POCSO कोर्ट ने CBI से पूछे ये तीखे सवाल,पटना NEET छात्रा को लेकर घिरी सरकार
पटना में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत और दुष्कर्म की आशंका के मामले में CBI द्वारा दाखिल क्लोजर रिपोर्ट पर स्पेशल POCSO कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. विशेष न्यायाधीश राजीव रंजन रमन की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) को 68 और मृतका की मा को 39 सवालों की लंबी सूची सौंपकर विस्तृत जवाब तलब किया है.मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर को तय की गई है. सुनवाई के दौरान सीबीआई की जांच अधिकारी विभा कुमारी, पटना पुलिस की तत्कालीन आईओ डॉ. अनु कुमारी और मृतका के परिजन अदालत में मौजूद थे.

POCSO कोर्ट ने CBI से तुझे सवाल पूछते हुए कहा कि अपराध का रुख क्या था: क्या सीबीआई का यह अंतिम रुख है कि इस मामले में कोई आपराधिक घटना या अपराध हुआ ही नहीं है?यौन उत्पीड़न का निष्कर्ष: पीड़िता के यौन उत्पीड़न के आरोपों पर सीबीआई का अंतिम और स्पष्ट निष्कर्ष क्या है?जैविक साक्ष्य और वीर्य: पीड़िता के अंतर्वस्त्रों की फॉरेंसिक जांच में वीर्य या अन्य जैविक सामग्री के संबंध में क्या स्थापित हुआ है?डीएनए की वैज्ञानिक सीमा: यदि जांच में डीएनए (DNA) पहचान संभव नहीं हो सकी, तो किस वैज्ञानिक सीमा या तकनीकी कारण से ऐसा संभव नहीं हो पाया?साक्ष्यों का मूल्यांकन: इस पूरे अनुसंधान के दौरान सीबीआई को क्या-क्या साक्ष्य मिले और एजेंसी ने उनका कानूनी व फॉरेंसिक मूल्यांकन किस आधार पर किया?हॉस्टल सील करने का अधिकार: हॉस्टल की पांचवीं मंजिल के कमरे/आवास को किसने, किस तारीख को और किस कानूनी अधिकार से सील किया था?दवाइयों की जब्ती का हिसाब: घटना के बाद 10 जनवरी को कितनी स्ट्रिप्स जब्त की गईं, 20 जनवरी को कितनी और बाद में कितनी दवाएं बरामद हुईं?घटना का शुरुआती घटनाक्रम: पीड़िता को सबसे पहले कहां और किस स्थिति में बेहोश पाया गया था? उसे सबसे पहले किसने देखा और उस समय उसकी शारीरिक स्थिति क्या थी?सीसीटीवी और डीवीआर का मिलान: क्या सीबीआई ने हॉस्टल व आसपास के सीसीटीवी (CCTV) और डीवीआर (DVR) के वास्तविक समय का भौतिक मिलान कराया था?बिहार पुलिस की जांच का समीक्षा: क्या सीबीआई ने बिहार पुलिस की पूर्ववर्ती जांच की केस डायरी, मेडिकल रिपोर्ट, जब्ती सूची और गवाहों के बयानों का गहराई से विश्लेषण किया था?अब आपको हम बताते है कि मृतका की मां से क्या क्या पूछे गए-उत्पीड़न या तनाव की शिकायत: क्या बेटी ने कभी किसी बीमारी, मानसिक परेशानी, उत्पीड़न, धमकी या किसी असामान्य घटना की शिकायत की थी?डिप्रेशन की दवाएं: क्या वह डिप्रेशन या दर्द निवारक दवाएं ले रही थी? क्या आपके पास उससे जुड़े डॉक्टर के नुस्खे या मेडिकल रिकॉर्ड हैं?हॉस्टल को लेकर चिंता: क्या उसे छात्रावास, हॉस्टल मालिक, वहां के कर्मचारियों या अन्य निवासियों के संबंध में कोई विशेष शिकायत थी?घर से रवानगी और आखिरी बात: बेटी घर से कब निकली थी और बेहोश होने से ठीक पहले उससे आपकी आखिरी बातचीत क्या हुई थी?स्वास्थ्य और भोजन की जानकारी: पटना पहुंचने के बाद बातचीत के दौरान उसने अपने स्वास्थ्य, भोजन, दवाओं या किसी व्यक्ति से मुलाकात के बारे में क्या बताया था?कॉल और मैसेज का ब्योरा: क्या आपने सीबीआई को अपनी और बेटी की बातचीत से जुड़े प्रासंगिक कॉल रिकॉर्ड और मैसेज का ब्योरा सौंपा था?पहली सूचना देने वाला कौन: आपकी बेटी के अस्वस्थ या बेहोश होने की सूचना आपको सबसे पहले किस व्यक्ति ने दी थी?अस्पताल की स्थिति: जब आप अस्पताल पहुंचे तो बेटी की हालत कैसी थी और वहां डॉक्टरों ने इलाज के संबंध में आपको क्या बताया था?छात्रा की मौत 11 जनवरी को हुई थी. शुरू में पटना पुलिस केस की जांच कर रही थी. सीबीआई द्वारा 12 फरवरी 2026 को केस टेकओवर करने के बाद 6 अक्टूबर 2026 को कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट सौंपी गई थी. पीड़ित पक्ष ने अदालत में विरोध सह परिवाद पत्र दायर कर सीबीआई की जांच को पक्षपातपूर्ण और लापरवाह बताया है. पीड़ित परिवार का आरोप है कि जेल भेजे गए आरोपी हॉस्टल संचालक मनीष कुमार रंजन को सीबीआई ने रिमांड पर लेकर पूछताछ तक नहीं की. 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल न होने के कारण आरोपी को जमानत मिल गई. परिवार ने क्लोजर रिपोर्ट खारिज कर फिर से जांच का आदेश देने की मांग की है।
