जान लीजिए किस रास्ते पर चलना चाहती है जेडीयू?कल के मीटिंग में लिए गया बड़ा निर्णय!

 जान लीजिए किस रास्ते पर चलना चाहती है जेडीयू?कल के मीटिंग में लिए गया बड़ा निर्णय!
Sharing Is Caring:

जनता दल यूनाइटेड के प्रदेश कार्यालय स्थित कर्पूरी सभागार में बीते दिन पार्टी का एकदिवसीय प्रबोधन एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में पार्टी के विधायक और विधान परिषद सदस्य शामिल हुए. आधिकारिक तौर पर कार्यक्रम का उद्देश्य जनप्रतिनिधियों को सदन की कार्यप्रणाली, विधायी प्रक्रियाओं और सदन में अपने क्षेत्र के मुद्दों को प्रभावी तरीके से उठाने की जानकारी देना था.कार्यक्रम की राजनीतिक अहमियत इसलिए बढ़ गई थी क्योंकि यह बैठक ऐसे समय हुई, जब JDU के भीतर UCC, फरक्का जल संधि, पार्टी की राजनीतिक दिशा और संगठन में संभावित बदलाव को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही थीं.कार्यक्रम की शुरुआत JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर की. इसके बाद नीतीश कुमार कार्यक्रम स्थल से निकल गए. पार्टी की ओर से भी कहा गया कि कार्यक्रम में उनका लंबे समय तक रुकना तय नहीं था.नीतीश कुमार के कार्यक्रम से निकलने के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने विधानमंडल के सदस्यों को संबोधित किया. कार्यक्रम में JDU के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने पार्टी के विधायक और विधान परिषद सदस्यों को संबोधित किया. कार्यक्रम के औपचारिक हिस्से में विधायी जिम्मेदारियों, सदन की प्रक्रिया और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर जोर दिया गया.संजय झा ने इस दौरान फरक्का जल संधि को लेकर पार्टी का रुख भी स्पष्ट किया. JDU पहले से ही इस मुद्दे पर अभियान चला रही है और पार्टी का कहना है कि बिहार के जल हितों को ध्यान में रखते हुए संधि के नवीनीकरण का विरोध किया जाएगा. पार्टी ने इस मुद्दे पर गंगा किनारे के जिलों में नीतीश संवाद अभियान भी चलाया है.JDU का तर्क है कि फरक्का से बिहार के हित प्रभावित हुए हैं और दिसंबर 2026 में मौजूदा समझौते की अवधि समाप्त होने के मद्देनजर पार्टी इस मुद्दे को आगे भी जोर-शोर से उठाएगी.इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने पार्टी नेताओं को संबोधित किया।

1000854376

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा हैं. कार्यक्रम में पार्टी संगठन, जनप्रतिनिधियों की भूमिका और आगामी राजनीतिक गतिविधियों को लेकर नेताओं को दिशा देने की बात सामने आई.कार्यक्रम का सबसे ज्यादा राजनीतिक महत्व निशांत कुमार के संबोधन को लेकर रहा. निशांत कुमार ने पार्टी के विधायकों और विधान परिषद सदस्यों से नीतीश कुमार की नीतियों और उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने की अपील की. उन्होंने पार्टी नेताओं से एकजुट होकर मजबूती से साथ रहने का संदेश भी दिया.निशांत कुमार की ओर से नीतीश कुमार की नीतियों के साथ पार्टी के मजबूती से खड़े रहने की बात को JDU की राजनीतिक दिशा के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी अपनी सार्वजनिक राजनीतिक लाइन को नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत और उनके तय किए गए मुद्दों के इर्द-गिर्द आगे बढ़ाना चाहती है.हालांकि, इसे UCC पर पार्टी के औपचारिक निर्णय के रूप में पेश करना सावधानी के बिना सही नहीं होगा. उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार JDU ने UCC के ड्राफ्ट को देखने और उसके बाद अपनी अंतिम स्थिति स्पष्ट करने की बात कही थी.इसलिए निशांत कुमार के बयान को पार्टी की व्यापक राजनीतिक लाइन और नीतीश कुमार की नीतियों के समर्थन के संकेत के तौर पर देखा जा सकता है, जबकि UCC पर औपचारिक अंतिम फैसला अलग विषय है.यह कार्यक्रम ऐसे समय हुआ जब UCC को लेकर NDA के भीतर बहस तेज है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से NDA शासित राज्यों में 2029 से पहले UCC लागू करने की बात कहे जाने के बाद JDU की स्थिति पर खास निगाह थी. JDU ने फिलहाल कहा है कि वह UCC के ड्राफ्ट को पहले देखेगी और उसके बाद पार्टी का रुख स्पष्ट करेगी.ऐसे में कार्यक्रम में निशांत कुमार का नीतीश कुमार की नीतियों के साथ मजबूती से खड़े रहने का संदेश पार्टी की राजनीतिक निरंतरता की ओर इशारा करता है, लेकिन इसे UCC पर किसी नए प्रस्ताव या औपचारिक प्रस्ताव पारित होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री और JDU के वरिष्ठ नेता ललन सिंह की गैरमौजूदगी भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय रही. बैठक से पहले ललन सिंह और नीतीश कुमार की मुलाकात को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं हुई थीं. हालांकि, कार्यक्रम में ललन सिंह की अनुपस्थिति के पीछे कोई आधिकारिक कारण सामने नहीं आया है. इसलिए उनकी गैरमौजूदगी को लेकर किसी राजनीतिक निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा. 18 सितंबर के इस कार्यक्रम से पहले JDU के नाम को बदलकर जनता दल नीतीश किए जाने की अटकलें भी राजनीतिक चर्चा में थीं.कार्यक्रम के दौरान पार्टी के नाम बदलने को लेकर न तो कोई औपचारिक चर्चा सामने आई और न ही कोई निर्णय हुआ. इस लिहाज से बैठक में नाम परिवर्तन को लेकर चल रही अटकलों पर फिलहाल कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगी.बैठक का सबसे बड़ा संदेश ये रहा कि नीतीश की विरासत पर जेडीयू आगे बढ़ेगी और कमान निशांत के हाथ में रहेगी. पूरे कार्यक्रम को अगर एक लाइन में समझें तो JDU ने अपने संगठन और जनप्रतिनिधियों को नीतीश कुमार की नीतियों, उपलब्धियों और राजनीतिक विरासत को जनता तक पहुंचाने का संदेश दिया.एक तरफ पार्टी ने विधायकों और विधान परिषद सदस्यों को विधायी प्रक्रिया की जानकारी देने का औपचारिक कार्यक्रम किया, तो दूसरी तरफ UCC और फरक्का जैसे मुद्दों पर अपनी राजनीतिक स्थिति को लेकर भी संकेत दिए. फरक्का जल संधि पर पार्टी का विरोध पहले से स्पष्ट है, जबकि UCC पर पार्टी अभी ड्राफ्ट देखने के बाद अंतिम रुख तय करने की बात कह रही है। वहीं पार्टी के नाम में बदलाव को लेकर बैठक में कोई फैसला सामने नहीं आया।

Comments
Sharing Is Caring:

Related post