लश्कर-ए-तैयबा के सामने सरेंडर करेगा पाकिस्तान सरकार,इजराइल से रिश्ते को लेकर छिड़ा विवाद
आतंकी संगठन Lashkar-e-Taiba के डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी ने पाकिस्तान की सत्ता और सेना को खुली धमकी दी है. जिसके बाद पाकिस्तान में हड़कंप मच गया है. कसूरी ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर और पीएम शहबाज शरीफ को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर पाकिस्तान का कोई भी नेता इजराइल को सपोर्ट देने की कोशिश करता है, तो उसे मार दिया जाएगा, तबाह कर दिया जाएगा और बर्बाद कर दिया जाएगा.यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान में इजराइल के साथ संबंधों को लेकर अंदरखाने चर्चाओं और अटकलों का दौर चल रहा है. सैफुल्लाह कसूरी की धमकी से साफ संकेत मिलता है कि पाकिस्तान में कट्टरपंथी और जिहादी आतंकी संगठनों का प्रभाव अब भी बेहद मजबूत है. हालांकि पाकिस्तान ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की इस मांग को खारिज कर दिया है और कहा है कि वह इजराइल के साथ रिश्ते सामान्य नहीं करेगा.इस धमकी के बाद साफ है कि जिन आतंकी संगठनों को कभी पाकिस्तान की सत्ता और खुफिया एजेंसियों ने खड़ा किया था, वही संगठन अब पाकिस्तान के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व को खुलेआम धमका रहे हैं. ये पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा और राजनीतिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरे का संकेत है, क्योंकि पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तानी आतंकी संगठन खुद को सरकार और सेना से भी ऊपर समझने लगे हैं.ट्रंप ने हाल ही में पाकिस्तान को इजराइल के साथ संबंध सामान्य करने और अब्राहम अकॉर्ड्स (Abraham Accords) पर साइन करने की मांग की थी. ट्रंप ने Truth Social पर एक लंबा पोस्ट लिखा, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ किसी भी शांति समझौते को अब्राहम अकॉर्ड्स के विस्तार से जोड़ दिया था. उन्होंने सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन आदि मुस्लिम-बहुल देशों से कहा कि वे इजराइल को औपचारिक रूप से मान्यता दें और अब्राहम अकॉर्ड्स जॉइन करें. हालांकि पाकिस्तान ने इसको खारिज कर दिया है।लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों की यह धमकी पाकिस्तान सरकार के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन गई है। यह एक विडंबना ही है कि जिन आतंकी संगठनों को कभी पाकिस्तान की सत्ता और खुफिया एजेंसियों ने अपने हितों के लिए खड़ा किया था, वही संगठन अब पाकिस्तान के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व को खुलेआम चुनौती दे रहे हैं।

यह स्थिति पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा और उसकी राजनीतिक व्यवस्था के लिए एक गंभीर खतरे का संकेत है और जानकारों का मानना है कि पहलगाम हमले जैसी घटनाओं के बाद इन आतंकी संगठनों का मनोबल काफी बढ़ गया है और वे अब सरकार की नीतियों को अपनी शर्तों पर चलाने की कोशिश कर रहे हैं।सैफुल्लाह कसूरी की धमकी ने यह साबित कर दिया है कि पाकिस्तान में कट्टरपंथी विचारधारा का प्रभाव अभी भी बेहद मजबूत है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भले ही पाकिस्तान अपनी छवि सुधारने की कोशिश करे, लेकिन घरेलू स्तर पर उसे इन जिहादी संगठनों के दबाव का सामना करना पड़ रहा है। इजराइल के मुद्दे पर सरकार का कोई भी कदम देश के भीतर बड़े पैमाने पर हिंसा और अस्थिरता पैदा कर सकता है। यही कारण है कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद इजराइल के प्रति अपने कड़े रुख में बदलाव करने से कतरा रहा है।इस पूरे विवाद की शुरुआत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान से हुई जिसमें उन्होंने पाकिस्तान से इजराइल के साथ संबंध सामान्य करने और अब्राहम अकॉर्ड्स पर हस्ताक्षर करने की मांग की थी। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक लंबा पोस्ट साझा किया था। इस पोस्ट में उन्होंने ईरान के साथ किसी भी संभावित शांति समझौते को अब्राहम अकॉर्ड्स के विस्तार से जोड़ दिया था। ट्रंप ने सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र और जॉर्डन जैसे मुस्लिम-बहुल देशों से अपील की थी कि वे इजराइल को औपचारिक रूप से मान्यता दें और इस समझौते का हिस्सा बनें। हालांकि, पाकिस्तान सरकार ने ट्रंप की इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया है और स्पष्ट किया है कि वह इजराइल के साथ किसी भी तरह के रिश्ते सामान्य नहीं करेगा।
