किसान सम्मान निधि क्या अब सिर्फ चुनावी खैरात है या 2019 के लोकसभा चुनाव के जैसा 2024 में भी बीजेपी को दिलाएगी जीत?

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मोदी सरकार के कार्यकाल में देश के किसानों की दशा कितनी सुधरी? यह सवाल किसान सम्मान निधि शुरू होने के 5 साल बाद भी बना हुआ है. दिसंबर 2018 में किसानों की बेहतरी के लिए मोदी सरकार ने पीएम किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत की थी.शुरुआत में सिर्फ 2 एकड़ वाले किसानों को प्रत्येक साल 6 हजार रुपए देने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में एकड़ का बैरियर सरकार ने हटा लिया. किसान निधि लागू होने के बाद से ही सवालों के घेरे में है. पहले इसके लाभार्थी को लेकर सवाल उठा, जिसे सुलझाने के लिए सरकार ने कई बार इस योजना में संशोधन किया है. पीएम किसान स्कीम के पैसे भेजने की टाइमिंग भी विवादों की वजह बनी हुई है. सबसे अहम सवाल इसकी समीक्षा को लेकर है. 5 साल बीत जाने के बाद इस योजना की समीक्षा नहीं की है यानी सरकार यह बताने में विफल रही है कि आखिर इन सम्मान निधि से कितने किसानों की दशा सुधरी या उनकी आमदनी में कितनी बढ़ोतरी हुई?

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यह केंद्र सरकार की एक योजना है, जिसे उन किसानों को दिया जाता है, जिसके पास जमीन हो. कृषि वैज्ञानिक इसे इनपुट सब्सिडी कहते हैं. इसके तहत देश के करीब 8 करोड़ किसानों को प्रत्येक साल 6 हजार रुपए की राशि सहायता के रूप में दी जाती है.सरकार के मुताबिक यह राशि फसल की लागत को कम करने के लिए दी जाती है. सरकार ने 6 हजार रुपए को 3 भागों में बांटकर किसानों को देता है. एक भाग रबी सीजन की बुआई के वक्त, तो एक भाग खरीफ बुआई के वक्त दिया जाता है. इसी तरह तीसरे भाग की राशि जायद फसलों के बुआई के वक्त दी जाती है।

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