बाढ़ के बाद राहत कार्यों में एक्टिव दिखी सम्राट सरकार,दूषित पानी से कैसे निपटेगी प्रशासन?
बिहार में भीषण बाढ़ का पानी अब धीरे-धीरे कम होने लगा है, लेकिन जैसे-जैसे पानी उतर रहा है, वैसे-वैसे तबाही की असली तस्वीर सामने आ रही है. खेतों से लेकर घरों तक और सड़कों से लेकर पुल-पुलियों तक बाढ़ ने बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया है. कई गांवों का संपर्क अब भी प्रभावित है और ग्रामीणों के सामने रोजमर्रा की जिंदगी को फिर से पटरी पर लाने की चुनौती खड़ी हो गई है.हालिया सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बिहार के 15 जिलों में करीब 49.74 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं. प्रभावित जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, बक्सर, समस्तीपुर, खगड़िया, बेगूसराय, दरभंगा, अररिया, पूर्णिया, मधेपुरा और कटिहार शामिल हैं. इन इलाकों में 575 ग्राम पंचायतों और 88 प्रखंडों तक बाढ़ का असर पहुंचा है.बाढ़ का सबसे बड़ा असर ग्रामीण संपर्क व्यवस्था पर पड़ा है. हालिया रिपोर्टों के अनुसार, करीब 700 ग्रामीण सड़कें बाढ़ के पानी में डूब गईं, जबकि 100 से ज्यादा सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं. कई जगह छोटे बांध भी टूटे हैं. गंगा के तटवर्ती दियारा क्षेत्रों में स्थिति विशेष रूप से गंभीर रही, जहां लोगों को ऊंचे स्थानों और तटबंधों पर शरण लेनी पड़ी.पानी उतरने के बाद सड़कों की स्थिति और स्पष्ट हो रही है. कई स्थानों पर सड़क की ऊपरी परत उखड़ गई है, बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं और संपर्क पथों को भारी नुकसान पहुंचा है.

इसका सीधा असर ग्रामीणों की बाजार, स्कूल और अस्पताल तक पहुंच पर पड़ा है.जहां सड़कें कट गई हैं और नाव सेवा बंद हो रही है, वहां कई गांवों के लोगों के सामने आवागमन का संकट खड़ा हो गया है. मरीजों को अस्पताल ले जाना और बच्चों को स्कूल पहुंचाना तक मुश्किल हो रहा है. ग्रामीण इलाकों में बाढ़ के बाद सबसे बड़ी चुनौती अब क्षतिग्रस्त संपर्क व्यवस्था को बहाल करने की है.बाढ़ से हुए नुकसान का प्रारंभिक आकलन करीब 10 हजार करोड़ रुपये किया गया है. राज्य सरकार के विभिन्न विभागों ने केंद्रीय टीम के समक्ष नुकसान की प्रारंभिक रिपोर्ट रखी है. जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण, आपदा प्रबंधन, डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन समेत कई विभागों ने बाढ़ से हुई क्षति का ब्योरा प्रस्तुत किया.हालांकि, यह अंतिम आंकड़ा नहीं है. रिपोर्टों के मुताबिक, 15 अक्टूबर के बाद नुकसान की अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी, क्योंकि पानी पूरी तरह उतरने के बाद ही फसल, मकान, सड़क, पुल-पुलिया और अन्य बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान का विस्तृत आकलन संभव होगा. इसलिए शुरुआती ₹10 हजार करोड़ का आंकड़ा आगे बढ़ने की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है.केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 16 सितंबर को बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर नुकसान का जायजा लिया था. उन्होंने प्रभावित इलाकों में फसल, मकान, सड़क और अन्य संपत्तियों को हुए नुकसान का आकलन करने तथा केंद्र से हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने की बात कही.बाढ़ प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक राहत देने के लिए राज्य सरकार ने डीबीटी के माध्यम से सहायता राशि भेजी है. 15 सितंबर को 8,27,472 सत्यापित बाढ़ प्रभावित परिवारों के बैंक खातों में प्रति परिवार ₹7,000 की दर से कुल ₹579.23 करोड़ की राशि ट्रांसफर की गई. प्रभावित परिवारों की सूची अंचल स्तर से प्राप्त रिपोर्ट और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है.सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि यदि कोई पात्र परिवार सूची से छूट गया है तो उसका सत्यापन कर सूची में शामिल किया जाए. यानी राहत प्रक्रिया केवल शुरुआती सूची तक सीमित नहीं रहेगी.बाढ़ में क्षतिग्रस्त मकानों का भी सर्वे कराया जा रहा है. अंचल स्तर पर प्रभावित मकानों की क्षति का आकलन किया जाएगा. इसके लिए डिजिटल फोटोग्राफी और स्थानीय स्तर पर सत्यापन की प्रक्रिया अपनाई जाएगी. पात्र परिवारों को निर्धारित सरकारी मानकों के अनुसार गृह क्षति अनुदान उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जाएगी.वहीं, पानी उतरने के बाद अब बड़ी संख्या में परिवार अपने घरों की ओर लौट रहे हैं. लेकिन कई परिवारों के लिए घर लौटना राहत नहीं, बल्कि नई मुश्किलों की शुरुआत है. घरों में जमा कीचड़, बालू और गंदगी साफ करनी पड़ रही है. बाढ़ में खराब हुए अनाज, कपड़े, फर्नीचर और घरेलू सामान को हटाने के साथ मवेशियों के लिए चारा और सुरक्षित जगह की व्यवस्था करना भी चुनौती बना हुआ है.बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को बनाए रखना भी प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती रही. प्रभावित क्षेत्रों में डॉक्टरों और पैरामेडिकल टीमों को नावों के जरिए भेजकर लोगों तक चिकित्सा सहायता और जरूरी दवाएं पहुंचाई गईं. राहत शिविरों में भोजन, पेयजल और दूसरी जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की गई.कई इलाकों में सामुदायिक रसोई और राहत शिविरों के माध्यम से लोगों को भोजन उपलब्ध कराया गया. पानी घटने के बाद भी प्रशासन के सामने बीमारी और दूषित पानी से पैदा होने वाली समस्याओं से निपटने की चुनौती बनी हुई है.बिहार में हर साल बाढ़ बड़ी आबादी और सरकारी बुनियादी ढांचे को प्रभावित करती है. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG की रिपोर्ट में बिहार के करीब 73 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र को बार-बार आने वाली बाढ़ के खतरे वाला क्षेत्र बताया गया था. CAG ने इसकी वजहों में राज्य की भौगोलिक स्थिति, नेपाल से आने वाली नदियों, भारी गाद और नदी तल के ऊंचा होने जैसे कारणों का उल्लेख किया था.इस साल भी नदियों के जलस्तर बढ़ने के पीछे कई कारण रहे. हालिया विश्लेषणों में गंगा समेत कई नदियों में ऊंचे जलस्तर, नेपाल के कैचमेंट क्षेत्रों में बारिश और सहायक नदियों में बैकवाटर को मुख्य कारण बताया गया.बाढ़ का पानी उतरने के बाद बिहार के सामने अब दूसरी बड़ी लड़ाई शुरू हो गई है—पुनर्निर्माण और पुनर्वास की. सड़कें बह गई हैं, संपर्क पथ टूट गए हैं, पुल-पुलियों को नुकसान पहुंचा है, खेतों में फसल बर्बाद हुई है और हजारों परिवारों के घरों में कीचड़ और मलबा जमा है. ऐसे में केवल राहत राशि से समस्या खत्म नहीं होगी. ग्रामीण संपर्क व्यवस्था, मकानों, कृषि क्षेत्र और अन्य बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करने में बड़ी राशि और लंबा समय लग सकता है. सरकार के प्रारंभिक आकलन में नुकसान करीब ₹10 हजार करोड़ पहुंच चुका है
