उपेंद्र कुशवाहा को मोदी कैबिनेट में मिलेगी जगह!जल्द बनाए जाएंगे मंत्री?

 उपेंद्र कुशवाहा को मोदी कैबिनेट में मिलेगी जगह!जल्द बनाए जाएंगे मंत्री?
Sharing Is Caring:

नरेन्द्र मोदी 3.0 कार्यकाल में कैबिनेट विस्तार की चर्चा जोरों पर है. कई नए चेहरे को मौका मिलेगा तो वहीं कुछ मंत्रियों की छुट्टी भी होगी. उत्तर प्रदेश में अगले साल (2027) चुनाव होना है, उसका असर भी मंत्रिमंडल विस्तार में दिखेगा. बिहार, उत्तर प्रदेश का पड़ोसी है, उत्तर प्रदेश की कई सीटों पर बिहार का असर रहता है, ऐसे में बिहार से भी मंत्रिमंडल विस्तार में नए नाम की चर्चा हो रही है तो वहीं कुछ के विदाई की बात भी कही जा रही है.उत्तर प्रदेश, पंजाब, बंगाल सहित कई राज्यों के मंत्रियों का चेहरा, इस मंत्रिमंडल विस्तार में सीधे असर करता दिखाई पड़ेगा. वैसे तो बिहार में अभी चुनाव नहीं हैं, इसके बावजूद केंद्रीय मंत्रिमंडल में बिहार से उलटफेर के कयास लगाए जा रहे हैं. केंद्रीय मंत्रिमंडल में बिहार से अभी आठ मंत्री बनाए गए हैं जिसमें बीजेपी से चार, जदयू से दो, हम से एक और लोजपा रामविलास से एक मंत्री हैं.पूर्वांचल की कई विधानसभा सीटों पर बिहार का भी असर रहता है. चाहे चुनाव बिहार में हो या उत्तर प्रदेश में, दोनों राज्यों की भूमिका प्रमुख होती है. उत्तर प्रदेश के सात जिले बलिया, देवरिया, कुशीनगर, गाजीपुर, चंदौली, सोनभद्र और महराजगंज बिहार से सटे हुए हैं. इसमें तीन दर्जन से अधिक सीटों पर बिहार का प्रभाव दिखता है. उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में डेढ़ सौ से अधिक विधानसभा की सीटें हैं, जिस पर बिहार का सीधा असर पड़ता है. बिहार से सटे उत्तर प्रदेश की विधानसभा सीटों पर भी बीजेपी की नजर है. इसलिए बिहार में उसी को ध्यान में रखकर फेर बदल हो सकता है.

1000776365

राजनीतिक विशेषज्ञ सुनील पांडे के अनुसार जब भी बड़े राज्यों में चुनाव होते हैं तो केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल किया जाता है. इस बार उत्तर प्रदेश में चुनाव होना है, वहां बड़े फेरबदल हो सकते हैं. पंजाब और बंगाल में हाल में जिस प्रकार से राजनीतिक घटनाएं हुई हैं, विपक्षी दलों में बड़ी सेंधमारी हुई है तो उसको ध्यान में रखकर भी मंत्रिमंडल में कई लोगों को जगह दी जाएगी.सुनील पांडे आगे कहते हैं कि नए मंत्रियों में विवेक ठाकुर, राजीव प्रताप रूडी को मौका मिल सकता है. वैसे नए चेहरे भी बीजेपी ला सकती है. एनडीए के पांच घटक दलों में से राष्ट्रीय लोक मोर्चा से मंत्री नहीं है, तो उपेंद्र कुशवाहा को मोदी सरकार मंत्री बना सकती है.राजनीतिक विशेषज्ञ प्रिय रंजन भारती का कहना है कि बिहार से गिरिराज सिंह की चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि उनकी उम्र 75 साल के करीब हो गई है. काफी समय से मंत्री हैं तो उनके स्थान पर भूमिहार समाज से सीपी ठाकुर के बेटे विवेक ठाकुर को मौका दिया जा सकता है.पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नाम की भी चर्चा हो रही है. मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने के बाद नीतीश कुमार राज्यसभा के सदस्य बने हैं. इसलिए राजनीतिक गलियारे में यह चर्चा है कि नीतीश कुमार को केंद्र में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है. जिससे एक बड़ा मैसेज जाए. हालांकि बिहार सरकार में उपमुख्यमंत्री और जदयू के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी इससे इत्तेफाक नहीं रखते हैं.बिहार से 8 मंत्री हैं उसमें से यदि जदयू से किसी नए चेहरे को शामिल किया जाएगा तो अभी जो मंत्री हैं उनमें से किसी को ड्रॉप करना पड़ेगा. ललन सिंह कद्दावर नेता हैं, जो भूमिहार समाज से आते हैं. ललन सिंह को फिलहाल हटाया जाएगा इसकी संभावना कम है. रामनाथ ठाकुर अति पिछड़ा वर्ग से आते हैं, मंत्री बनाए रखने के लिए उन्हें राज्यसभा भेजा गया है. जदयू में इसलिए कुछ छेड़छाड़ होगा इसकी संभावना कम है.उत्तर प्रदेश में कुर्मी बहुल दो दर्जन सीटों पर भी बिहार प्रभाव डालता है. इसीलिए हमेशा नीतीश कुमार की चर्चा होती रहती है. कहा जा रहा है कि इस बार कुर्मी बहुल सीटों पर भाजपा जदयू से कुछ सीटों पर गठबंधन भी कर सकती है. विशेषज्ञों की मानें तो जिन मंत्रियों को हटाया जाएगा उसी जाति से किसी को मौका मिलेगा. कुल मिलाकर जातीय और सामाजिक समीकरण के साथ उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव जीतने के लिए तैयारी चल रही है. बिहार में पिछले साल (2025) हुए विधानसभा चुनाव में एनडीए को 202 सीटों पर प्रचंड जीत मिली थी. देश में एक मैसेज देने के लिए बीजेपी बिहार का केंद्रीय मंत्रिमंडल में संख्या भी बढ़ा सकती है. एक तरह से बिहार को प्रचंड जीत का इनाम मिल सकता है. खासकर उन इलाकों से प्रतिनिधित्व बढ़ाया जा सकता है जहां जबरदस्त जीत के बाद भी मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है. मिथिलांचल और सारण के इलाके में एनडीए को जबरदस्त जीत मिली थी, तो इन इलाकों से मंत्रिमंडल में नया चेहरे देखने को मिल सकता है.

Comments
Sharing Is Caring:

Related post