तेजप्रताप को MLC बना सकती है राजद!लालू यादव का बड़े बेटे के लिए उमड़ सकता है प्यार

 तेजप्रताप को MLC बना सकती है राजद!लालू यादव का बड़े बेटे के लिए उमड़ सकता है प्यार
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बिहार में विधान परिषद चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. 18 जून को 9 सीटों पर चुनाव और एक सीटों पर उपचुनाव होना है. इन 10 सीटों के लिए उम्मीदवारों की तलाश शुरू हो चुकी है. सभी पार्टियां अपने हिस्से की सीट के जरिये सामाजिक और जातिगत समीकरण को साधना चाहती है. हालांकि कुछ नाम ऐसे हैं, जिसको लेकर पहले से तस्वीर साफ है. इनमें स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार और पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश शामिल हैं. इसके अलावे बेटे तेजप्रताप यादव को भी आरजेडी चीफ लालू यादव उच्च सदन भेजना चाहते हैं।चार नामों को लेकर राजनीतिक गलियारे में सबसे ज्यादा चर्चा है. उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र और बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र और बिहार सरकार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का विधान परिषद जाना तय माना जा रहा है. दोनों बिहार सरकार में मंत्री हैं और 6 महीने के अंदर मंत्री को किसी सदन का सदस्य होना जरूरी होता है।संविधान के अनुच्छेद 164 (4) के तहत यह प्रावधान है कि अगर कोई व्यक्ति मंत्री बन गया तो उसे 6 महीने के अंदर विधानसभा और विधान परिषद का सदस्य होना पड़ता है. बांकीपुर को छोड़ दें तो आने वाले दिनों में विधानसभा चुनाव संभावित नहीं है. इस वजह से दोनों नेताओं को विधान परिषद भेजना गठबंधन की मजबूरी है.नीतीश कुमार के पुत्र और वर्तमान में बिहार सरकार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार इन दोनों जेडीयू के अंदर सियासत का केंद्र है. निशांत बिहार सरकार में मंत्री हैं और वह फिलहाल किसी सदन के सदस्य नहीं है. शुरुआती दौर में हरनौत विधायक हरिनारायण सिंह ने निशांत के लिए सीट छोड़ने की बात कही थी लेकिन बाद में वह मुकर गए. ऐसे में वह नीतीश कुमार की खाली हुई सीट से एमएलसी बन सकते हैं।निशांत कुमार के अलावे जिन नामों की चर्चा है, उनमें राजीव कुमार सिंह, ललन मंडल और गुलाम रसूल बलियावी सबसे आगे हैं. राजीव कुमार तारापुर से विधायक रह चुके हैं और सम्राट चौधरी के लिए 2025 चुनाव में सीट छोड़नी पड़ी थी. अति पिछड़ा वर्ग से ललन मंडल को भी मौका मिल सकता है. इसके अलावे अल्पसंख्यक समुदाय से गुलाम रसूल बलियावी की मजबूत दावेदारी है.जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा है कि गठबंधन के तमाम बड़े नेता बैठेंगे तो सीटों को लेकर सहमति बन जाएगी. कहीं कोई परेशानी नहीं है.दीपक प्रकाश उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र हैं. बगैर किसी सदन के सदस्य रहे दीपक प्रकाश को दूसरी बार मंत्री बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है. वह नीतीश कैबिनेट में भी मंत्री थे और सम्राट कैबिनेट में भी उन्हें मंत्री बनाया गया है. उपेंद्र कुशवाहा ने एक तीर से दो निशाना साधा है. बेटे को मंत्री बनाकर उनके लिए विधान परिषद की सीट भी सुरक्षित कर ली. पिछले दिनों उपेंद्र कुशवाहा और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी के बीच मुलाकात की हुई. माना जा रहा है कि बीजेपी अपने कोटे से उनको विधान परिषद भेजने को तैयार है.भारतीय जनता पार्टी के खाते में चार विधान परिषद की सीटें हैं. एक सीट उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र दीपक प्रकाश के लिए छोड़ेगी.

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ऐसे में तीन सीटों पर पार्टी के उम्मीदवार तय होने हैं. प्रदेश स्तर पर संभावित उम्मीदवारों के नाम को तय कर केंद्रीय नेतृत्व के पास भेज दिया गया है.मिल रही जानकारी के मुताबिक बीजेपी की तरफ से कुर्मी जाति से एक नेता को विधान परिषद भेजने की तैयारी है. कुर्मी जाति से सबसे ऊपर नाम पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता और सीनियर लीडर प्रेम रंजन पटेल का है. प्रेम रंजन पटेल को विधान परिषद भेजना को लेकर पार्टी के अंदर सहमति है. प्रदेश स्तर से सरोज रंजन पटेल का नाम भी केंद्रीय नेतृत्व को भेजा गया है.भारतीय जनता पार्टी राजपूत जाति से किसी एक उम्मीदवार को विधान परिषद भेजने की तैयारी में है. मंत्रिमंडल में राजपूत जाति को कम महत्व मिलने के चलते नेताओं में थोड़ी नाराजगी है. राजपूत समुदाय के लोगों की नाराजगी कम करने के लिए पार्टी किसी राजपूत को विधान परिषद भेज सकती है. संगठन से भाजपा में आए राजेंद्र सिंह का नाम दावेदारों की सूची में शामिल है.राजपूत समाज से आने वाली भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष अमृता भूषण का नाम भी प्रदेश स्तर से केंद्र को भेजा गया है. इसके अलावा बाल संरक्षण आयोग के सदस्य राकेश सिंह का नाम भी दावेदारों की सूची में शामिल है. राकेश सिंह लगभग 25 साल से पार्टी के विभिन्न पदों पर काम कर रहे हैं।विपक्ष को एक सीट मिल सकती है. चर्चा है कि आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव अपने बड़े बेटे तेजप्रताप यादव को विधान परिषद भेजना चाहते हैं. हालांकि उन्होंने अपनी पार्टी जनशक्ति जनता दल का गठन कर लिया है. वर्तमान में तेजस्वी यादव से दूरियां बढ़ी हुई है. ऐसे में अब तक तेजस्वी यादव की ओर से हरी झंडी नहीं दी गई है.इसके अलावे सुनील कुमार सिंह के नाम की भी चर्चा है. वह निवर्तमान विधान पार्षद है और राजपूत समाज से आते हैं. उनको लालू परिवार का बेहद करीबी माना जाता है. साथ ही राबड़ी देवी के ‘मुंहबोले भाई’ हैं. हालांकि मौजूदा स्थिति को देखते हुए उनके दोबारा एमएलसी जाने की गुंजाइश है. वहीं, पार्टी नेताओं का कहना है कि जो भी शीर्ष नेतृत्व फैसला लेगा, स्वीकार्य होगा.लालू परिवार में तेज प्रताप यादव कमजोर कड़ी हैं और लालू प्रसाद यादव चाहते हैं कि तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव दोनों फिर से एक मंच पर आ जाएं. लालू प्रसाद यादव की कोशिश होगी कि तेज प्रताप यादव को विधान परिषद भेज दिया जाए. उधर, एनडीए निशांत और दीपक प्रकाश तो तय है।

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