चंद्रशेखर ने आकाश आनंद को अपनी पार्टी में आने का दिया ऑफर,यूपी की गरमाई सियासत
उत्तर प्रदेश में इस समय बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख मायावती के उत्तराधिकारी को लेकर खूब चर्चा चल रही है. हालांकि मायावती ने अपने छोटे भाई आनंद कुमार के दोनों बेटों आकाश और ईशान आनंद को पार्टी में पद न देने की बात साफ कह दी है और कुमारी दीपिका आनंद पर भरोसा दिखाया है. अब इसको लेकर राजनीति शुरू हो गई है. सांसद चंद्रशेखर आजाद ने आकाश आनंद को अपनी पार्टी में आने का न्योता दे दिया है. उन्होंने कहा कि आकाश आनंद मेरी पार्टी में आ जाएं, हम दोनों मिलकर बाबा साहब का मिशन पूरा करेंगे.चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि BSP में मेरे लिए दरवाजे बंद हैं, लेकिन आकाश आनंद के लिए दरवाजे खुले हैं. उन्होंने आकाश आनंद को अपना छोटा भाई बताते हुए कहा कि हो सकता है मेरे और आकाश के बीच राजनीतिक मतभेद हों, लेकिन मेरे मन में आकाश के लिए कुछ भी बुरा नहीं है. हालांकि ये कोई नई बात नहीं है जब चंद्रशेखर आजाद ने आकाश आनंद को अपनी पार्टी में आने का न्योता दिया है. इससे पहले साल 2014 में भी एक इंटरव्यू में उन्होंने आकाश आनंद को अपनी पार्टी में शामिल होने का अनुरोध किया था.

दरअसल, शनिवार को लखनऊ के इको गार्डन में पंचायत सहायकों के प्रदर्शन में शामिल हुए सांसद चंद्रशेखर आजाद ने आकाश आनंद को लेकर ये बातें कही. प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए पंचायत सहायक 5 दिन से मानदेय बढ़ाने समेत अन्य मांगों को लेकर लखनऊ में प्रदर्शन कर रहे हैं. चूंकि तेज धूप हो रही है, ऐसे में धूप से बचने के लिए पंचायत सहायक छाता लेकर प्रदर्शन में पहुंचे।इसी बीच चंद्रशेखर आजाद भी धरना स्थल पर पहुंचे, जिसके बाद उनके समर्थक उन्हें देखने के लिए पेड़ पर चढ़ गए. इस दौरान चंद्रशेखर आजाद ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया और मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रखने की बात कही. उन्होंने कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, हमारे भाई किसी की मांग नहीं भरेंगे।आकाश आनंद और अशोक सिद्धार्थ के मामले में भी यही सवाल उठ रहा है कि आखिर मायावती तक पार्टी के अंदर चल रही गतिविधियों की कौन सी और किस तरह की जानकारी पहुंच रही थी. इस आशंका को इसलिए भी चर्चा मिल रही है क्योंकि अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास की घोषणा के बाद अपने बयान में संकेत दिया था कि उनके राजनीतिक विरोधी मायावती के कान भर रहे थे. हालांकि, उन्होंने किन लोगों पर यह आरोप लगाया, इसका पूरा विवरण सार्वजनिक तौर पर स्पष्ट नहीं किया गया है. यहीं से सवाल उठता है कि क्या आकाश आनंद के खिलाफ पार्टी के भीतर कोई ऐसा माहौल बनाया जा रहा था, जिसने मायावती के फैसलों को प्रभावित किया? फिलहाल इसका कोई आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है.इसी पूरे घटनाक्रम के बीच बसपा के भीतर शक्ति संतुलन को लेकर रामजी गौतम का नाम भी चर्चा में है. रामजी गौतम पार्टी के राज्यसभा सांसद हैं. मीडिया में छपी रिपोर्टों के मुताबिक, अशोक सिद्धार्थ और रामजी गौतम के बीच पार्टी में प्रभाव और जिम्मेदारियों को लेकर लंबे समय से अंदरूनी प्रतिस्पर्धा की चर्चा रही है. रिपोर्टों में दावा किया गया है कि जब अशोक सिद्धार्थ पार्टी में मजबूत होते थे, तब रामजी गौतम के प्रभार वाले राज्यों में बदलाव किए जाते थे. वहीं, जब अशोक सिद्धार्थ कमजोर हुए तो रामजी गौतम की भूमिका मजबूत होती दिखाई दी. हालिया घटनाक्रम में अशोक सिद्धार्थ पर कार्रवाई के बाद रामजी गौतम को 10 राज्यों वाले सेक्टर-1 की जिम्मेदारी दिए जाने की बात सामने आई है. इसे भी पार्टी के भीतर बदलते शक्ति संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि, दोनों नेताओं के बीच किसी औपचारिक गुटबाजी या टकराव की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने आया है।इसके बाद आकाश आनंद की जगह उनके छोटे भाई ईशान आनंद को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा भी सामने आई. इससे बसपा में परिवार की अगली पीढ़ी और पार्टी के भविष्य के नेतृत्व को लेकर सवाल और बढ़ गए. लेकिन अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि ईशान आनंद को आकाश आनंद के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर आगे बढ़ाया जा रहा है. इस संबंध में मायावती की ओर से ऐसी कोई स्पष्ट घोषणा सामने नहीं आई है।
