सिर्फ एक बयान नहीं रह गया है, बल्कि बहस का बड़ा विषय बन चुका है या फिर ये कहें कि चुनावी मुद्दा बन गया है.बाबा बागेश्वर पर यूपी में जारी कंट्रोवर्सी में तीन एपिसोड हैं.

पहला एपिसोड है पंडित धीरेंद्र शास्त्री के यूपी दौरे को लेकर, जो खबरें आ रही है उसके अनुसार बाबा बागेश्वर के यूपी में कार्यक्रम का कैलेंडर आ चुका है. 17 नवंबर से लेकर 21 दिसंबर तक प्रतापगढ़….गोंडा…झांसी, लखनऊ और आगरा में अलग अलग तारीख में बाबा बागेश्वर यूपी में रहेंगे. इस दौरान धार्मिक प्रवचन देंगे. इसको लेकर राजनीति हो रही है. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बाबा बागेश्वर को कार्यक्रम की अनुमति नहीं देने की मांग की है. इसके पीछे कई तर्क उन्होंने दिए हैं.दूसरे एपिसोड में भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण के पोस्टर वाली लड़ाई है, जिसमें यूपी में चुनाव वाले संकेत भी हैं. संदेश भी हैं. आपको बताएंगे कैसे समाजवादी पार्टी और बीजेपी में पोस्टर वाली टक्कर शुरू हो गई है.तीसरी बड़ी बात ये है कि बाबा बागेश्वर की भगवान कृष्ण पर टिप्पणी को लेकर सनातनी संघर्ष है. कई संत बाबा बागेश्वर के समर्थन में उतर आए हैं तो कई विरोध कर रहे हैं…बाबा बागेश्वर को नसीहत दे रहे हैं.अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बाबा बागेश्वर की टिप्पणी और यूपी दौरे का विरोध किया. ये लिखा कि उनके कार्यक्रम आयोजित करवाने वाले सभी आयोजकों और प्रायोजकों से विनम्र आग्रह है कि वो ऐसे कथाकारों से दूर रहें. ये कथावाचक तो दिखते हैं लेकिन कथा और प्रवचन उनका व्यवसाय है. ऐसे लोग सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए अनर्गल बातें करते हैं. धन ही इनका धर्म होता है. ये समाज और सनातन के बीच खाई पैदा करते हैं. इससे यदुवंशियों और रघुवंशियों दोनों की भावनाएं आहत हुई हैं.इस प्रतिक्रिया से आप समझ सकते हैं मामला कितना गंभीर हो चुका है. इस तरह इस बयान पर राजनीति हो रही है. हालांकि एक सच ये भी है कि बाबा बागेश्वर अपने बयान पर माफी मांग चुके हैं लेकिन कंट्रोवर्सी रुकने का नाम नहीं ले रही है. ऐसा माना जा रहा है कि विपक्ष को यूपी में बाबा बागेश्वर के आने से ध्रुवीकरण वाला डर सता रहा है.यूपी में बाबा बागेश्वर की टिप्पणी पर पोस्टर युद्ध शुरू हो गया है. लखनऊ में समाजवादी पार्टी कार्यालय के बाहर पोस्टर लगा है, जिसमें लिखा है..ना प्रभु राम तुम्हारे हैं, ना श्री कृष्ण हमारे हैं…राम और कृष्ण तो इस संसार के प्यारे हैं….ये पोस्टर तो सिर्फ विवाद का ट्रेलर है…इस पर ऐसी लड़ाई शुरू हो गई है, जिसमें हिंदू मुस्लिम वाला एंगल है….सनातन के अपमान पर टक्कर है.समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा कहते हैं, बीजेपी ऐसे एजेंट तैयार करती है, जो जिन राज्यों में चुनाव होता है, चाहे बिहार हो, चाहे बंगाल हो और चाहे उत्तर प्रदेश हो, वहां पर ये सब लोग माहौल बना कर एक सांप्रदायिक ध्रुवीकरण भी करते हैं और भगवान को भी अब बांटने लगे हैं. ये समाज के लिए हानिकारक ही नहीं, जहर हैं.भाजपा प्रवक्ता हीरो वाजपेयी कहते हैं, अखिलेश का सनातन विरोधी चेहरा खुलकर सामने आ गया, वो छुपाए रखते हैं. इधर फिर जब से आजम खान से मिलकर आए हैं, तब से उनके सिर पर फिर जालीदार टोपी सवार हो गई है, , जिसने उनका मस्तिष्क फेर दिया है और कथा के लिए बहुत बड़ा समुदाय उभरता है और मुझे लगता है इसका विरोध करना अखिलेश की आदत बन चुकी है, लेकिन बहुत बेहतर किया उन्होंने खुलकर विरोध करना शुरू कर दिया. आगामी चुनाव में जनता इसका जवाब देगी.यूपी के मंत्री ओम प्रकाश राजभर कहते हैं कि धीरेंद्र शास्त्री ने बयान गलत दिया तो धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ प्रदेशव्यापी आंदोलन करना चाहिए. अखिलेश को सबको साथ लेकर उनका घेराव करना चाहिए, लेकिन ऐसा तो कुछ नहीं किए. वो देखिए 12:00 बजे बेचारे सो कर उठते हैं तो अली-अली करते हैं, 12:00 बजे के बाद जब नहा-धो के तैयार होते हैं, टीका लगा लेते हैं तो बजरंगबली करते हैं. उनको अब दोनों की चिंता है कि अली को मानें कि बजरंगबली को मानें और यहां तो खुला है कि हम राम को भी मानते हैं कृष्ण को भी मानते हैं, बजरंगबली को भी मानते हैं.पोस्टर वाले युद्ध की कहानी आगे भी है. लखनऊ में समाजवादी पार्टी कार्यालय के बाहर लगा एक और पोस्टर नई रजनीतिक चर्चा का केंद्र में है. इस पोस्टर में एक तरफ अखिलेश यादव की तस्वीर है तो दूसरी तरफ भगवान श्रीकृष्ण की बांसुरी बजाते हुए तस्वीर है. बीच में बड़े-बड़े अक्षरों में ’27 में कृष्ण आएंगे’ संदेश लिखा है. इसके जरिए विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर संदेश दिया गया है कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने जा रही है. अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बनेंगे. पोस्टर में धार्मिक संदेश के बहाने सियासी मायने निकाले जा रहे हैं. यूपी के राजनीतिक समीकरणों को लेकर और बहस तेज हो गई है.एक पोस्टर बीजेपी मुख्यालय के बाहर भी लगाया गया है, जिसमें पीएम मोदी को राम और सीएम योगी को श्रीकृष्ण के रूप में दिखाया गया है, धार्मिक संदेश दिए गए हैं जिसके सियासी मायने हैं. ये लिखा है कि जो राम को लाए हैं वही कृष्ण का लाएंगे.बीजेपी नेता रंजीत सिंह कहते हैं, जो राम मंदिर आज तक नहीं गए हैं, जो मथुरा में भी मंदिर ना बनवाने पैरवी कर रहे हैं. आज वो राम भक्ति की बात कर रहे हैं तो ये सब नकली, सनातनी, ढोंग रचने वालों से जनता को सावधान होना चाहिए.कांग्रेस सांसद इमरान मसूद कहते हैं, इन चीजों से मैं समझता हूं लोगों को बचना चाहिए. आपका इससे मतलब नहीं है, अगर आप देखें, तो भगवान कृष्ण की सत्ता के अंदर तो धर्म की स्थापना हुई, अधर्मियों का नाश हुआ. बीजेपी के तो इतने बेशर्म और छिछले नेता हैं जो पोस्टर में प्रभु श्री राम को छोटा और नरेंद्र मोदी को बड़ा करके दिखाते हैं. किसी महापुरुष का नाम किसी भी पॉलिटिकल आदमी के साथ में घसीटना मैं समझता हूं एक तरीके से ये तौहीन है.बाबा बागेश्वर की टिप्पणी वाले मामले में एक और अपडेट ये है कि संत समाज भी इस बयान को गंभीरता से ले रहा है. इस पर कई संतों ने प्रतिक्रकियाएं दी है. एक तरफ कथावाचक अनिरुद्धाचार्य बाबा बागेश्वर के समर्थन में आ गए हैं वहीं कई संत इस बयान को गलत भी बता रहे हैं. ये कहा जा रहा है कि जो भगवान राम और कृष्ण में अंतर करते हैं वो कथावाचक नहीं हो सकते हैंकथावाचक अनिरुद्धाचार्य कहते हैं, भगवान राम और कृष्ण दोनों अलग-अलग नहीं हैं, पर पूज्य बागेश्वर धाम सरकार ने जो कहा है, वो विनोद में कहा है. ये नहीं है कि वो अलग-अलग मानते हैं या उन्हें इस तरह का अलग-अलग भाव है, नहीं दोनों एक हैं. भाव की गहराई को समझने का प्रयास कीजिए.महामंडलेश्वर जूना अखाड़ा के स्वामी शैलेशानंद गिरि कहते हैं, धीरेन्द्र जो हैं, प्रसिद्धि संपन्न हो गए, धन संपन्न हो गए, पर ज्ञान के अंदर वो अभी भी कहीं ना कहीं बेहद पिछड़े हुए हैं. राम और कृष्ण में भेद का भी. कोई सवाल नहीं उठता, दोनों एक ही हैं. इन दोनों के मध्य के अंदर मेरे-तेरा करने का जो अधिकार है, वो सुदामा को हो सकता है, वो रसखान, तुलसी को हो सकता है. किंतु किसी भी आज के युग के कथावाचक को नहीं हो सकता.कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय कहते हैं, हमारी प्रार्थना है, जो जगत के लोग महाराज जी को बहुत ज्यादा अनर्गल भाव से कह रहे हैं. थोड़ा समझिए भाई, कोई व्यासपीठ पर बैठकर किसी देव की निंदा करेंगे तो वो व्यास किस बात के होंगे. व्यासपीठ पर बैठकर कोई भगवान की निंदा थोड़े ही करता है.साध्वी हर्षानंद गिरी कहती हैं, हैरानी वाली बात ये है कि क्या आप मीडिया में बने रहने के लिए ये पाखंड करते हैं कि एक तरफ आप हिंदू राष्ट्र और सनातनियों को एक करने की बात करते हैं, हिंदुओं में एकता की बात करते हैं और दूसरी तरफ आप भगवानों की तुलना कर रहे हैं. शर्म कीजिए महाराज जी, शर्म कीजिए. आपके मुखारविंद से एक व्यासपीठ पर बैठकर इस तरह का वक्तव्य बिल्कुल भी शोभा नहीं दे रहा.कथावाचक संजीव कृष्ण ठाकुर कहते हैं, कोई कह रहा है कि यूपी में नहीं घुसने देंगे. कोई कह रहा है वहां नहीं घुसने देंगे. ये भारत स्वतंत्र है, आप सबको अपनी असहमति का अधिकार है और समाज में अपनी असहमति कुछ लोगों ने व्यक्त कर दी, जिसे उन्होंने स्वीकार भी कर लिया. इन सारे विषयों का राजनीतिकरण कर उनकी प्रतिष्ठा को लांछित करने का जो प्रयास किया जा रहा है. मुझे नहीं लगता कि ये ठीक है.जगद्गुरु परमहंस, तपस्वी छावनी मंदिर, अयोध्या कहते हैं, पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी ने एक बयान क्या दे दिया कि भगवान श्री कृष्ण टेढ़े हैं और राम जी सीधे हैं, उसको लेकर अखिलेश यादव के अंदर भी लगता है हिंदुत्व जगा और उनको लगा कि भगवान कृष्ण का अपमान हुआ है, जबकि उनको ये पता नहीं है कि बांके का मतलब ही टेढ़ा होता है. आज तक अखिलेशजो भगवान कृष्ण का नाम लेने से डरते रहे, बीच में भगवान को जिस तरह से घसीटा जा रहा है, अपने निजी स्वार्थ के लिए, ये गलत है.
