ममता गुट को मिला ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिन्ह,पुराना टीएमसी नाम और ‘फूल-घास’ चिन्ह हुआ फ्रीज
पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से लगातार हलचल देखने को मिल रही है. टीएमसी में फूट, नेताओं का पाला बदलना और टीएमसी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर पार्टी के दोनों गुटों में टकराव. इस बीच चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को नया नाम और नया चुनाव चिह्न दे दिया गया है. साथ ही पुरानी टीएमसी के नाम और चुनाव चिह्न को फ्रीज कर दिया गया है.चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के गुट को ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस नाम और फुटबॉल खिलाड़ी का चिन्ह दिया गया है. वहीं, ऋतब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी गुट को डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस नाम और लिफाफा चिन्ह आवंटित किया गया है. इस बीच ममता बनर्जी की पार्टी का चुनाव चिन्ह भी सामने आ गया है.ममता बनर्जी के की पार्टी का चुनाव चिन्ह सामने आ गया है. इसमें एक फुटबॉल खिलाड़ी बना है, जो फुटबाल के किक मारते नजर आ रहा है, इसके साथ ही उसके बैकग्राउंड में तिरंगा बना हुआ है और ऊपर पार्टी का नाम लिखा है ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस.यह चुनाव चिन्ह बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस खेल से लंबे समय से जुड़े रहने के कारण उल्लेखनीय रूप से मेल खाता है.

मार्च 2025 में, अर्जेंटीना के फुटबॉल दिग्गज लियोनेल मेस्सी द्वारा हस्ताक्षरित जर्सी प्राप्त करने के बाद, ममता ने लिखा था कि फुटबॉल एक ऐसा जुनून है जो मेरी रगों में दौड़ता है.ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को तीन नाम और तीन सिंबल का प्रस्ताव भेजा था. ममता गुट ने विकल्पों में तृणमूल ममता कांग्रेस या ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ममता जैसे नाम दिए. सिंबल के विकल्पों में फुटबॉल, प्रार्थना और क्रिकेट बैट शामिल था. क्रिकेट बैट के साथ खेला होबे का स्लोगन भेजा गया. ममता खेमे ने चुनाव आयोग को ईमेल के जरिए अपनी पसंद भेजी थी. वहीं टीएमसी के बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने भी 3 नाम और 3 सिंबल ईमेल के जरिए भेजे थे. चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को 3-3 नाम और 3-3 फ्री सिंबल के विकल्प देने को कहा था. यह व्यवस्था आगामी उपचुनावों के लिए अंतरिम है. मूल पार्टी के नाम और फूल और घास वाले आरक्षित सिंबल पर अंतिम फैसला पैरा 15 की कार्यवाही के बाद होगा.इधर ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग द्वारा तृणमूल कांग्रेस पार्टी का नाम और सिंबल सीज करने के फैसले पर नाराजगी जाहिर की है. बनर्जी ने फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. ममता बनर्जी ने फैसले की आलोचना करते हुए पार्टी की पहचान खोने की तुलना एक मां द्वारा अपने बच्चे को खोने से की और इसे देश के लोकतांत्रिक इतिहास में एक काला दिन बताया. उन्होंने कहा कि वह अंतरिम व्यवस्था को समझौते के रूप में स्वीकार नहीं करेंगी और राजनीतिक, लोकतांत्रिक और कानूनी साधनों के माध्यम से पार्टी की मूल पहचान और उसके फूल और घास के प्रतीक को वापस पाने के लिए अपना संघर्ष जारी रखेंगी.चुनाव आयोग ने अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके पारंपरिक फूल और घास चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल करने से रोक दिया गया है.टीएमसी के दो गुटों के बीच पार्टी पर नियंत्रण को लेकर चल रहे विवाद के बीच चुनाव आयोग ने गुरुवार को आगामी 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनावों के लिए पार्टी के नाम और चिन्ह को फ्रीज कर दिया है. इसके बाद चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को उपचुनाव के लिए ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस नाम और फुटबॉल खिलाड़ी का चुनाव चिन्ह आवंटित किया, जबकि ऋतब्रता बनर्जी से जुड़े अरूप रॉय के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी गुट को डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस नाम और लिफाफा का चुनाव चिन्ह दिया गया. चुनाव आयोग ने कहा कि यह व्यवस्था पश्चिम बंगाल सहित आगामी उपचुनावों पर लागू होगी. अंतरिम व्यवस्था के तहत किसी भी गुट द्वारा मूल पार्टी नाम और आरक्षित चिन्ह का उपयोग नहीं किया जा सकता है.
