सीएम पद के लिए अगड़ी जाति से मंगल पांडे अहम दावेदार,इन नामों पर चर्चा हुई तेज
नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनाव में नामांकन के साथ ही सीएम पद की रेस शुरू हो गई है. पहली बार भारतीय जनता पार्टी का कोई नेता बिहार का सीएम बनेगा. ऐसे में अगले मुख्यमंत्री की तलाश तेज हो गई है. बीजेपी में ऐसे नेताओं की लंबी फेहरिस्त है, जिनको लगता है कि केंद्रीय नेतृत्व उनको ये मौका देगा. इनमें कुछ विधायक और सांसद के साथ-साथ राज्य सरकार और केंद्र सरकार के मंत्री भी शामिल हैं. भारतीय जनता पार्टी के अंदर सीएम फेस को लेकर मंथन शुरू हो गया है. जल्द ही मुख्यमंत्री पद को लेकर अंतिम फैसला लिया जाना है. भारतीय जनता पार्टी के भीतर संभावित मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर कई नेताओं के नाम चर्चा में हैं. पार्टी की ओर से भले ही अभी तक किसी नाम पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी हो लेकिन राजनीतिक गलियारों में चार नेताओं सम्राट चौधरी, नित्यानंद राय, मंगल पांडे और संजीव चौरसिया को संभावित दावेदारों के रूप में देखा जा रहा है।जानकारों के मुताबिक सम्राट चौधरी सीएम पद के सबसे प्रबल दावेदार हैं. लव-कुश समीकरण के लिहाज से भी वह फिट बैठते हैं।

राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि आज की तारीख मे सुशील मोदी की हैसियत में सम्राट चौधरी ही हैं. उन्होंने नीतीश कुमार को हटाने के नाम पर पगड़ी भी बांधी थी. हालांकि जब नीतीश एनडीए में आ गए, तब सम्राट चौधरी ने पगड़ी उतार दिया था. डिप्टी सीएम और गृह मंत्री के साथ पार्टी के विधान मंडल दल के नेता भी हैं. इसलिए उनकी दावेदारी स्वभाविक है.सीएम पद के सबसे बड़े दावेदार सम्राट चौधरी 2018 में बीजेपी में आए हैं. उन्होंने राजनीति की शुरुआत आरजेडी से की थी. राबड़ी सरकार में मंत्री थे. बाद में जेडीयू में शामिल हो गए. उनके पिता शकुनी चौधरी खगड़िया से सांसद और बिहार सरकार के मंत्री रहे हैं. कोइरी समाज से आने वाले सम्राट बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं. उनकी राजनीतिक पहचान ओबीसी नेतृत्व और आक्रामक राजनीतिक शैली की वजह से भी बनी है.गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय की गिनती भी बिहार के बड़े नेताओं में होती है. आज की तारीख में वह गृह मंत्री अमित शाह के करीबी नेताओं में शुमार हैं. वे बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं और संगठन में उनकी गहरी पकड़ मानी जाती है. ऐसे में मुमकिन है कि उनको ये जिम्मेदारी दी जाए.बिहार प्रदेश के राजनीतिक मसलों में नित्यानंद राय की भूमिका जग जाहिर है. समस्तीपुर जिले से आने वाले राय को केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली हुई है. राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय होने के बावजूद बिहार की राजनीति में उनकी मजबूत पकड़ उन्हें मुख्यमंत्री पद के संभावित दावेदारों में शामिल करती है. यादव समाज से आने के चलते नित्यानंद भी उम्मीद लगाए बैठे हैं.वहीं मंगल पांडे बिहार भाजपा के बड़े नेताओं में शामिल है. मंगल पांडे अच्छे संगठनकर्ता माने जाते हैं और वह प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं. अगर अगड़ी जाति अर्थात ब्राह्मण जाति से किसी नेता को सामने लाने की बात होगी तो मंगल पांडे प्रमुख दावेदार होंगे, इनकी संगठन क्षमता की वजह से इन्हें पार्टी में महत्व दिया जाता है.वर्तमान में मंगल पांडे पश्चिम बंगाल के प्रभारी हैं और बिहार सरकार में उन्हें स्वास्थ्य मंत्री की जिम्मेदारी मिली हुई है. मंगल पांडे कोर कमेटी के सदस्य भी हैं. पार्टी के नीतिगत मामलों में इनकी दखल रहती है. वे लंबे समय से संगठन और सरकार दोनों में सक्रिय रहे हैं. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में भी वे काम कर चुके हैं और संगठन में उनकी स्वीकार्यता भी मानी जाती है. प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक समझ के कारण उन्हें भी संभावित नेतृत्व विकल्प के तौर पर देखा जाता है.अगर भारतीय जनता पार्टी अति पिछड़ा कार्ड खेलती है तो वैसी स्थिति में संजीव चौरसिया प्रमुख दावेदार हो सकते हैं. संजीव चौरसिया अति पिछड़ा समाज से आते हैं. उनके पिता गंगा प्रसाद चौरसिया सिक्किम के पूर्व राज्यपाल रह चुके हैं. उनकी पृष्ठभूमि राष्ट्रीय स्वयंसेवक और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की है. अति पिछड़ा वोट बैंक को साधने के लिए चौरसिया पर पार्टी दांव लगा सकती है.इन चारों के अलावे भी कई नाम चर्चा में हैं. इनमें मंत्री प्रमोद कुमार चंद्रवंशी भी शामिल हैं. कहार जाति से आने वाले प्रमोद फिलहाल सहकारिता एवं वन-पर्यावरण मंत्री हैं. इनकी पृष्ठभूमि बीजेपी की ही रही है. एबीवीपी से जुड़े रहे हैं.हालांकि इसको लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं लेकिन जब वह राज्यसभा जा रहे हैं तो इसका मतलब साफ है कि वह पद छोड़ेंगे. ऐसे में माना जा रहा है 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव परिणाम के बाद वह कभी भी सीएम पद से इस्तीफा दे सकते हैं. नीतीश 2005 से 2026 तक सत्ता के केंद्र में रहे हैं. 2014-15 में जीतनराम मांझी के कुछ महीनों के कार्यकाल को छोड़ दिया जाए तो वह लगातार मुख्यमंत्री रहे हैं. इस बीच 2 बार उन्होंने (215-17 और 2022-24) आरजेडी के साथ मिलकर सरकार चलाई।
