132 साल पुराने जेल कानून की जगह आया नया कानून,समझ लीजिए पूरी नियम

 132 साल पुराने जेल कानून की जगह आया नया कानून,समझ लीजिए पूरी नियम
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बिहार विधानसभा के मानसून सत्र में राज्य सरकार ने कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से कुछ अहम विधेयकों को मंजूरी दी है. इनमें सबसे अधिक चर्चा ‘बिहार कारा एवं सुधारात्मक सेवा विधेयक, 2026’ की हो रही है. इस नए कानून के तहत अब पैरोल पर जेल से बाहर आने वाले कैदियों की निगरानी के लिए जीपीएस (GPS) आधारित ट्रैकिंग डिवाइस का इस्तेमाल किया जाएगा. सरकार का कहना है कि इससे पैरोल के दुरुपयोग पर रोक लगेगी और अपराध नियंत्रण में तकनीक की बड़ी भूमिका होगी.बिहार सरकार ने विधानसभा से पारित नए कारा कानून के तहत यह प्रावधान किया है कि पैरोल पर जेल से बाहर आने वाले कैदियों की लोकेशन और गतिविधियों पर तकनीक के जरिए नजर रखी जाएगी. इसके लिए उन्हें जीपीएस आधारित इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग डिवाइस पहनाई जाएगी.

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इस डिवाइस के जरिए पुलिस और जेल प्रशासन यह पता लगा सकेगा कि पैरोल पर बाहर आया कैदी कहां है, तय शर्तों का पालन कर रहा है या नहीं और कहीं वह प्रतिबंधित क्षेत्र या संदिग्ध गतिविधियों में तो शामिल नहीं हो रहा. सरकार का मानना है कि इससे पैरोल के दौरान फरार होने, अपराध करने या नियमों के उल्लंघन की घटनाओं में कमी आएगी.बिहार सरकार ने 132 वर्ष पुराने जेल कानून को समाप्त कर ‘बिहार कारा एवं सुधारात्मक सेवा विधेयक, 2026’ लागू किया है. नए कानून का उद्देश्य केवल कैदियों को जेल में रखना नहीं, बल्कि उन्हें सुधारात्मक प्रक्रिया से जोड़ना भी है. इसमें जेल प्रशासन के आधुनिकीकरण, डिजिटल निगरानी, कैदियों के पुनर्वास और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है.पैरोल का मतलब है कि जेल में सजा काट रहे किसी कैदी को मानवीय आधार पर सीमित अवधि के लिए अस्थायी रूप से जेल से बाहर रहने की अनुमति देना. ध्यान देने वाली बात यह है कि पैरोल मिलने का अर्थ सजा खत्म होना नहीं है. पैरोल की अवधि पूरी होने के बाद कैदी को वापस जेल लौटना अनिवार्य होता है.पैरोल का उद्देश्य कैदी को परिवार और समाज से जुड़े रहने का अवसर देना तथा उसके सामाजिक पुनर्वास को बढ़ावा देना है.परिवार के किसी सदस्य की गंभीर बीमारीमाता-पिता, पति-पत्नी या संतान की मृत्यु बेटे या बेटी की शादी अन्य गंभीर मानवीय परिस्थितियांकुछ मामलों में लंबे समय तक अच्छे आचरण के आधार पर जेल में खराब आचरण वाले कैदी पहले पैरोल की शर्तें तोड़ चुके कैदी आतंकवाद से जुड़े मामलों में दोषी देशद्रोह के मामलों में सजा पाए कैदीराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर अपराधी बलात्कार के बाद हत्या जैसे जघन्य अपराधों में दोषीइसमें कैदी को तय अवधि के लिए बिना पुलिस एस्कॉर्ट के छोड़ा जाता है. उसे निर्धारित शर्तों का पालन करना होता है. कई मामलों में स्थानीय थाने में समय-समय पर उपस्थिति दर्ज करानी पड़ती है. इसकी अवधि परिस्थितियों के अनुसार तय होती है.यह बहुत सीमित समय के लिए दी जाती है. अंतिम संस्कार, विवाह या अन्य विशेष परिस्थितियों में कैदी पुलिस सुरक्षा के साथ बाहर जाता है. पूरी अवधि के दौरान वह पुलिस की निगरानी में रहता है और कार्यक्रम समाप्त होने के बाद उसे वापस जेल ले जाया जाता है.जीपीएस आधारित ट्रैकिंग डिवाइस कैदी की लोकेशन को लगातार रिकॉर्ड करेगी. इससे प्रशासन को कई तरह की जानकारी मिल सकेगी, जैसे—कैदी किस स्थान पर मौजूद है.क्या वह पैरोल की शर्तों का पालन कर रहा है.क्या वह तय क्षेत्र से बाहर गया है.क्या वह किसी संदिग्ध गतिविधि या प्रतिबंधित इलाके में पहुंचा है.यदि किसी प्रकार का उल्लंघन होता है तो पुलिस तुरंत कार्रवाई कर सकेगी.सरकार का कहना है कि पहले कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें पैरोल पर बाहर आए कुछ अपराधी दोबारा आपराधिक गतिविधियों में शामिल पाए गए या समय पर जेल वापस नहीं लौटे. इसके अलावा कई बार प्रभावशाली कैदियों को पैरोल मिलने और उसके दुरुपयोग को लेकर राजनीतिक विवाद भी सामने आए हैं. ऐसे मामलों को देखते हुए निगरानी व्यवस्था को तकनीक से जोड़ने का फैसला लिया गया है.विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो—पैरोल का दुरुपयोग कम हो सकता है.फरार होने की घटनाओं पर रोक लगेगी.पुलिस की निगरानी अधिक प्रभावी होगी.जेल प्रशासन को वास्तविक समय में जानकारी मिल सकेगी.अपराध नियंत्रण में तकनीक की भूमिका बढ़ेगी.हालांकि, इसके साथ यह भी सुनिश्चित करना होगा कि निगरानी व्यवस्था कानून और नागरिक अधिकारों के अनुरूप लागू हो तथा इसका दुरुपयोग न हो.बिहार सरकार का दावा है कि नया कारा कानून राज्य की जेल व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम है. जीपीएस आधारित निगरानी, डिजिटल तकनीक और नए कानूनी प्रावधानों के जरिए अपराध नियंत्रण को अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश की जा रही है. यदि यह व्यवस्था सफल रहती है, तो बिहार उन राज्यों की सूची में शामिल होगा जहां पैरोल पर रिहा कैदियों की निगरानी के लिए आधुनिक ट्रैकिंग तकनीक का व्यवस्थित उपयोग किया जाता है. इससे कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था में भी सुधार आने की उम्मीद है.

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