तीसरी बार उपसभापति चुने गए हरिवंश,विपक्ष ने कर दी बड़ी मांग तो पीएम मोदी ने खूब की सराहना
हरिवंश राज्यसभा के उपसभापति निर्विरोध चुने गए. ये मनोनीत सदस्य के तौर पर राज्यसभा के पहले उपसभापति हैं. पत्रकारिता से राजनीति में आए हरिवंश का यह उपसभापति के रूप में तीसरा कार्यकाल है. राज्यसभा के उपसभापति का पद हरिवंश का उच्च सदन में कार्यकाल नौ अप्रैल को खत्म होने के बाद रिक्त हो गया था. इसके बाद उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यसभा के लिए मनोनीत किया. हरिवंश ने 10 अप्रैल को उच्च सदन की सदस्यता की शपथ ली.केंद्रीय मंत्री और सदन के नेता जे. पी. नड्डा ने हरिवंश को राज्यसभा का उपसभापति निर्वाचित किए जाने के लिए पहला प्रस्ताव पेश किया, जिसका समर्थन एस फांग्नोन कोन्यक ने किया. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने हरिवंश को उपसभापति के पद पर उनके निर्वाचन पर बधाई दी. यह पहली बार है जब किसी मनोनीत सदस्य को उपसभापति चुना गया है.प्रधानमंत्री मोदी, खरगे ने हरिवंश को राज्यसभा का उपसभापति चुने जाने पर बधाई दी. पीएम मोदी ने शुक्रवार को हरिवंश को तीसरी बार राज्यसभा का उपसभापति चुने जाने पर बधाई दी.

सदन के मनोनीत सदस्य हरिवंश का उपसभापति के पद पर निर्वाचन निर्विरोध हुआ. कांग्रेस अध्यक्ष और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने भी हरिवंश को उच्च सदन का उपसभापति चुने जाने पर बधाई दी. हरिवंश को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लगातार तीसरी बार राज्यसभा का उपसभापति चुना जाना अपने आप में इस बात का गहरा प्रमाण है कि सदन को उन पर कितना भरोसा है.पीएम मोदी ने कहा कि सदन को अतीत में हरिवंश के अनुभव और सभी को साथ लेकर चलने के उनके प्रयासों से काफी लाभ हुआ है. उन्होंने कहा कि यह उनके अनुभव और सहज कार्यशैली का सम्मान है. प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि पूर्व में पत्रकार रहे हरिवंश ने पत्रकारिता के उच्च मानकों को बनाए रखा. उन्होंने कहा कि हरिवंश ने अपनी सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (एमपी-एलएडी) का उपयोग विभिन्न विश्वविद्यालयों में शोध परियोजनाओं के लिए किया है. प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए युवाओं में विश्वास जगाने में हरिवंश के योगदान की भी सराहना की.खरगे ने हरिवंश को बधाई दी और उम्मीद जताई कि उपसभापति विपक्ष का ध्यान रखेंगे तथा उन्हें सदन में पर्याप्त समय देंगे. कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि लोकसभा में उपाध्यक्ष का पद 2019 से रिक्त होना उनके लिए पीड़ादायी है. उन्होंने कहा कि आखिर यह पद सात साल से रिक्त क्यों है? ‘यह संविधान की भावना के विपरीत है’.इससे पहले, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने हरिवंश के निर्वाचन के प्रस्ताव को पारित किए जाने के दौरान सदन से वॉकआउट किया.
