ईरान के आगे नरम पड़े ट्रंप!अमेरिका को झुकाकर मानेगा ये देश
ईरान से युद्ध के 5 महीने बाद वाशिंगटन से हथियारों को लेकर जो रिपोर्ट आई है, उसने पेंटागन की टेंशन बढ़ा दी है. इस रिपोर्ट के आधार पर कहा जा रहा है कि अमेरिका को ईरान से युद्ध छेड़ना भारी पड़ गया. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पहली बार अमेरिका में पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों की संख्या 1000 से कम हो गई है. इसी तरह थाड इंटरसेप्टर मिसाइलों की संख्या 300 से कम हो गई है. इन दोनों को अमेरिका की सुरक्षा के लिए काफी अहम माना जाता है.सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक 2 दिन पहले सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज ने अमेरिकी हथियारों को लेकर एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसे पेंटागन के अधिकारियों ने सही ठहराया है.फरवरी में अमेरिका के पास 452 थाड इंटरसेप्टर मिसाइलें थीं, जो अब घटकर 234 रह गई हैं. अप्रैल में इनकी संख्या 260 से अधिक थी. इसी तरह पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों की संख्या पहले 2,330 थी, जो अब घटकर करीब 850 रह गई है. अप्रैल में पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों की संख्या 1,000 से अधिक थी.टॉमहॉक मिसाइलों की संख्या में भी जबरदस्त कमी आई है. एसएम-3 और एसएम-6 नामक मिसाइलों की संख्या में भी गिरावट दर्ज की गई है. अमेरिकी मीडिया की कई रिपोर्ट्स की मानें तो अमेरिका ने हाल में हथियारों की कमी के कारण ही ईरान पर हमला टाल दिया था.हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन रिपोर्टों को खारिज किया था. ट्रंप का कहना था कि हम शांति चाहते हैं. हमारे पास अभी भी कई खतरनाक हथियार मौजूद हैं.जमीनी अभियान वाले सारे हथियार अभी पेंटागन के पास बचे हुए हैं. इसी तरह परमाणु जैसे खतरनाक हथियार भी अमेरिका के पास हैं.

अमेरिका ने तेहरान पर हमले के लिए 2000 बी-2 बॉम्ब को खाड़ी की तरफ भेजा था, जिसका इस्तेमाल नहीं किया गया है.इधर, पेंटागन ने 58 अरब डॉलर के हथियारों का ऑर्डर लॉकहीड मार्टिन कंपनी को दिया है. 2031 में इस ऑर्डर के तहत अमेरिका को हथियार मिलेंगे. अमेरिका ने पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों के लिए यह ऑर्डर दिया है. पेंटागन ने और ज्यादा हथियार खरीदने के लिए अमेरिकी कांग्रेस से अतिरिक्त फंड की मांग की है.दूसरी तरफ ईरान के पास 1500 के आसपास बैलिस्टिक मिसाइलें हैं. ईरान के पास 35 हजार से ज्यादा शाहेद ड्रोन भी हैं, जो जंग में काफी खतरनाक साबित हुआ है.ईरान मिडिल ईस्ट के अमेरिकी ठिकानों को नष्ट कर रहा है. अब तक उसे कुवैत, बहरीन, जॉर्डन और यूएई में बड़ी सफलता मिल चुका है.होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बवाल मचा ही हुआ है, अब यमन में ईरान समर्थित हूथी विद्रोही भी दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक बाब अल-मंदेब स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से जहाजों पर ट्रांजिट फीस लेने का विचार कर रहे हैं. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है जब हूतियों ने हाल ही में सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान किया है. इसके साथ ही पश्चिम एशिया में तनाव का स्तर बढ़ गया है.रिपोर्ट्स के मुताबिक हूतियों ने इस प्रस्ताव पर ईरानी अधिकारियों के साथ चर्चा की थी, जब उनका प्रतिनिधिमंडल ईरान में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के जनाजे के कार्यक्रम में पहुंचा था. सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने हूतियों को एक रेगुलेटरी बॉडी बनाने की सलाह भी दी है, जो बाब अल-मंदेब से गुजरने वाले जहाजों पर लगने वाली ट्रांजिट फीस की निगरानी और प्रबंधन कर सके. हालांकि, अभी तक इस ट्रांजिट फीस को लागू करने की कोई समयसीमा तय नहीं की गई है.रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्रस्तावित योजना के तहत चीनी जहाजों को ट्रांजिट फीस से छूट मिल सकती है. सूत्रों का कहना है कि हाल के महीनों में चीन और हूती समूह के बीच सीधी बातचीत हुई है ताकि दक्षिणी लाल सागर से गुजरने वाले चीनी व्यापारिक और ऊर्जा जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. बता दें कि चीन, सऊदी अरब के कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक है और लाल सागर का यह समुद्री मार्ग उसके लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम है.इस रास्ते हर दिन करीबन 40 लाख से 80 लाख बैरल कच्चा तेल और बड़ी मात्रा में एलएनजी (LNG) दुनिया के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचती है. अगर इस स्ट्रेट पर ट्रांजिट फीस लागू होती है या सुरक्षा जोखिम बढ़ता है, तो शिपिंग लागत बढ़ सकती है, जिसका असर तेल की कीमतों, सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है. साथ ही लाल सागर क्षेत्र में पहले से जारी तनाव और गहरा सकता है. हूतियों का रिका और उसके सहयोगी देशों के साथ टकराव बढ़ सकता है।
