बिहार में यादव समाज को बनाया जा रहा है निशाना?पोस्टर से मचा सियासी बवाल!

 बिहार में यादव समाज को बनाया जा रहा है निशाना?पोस्टर से मचा सियासी बवाल!
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बिहार की राजनीति में एक बार फिर जातीय पहचान और सामाजिक सम्मान का मुद्दा चर्चा के केंद्र में आ गया है। यादव समाज को कथित तौर पर निशाना बनाए जाने के आरोपों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बहस छिड़ गई है। राजधानी पटना में लगाए गए एक बड़े पोस्टर ने इस विवाद को और अधिक हवा दे दी है। पोस्टर के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि जिस यादव समाज को कथित रूप से अपराधी और बदमाश साबित करने का प्रयास किया जा रहा है, उसका इतिहास और योगदान कहीं अधिक व्यापक और गौरवशाली रहा है।पटना में लगाए गए इस पोस्टर में यादव समाज की ऐतिहासिक, धार्मिक और राजनीतिक भूमिका को प्रमुखता से दर्शाया गया है। पोस्टर में लिखा गया है कि गीता का ज्ञान देने वाले भगवान श्रीकृष्ण यादव थे, महाभारत के नायक यादव थे, सुदर्शन चक्र धारण करने वाले यादव थे, सुदामा के मित्र यादव थे, पापी कंस का वध करने वाले यादव थे। इसके साथ ही पोस्टर में यह भी लिखा गया है कि भारतीय राजनीति का शक्ति संतुलन यादव समाज है।पोस्टर के अंत में चेतावनी भरे अंदाज में लिखा गया है कि मत छेड़ यादव को,महाभारत से लेकर कुरुक्षेत्र तक सभी का नायक यादव है। जब-जब पाप और पापी बढ़ेगा,हर जुल्म के खिलाफ यादव लड़ेगा।इस पोस्टर को लगाने वाली अपर्णा यादव ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि वर्तमान सरकार सुनियोजित तरीके से यादव समाज की छवि खराब करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यादवों को बदनाम कर उन्हें आम जनता की नजर में अपराधी और उपद्रवी के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। अपर्णा यादव का दावा है कि बिहार में एक विशेष जाति के लोगों को चुन-चुनकर प्रशासनिक कार्रवाई का निशाना बनाया जा रहा है, जिससे समाज में गलत संदेश जा रहा है।उन्होंने हाल ही में पटना के ज्ञान बिंदु कोचिंग संस्थान के संचालक रौशन आनंद की गिरफ्तारी का भी जिक्र किया।

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अपर्णा यादव का कहना है कि पहले किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी या पुलिस कार्रवाई उसके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी, साक्ष्य या किसी अपराध में संलिप्तता के आधार पर होती थी। लेकिन इस मामले में बिना पर्याप्त जांच और स्पष्ट साक्ष्यों के कार्रवाई किए जाने पर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या रौशन आनंद की सबसे बड़ी गलती सिर्फ इतनी थी कि वह यादव समाज से आते हैं?फिलहाल इस पोस्टर और उससे जुड़े आरोपों ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ विपक्ष और यादव समाज के कुछ प्रतिनिधि इसे सामाजिक सम्मान और पहचान का मुद्दा बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ सरकार इसे राजनीतिक लाभ के लिए खड़ा किया गया विवाद करार दे रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और कितना तूल पकड़ता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है। बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण हमेशा से महत्वपूर्ण रहे हैं और ऐसे में यादव समाज को लेकर उठे इस विवाद का राजनीतिक प्रभाव भी दूरगामी हो सकता है।अब बड़ा सवाल यही है कि क्या वास्तव में किसी विशेष समाज को निशाना बनाया जा रहा है, या फिर यह केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा है? इसका जवाब जांच,तथ्यों और समय के साथ ही सामने आएगा, लेकिन फिलहाल इस मुद्दे ने बिहार की सियासत को गर्म जरूर कर दिया है।

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