अफगानिस्तान-पाकिस्तान के बीच फिर से शुरू हुआ सीमा विवाद,चीन की बढ़ी परेशानी
अफगानिस्तान-पाकिस्तान के बीच सीमा का विवाद कोई नया नहीं है लेकिन दोनों देशों के बीच कुछ समय से सीमा पर हमले नहीं हो रहे थे. ये शांति तब टूटी, जब अफगानिस्तान ने दावा किया कि पाकिस्तान की ओर से उसके कुनार प्रांत में हमले किए गए हैं, जिसमें छात्रों की मौत हो गई. कुनार हमले में मरने वालों की संख्या टोलो न्यूज के मुताबिक 7 हो चुकी है, जबकि 70 लोग जख्मी हो गए हैं, जिसमें 30 छात्र हैं. ये हमला भी पाकिस्तान ने तब किया है, जब वो पूरी दुनिया में अपनी पीस ब्रोकर की छवि चमकाने में जुटा हुआ है. एक ओर से तो वो ईरान-अमेरिका के बीच चौधरी बना हुआ है, तो वहीं दूसरी ओर खुद अफगानिस्तान में शैक्षणिक संस्थान पर हमले कर रहा है.वैसे तो दोनों देशों के बीच हमले कोई नई बात नहीं हैं. साल 2025 में कई बार ये देश आमने-सामने आए और इस साल की शुरुआत में भी अफगानिस्तान-पाकिस्तान की सीमा पर गोले-बारूद दगते रहे. पाकिस्तान इसे आतंकवाद से जोड़कर देखता है, तो अफगानिस्तान इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मानता है. कई राउंड की सीजफायर वार्ता और नाजुक युद्धविराम के बाद भी हमले होते रहे. ताजा हमला भी इसी का उदाहरण है.चीन, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ती दुश्मनी से इसलिए परेशान है क्योंकि इससे उसके कई रणनीतिक और आर्थिक हित प्रभावित होते हैं. सबसे बड़ा कारण है चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर, जो चीन की बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव का अहम हिस्सा है. अगर पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्ते खराब होते हैं, तो इस प्रोजेक्ट की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है. इसके अलावा अफगानिस्तान में अस्थिरता बढ़ने से उग्रवादी समूह सक्रिय हो सकते हैं, जिनका असर चीन के शिनजियांग क्षेत्र तक पहुंच सकता है. यही वजह है कि चीन क्षेत्र में शांति चाहता है ताकि व्यापार और निवेश आसानी से हो सके. लगातार तनाव से सीमा पार व्यापार, कनेक्टिविटी और ऊर्जा परियोजनाएं प्रभावित होती हैं. यही वजह है कि वो खुद कई बार दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की है.अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने सोशल मीडिया के जरिये हमले की न सिर्फ निंदा की बल्कि बताया कि पाकिस्तानी फौज ने कुनार प्रांत के असदाबाद और मनवर के अलग-अलग इलाकों में हमले किए. ये हमले मोर्टार और रॉकेट से भारी बमबारी की गई है.पाकिस्तान ने हमेशा की तरह इस आरोप से इनकार किया है.

पाकिस्तान की ओर से पोस्ट किया गया कि अफगानिस्तान के दावे फर्जी हैं क्योंकि पाक फौज की कार्रवाई खुफिया जानकारी पर आधारित होती है. मंगलवार को फिर पाकिस्तान ने बलूचिस्तान से सटी अफगान सुरक्षा चौकियों को नष्ट करने का दावा किया है.इस घटना ने कूटनीतिक स्तर पर भी तल्खी बना दी. अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तानी दूतावास के शाजे डी अफेयर्स को तलब कर लिया. उसकी ओर से डूरंड लाइन के पास मौजूद रिहायशी इलाकों और खासकर विश्वविद्यालय पर किए गए हमलों पर कड़ा विरोध जताया गया है।ऑपरेशन गजब लिल हक’ में कुछ दिन के विराम के बाद ये हमले हुए। यह अभियान पाकिस्तान ने 26 फरवरी को अफगान तालिबान द्वारा सीमा चौकियों पर किए गए हमलों के जवाब में शुरू किया था। सुरक्षा सूत्रों का हवाला देते हुए, ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ अखबार ने बताया कि पाकिस्तान सेना की जवाबी गोलीबारी में अफगान तालिबान और ‘फितना अल-खवारिज’ को निशाना बनाया गया।फितना अल-खवारिज’ शब्द का इस्तेमाल सरकार द्वारा प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान से जुड़े आतंकवादियों के लिए किया जाता है। सूत्रों ने बताया, ”पाकिस्तान सेना ने चमन सेक्टर में अफगान तालिबान की कई चौकियों को प्रभावी ढंग से निशाना बनाया और नष्ट कर दिया।’सूत्रों ने कहा कि ‘ऑपरेशन गजब लिल हक’ तब तक जारी रहेगा जब तक इसके सभी निर्धारित लक्ष्य हासिल नहीं हो जाते। सरकारी मीडिया के अनुसार, 15 अप्रैल को खैबर पख्तूनख्वा के बाजौर जिले के सीमावर्ती इलाके में अफगान तालिबान बलों की कथित गोलेबारी में दो बच्चों सहित तीन नागरिकों की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए।पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्राधिकारियों ने एक गुट के 17 वर्षीय लड़के महरान की मौत की पुष्टि की है। पुलिस ने आगे बताया कि इस हिंसा में दूसरे गुट के तीन सदस्य भी मारे गये, जबकि कम से कम तीन अन्य घायल हो गए। उसके मुताबिक, यह घटना इलाके में सोने की खदान में अवैध खनन के दौरान हुई, जो बाद में दोनों गुटों के बीच एक जानलेवा टकराव में बदल गई। एहतियात के तौर पर मस्जिदों से निवासियों को घरों के अंदर रहने के लिए कहा गया तथा आसपास के विद्यालयों में बच्चों को अंदर ही रखा गया। इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।
