जान लीजिए रिशु श्री टेंडर के नाम पर कैसे करता था खेल?कई नेताओं का नाम भी आएगा सामने!

 जान लीजिए रिशु श्री टेंडर के नाम पर कैसे करता था खेल?कई नेताओं का नाम भी आएगा सामने!
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बिहार में सरकारी टेंडरों की दुनिया में तेजी से उभरे नाम रिशु श्री को लेकर प्रवर्तन निदेशालय और स्पेशल विजिलेंस यूनिट की कार्रवाई ने बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक भूचाल खड़ा कर दिया है. जांच एजेंसियों का दावा है कि रिशु श्री ने कुछ अधिकारियों और अपने करीबी नेटवर्क के जरिए सरकारी टेंडरों में बड़ा खेल खड़ा किया था. आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित कर चुनिंदा कंपनियों को फायदा पहुंचाया जाता था और इसके बदले मोटा कमीशन लिया जाता था।जांच एजेंसियों के मुताबिक रिशु श्री केवल एक सामान्य ठेकेदार नहीं था, बल्कि वह एक ऐसे नेटवर्क का संचालन करता था, जिसमें टेंडर निकलने से पहले ही उससे जुड़ी गोपनीय जानकारियां हासिल कर ली जाती थीं. आरोप है कि टेंडर की शर्तों में बदलाव करवाकर कुछ खास कंपनियों को लाभ पहुंचाया जाता था. इसके बाद संबंधित प्रोजेक्ट उन्हीं कंपनियों को दिए जाते थे, जो कथित तौर पर नेटवर्क से जुड़ी थीं.सूत्रों के अनुसार, इस पूरे सिस्टम में अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच कमीशन का खेल भी चलता था. जांच में यह भी सामने आया है कि रिशु श्री ठेका राशि का करीब 8 से 10 प्रतिशत तक कमीशन लेता था और इसका हिस्सा कथित तौर पर संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया जाता था.

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ईडी की जांच में यह दावा किया गया है कि रिश्वत और कमीशन के पैसे को वैध कारोबारी लेन-देन दिखाने के लिए फर्जी बिलिंग और सब-कॉन्ट्रैक्ट का सहारा लिया जाता था. कई कंपनियों के बीच कागजी लेन-देन दिखाकर रकम को इधर-उधर किया जाता था, ताकि जांच एजेंसियों की नजर से बचा जा सके. जांच एजेंसियां अब उन कंपनियों और कारोबारी नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही हैं, जिनका रिशु श्री से सीधा या अप्रत्यक्ष संबंध रहा है.इस पूरे मामले में सुपौल जिले के बीरपुर में बनने वाले 125 करोड़ रुपए के फिजिकल मॉडलिंग सेंटर का मामला सबसे ज्यादा चर्चा में है. आरोप है कि रिशु श्री ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर यह टेंडर अहमदाबाद की एक कंपनी को दिलवाया. बाद में इसी प्रोजेक्ट का सब-कॉन्ट्रैक्ट अपने करीबी लोगों और नेटवर्क से जुड़ी कंपनियों को दिलाया गया. इस प्रोजेक्ट को लेकर जांच एजेंसियां वित्तीय लेन-देन और टेंडर प्रक्रिया की गहराई से जांच कर रही हैं.जुलाई 2024 में ईडी की छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और कथित कमीशन से जुड़े कागजात बरामद होने का दावा किया गया था. जांच में S Sir नाम से 67 लाख रुपए की एंट्री मिलने की बात भी सामने आई, जिसने कई बड़े अधिकारियों पर सवाल खड़े कर दिए.हाल ही में स्पेशल विजिलेंस यूनिट की कार्रवाई में रिशु श्री के ठिकानों से भारी मात्रा में सोना, चांदी, हीरे, नकदी और संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए. जांच एजेंसियों के अनुसार 61 सेल डीड, करोड़ों रुपये के जेवरात और भारी नकदी मिलने के बाद मामला और गंभीर हो गया है.अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या रिशु श्री अकेले इस पूरे खेल का चेहरा था या फिर बिहार में टेंडर मैनेजमेंट का यह नेटवर्क बड़े अफसरों और प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में चल रहा था. फिलहाल ED और SVU दोनों एजेंसियां मामले की गहराई से जांच कर रही हैं. सूत्रों की मानें तो आने वाले दिनों में कई बड़े नामों पर कार्रवाई हो सकती है।SVU ने अदालत को बताया कि जांच के दौरान संकेत मिले हैं कि रिशु श्री मामले से जुड़े महत्वपूर्ण रिकॉर्ड लेकर विदेश जाने की तैयारी कर रहे थे. एजेंसी को यह भी आशंका है कि वह अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर गवाहों को प्रभावित कर सकते थे या सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते थे. इसी वजह से उनकी गिरफ्तारी को जरूरी बताया गया.रिशु श्री पहले से ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच का सामना कर रहे हैं. उन पर धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत कार्रवाई चल रही है. पिछले साल नवंबर में ED ने पटना समेत देशभर में उनके नौ ठिकानों पर छापेमारी की थी.उस दौरान करोड़ों रुपये नकद और भारी मात्रा में आभूषण बरामद किए गए थे.जांच में यह भी संकेत मिले थे कि सरकारी ठेके हासिल करने के लिए कई विभागों के अधिकारियों को मोटा कमीशन दिया गया था. अब SVU की कार्रवाई के बाद यह मामला और अधिक गंभीर होता नजर आ रहा है।

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