बांकीपुर में BJP के लिए परेशानी खड़ा करेंगी तेजप्रताप की प्रत्याशी!वैश्य वोट बैंक में होगी टूट!
बिहार की सबसे हाई-प्रोफाइल विधानसभा सीटों में शामिल बांकीपुर का उपचुनाव 30 जुलाई को होना है. यह चुनाव बेहद दिलचस्प हो चुका है. भाजपा, राजद, जन सुराज और जनशक्ति जनता दल (जेएसजेडी) ने अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतार दिए हैं..चारों दलों ने सामाजिक समीकरण, संगठन और महिला वोट बैंक को ध्यान में रखकर उम्मीदवारों का चयन किया है. ऐसे में सवाल है कि किस उम्मीदवार की ताकत क्या है और उनकी कमजोरियां क्या हैं.चार प्रमुख उम्मीदवार में एक उम्मीदवार ऐसा है जो पहले चुनाव लड़ चुका है बाकी के तीन उम्मीदवार ऐसे हैं जो पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं. आपको बता दे की रेखा गुप्ता 2025 के विधानसभा चुनाव में बांकीपुर सीट से लड़ी थी और दूसरे स्थान पर रही थी. इसके अलावा भाजपा के अभिषेक बंटी जनशक्ति जनता दल की वीणा मानवी और जनसुरज पार्टी के प्रशांत किशोर पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं।प्रशांत किशोर की मौजूदगी ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को हाई प्रोफाइल बना दिया है और पूरे देश की निगाहें बांकीपुर विधानसभा सीट पर है. दरअसल बांकीपुर सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का पारंपरिक सीट हुआ करता था. नितिन नवीन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने और पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजा. उनके राज्यसभा जाने के बाद बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव हो रहे हैं.प्रशांत किशोर की साख उनकी सबसे बड़ी ताकत है और उसी के बदौलत वह चुनाव के मैदान में उतरे हैं. राज्यव्यापी पहचान और राजनीतिक रणनीतिकार की छवि से प्रशांत को फायदा मिल सकता है.युवा, शिक्षित और बदलाव चाहने वाले मतदाताओं के बीच आकर्षण का केन्द्र हैं. प्रशांत विपक्ष का मजबूत चेहरा बनकर उभरे हैं और इसका फायदा भी मिलता दिख रहा है. व्यक्तिगत छवि चुनाव का सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकती है.प्रशांत किशोर के लिए कुछ नकारात्मक पक्ष भी हैं. पहली बार सीधे विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं. ऐसे में अनुभव की कमी का असर चुनाव पर पड़ सकता है. मजबूत बूथ स्तर का संगठन अभी भाजपा और राजद जितना व्यापक जनसुराज के पास नहीं है. प्रशांत के समक्ष वोटों को समर्थन मे बदलना सबसे बड़ी चुनौती होगी. किसी भी दल से गठबंधन नहीं होने का नुकसान प्रशांत किशोर को हो सकता है।अभिषेक कुमार बंटी के कुछ नकारात्मक पक्ष भी हैं,जो इनकी सियासत पर असर डाल सकते हैं. पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं, इसलिए चुनावी अनुभव की कमी दिख सकती है. इसके आलावे पूर्व विधायक नितिन नवीन जैसी व्यक्तिगत पहचान अभी विकसित होनी बाकी है.सत्ता विरोधी भावना (यदि स्थानीय स्तर पर रही) का असर झेलना पड़ सकता है.भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार अभिषेक बंटी कायस्थ जाति से आते हैं और पार्टी ने कायस्थ वोटरों को नाराज नहीं किया. अभिषेक बंटी का दावा है कि कायस्थ पूरी तरह उनके साथ हैं, क्योंकि वह उसी जाति से आते हैं. अभिषेक बंटी का दावा है कि 25 साल से उन्होंने बांकीपुर की जनता का सेव किया है और इसका पुरस्कार भी उन्हें मिलेगा।

राजद की रेखा गुप्ता दूसरी बार चुनाव के मैदान में है 2025 के विधानसभा चुनाव में रेखा गुप्ता को राष्ट्रीय जनता दल की ओर से उम्मीदवार बनाया गया था. बांकीपुर विधानसभा सीट से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की उम्मीदवार रेखा गुप्ता को 46,363 वोट मिले थे. ट्रैक रिकार्ड को देखते हुए राष्ट्रीय जनता दल ने फिर से रेखा गुप्ता को उम्मीदवार बनाया है और पार्टी को जीत की उम्मीद है.रेखा गुप्ता सशक्त उम्मीदवार के रूप में दिख रही हैं और इन्हें महागठबंधन के वोट पर भरोसा भी है. रेखा गुप्ता के लिए सकारात्मक पक्ष ये है कि पहले भी बांकीपुर से चुनाव लड़ चुकी हैं, इसलिए क्षेत्र में पहचान है. मुस्लिम-यादव (एम-वाई) समीकरण और महागठबंधन के पारंपरिक वोट का आधार सामने है. महिला उम्मीदवार होने के कारण महिला मतदाताओं का समर्थन मिलने की उम्मीद है।जनशक्ति जनता दल (JJD) ने वीणा मानवी को उम्मीदवार बनाया है. सामाजिक समीकरण के बदौलत वीणा मानवी चुनाव के मैदान में हैं. तेज प्रताप यादव ने बनिया समुदाय से आने वाली बीणा मानवी को मैदान में उतारा है.वीणा मानवी के सकारात्मक पक्ष ये है कि वह सोशल एक्टिविस्ट रही है और महिलाओं का समर्थन उन्हें मिल सकता है. महिला उम्मीदवार होने के कारण महिला मतदाताओं तक पहुंच बनाने में कामयाबी मिल सकती है. कुछ सामाजिक वर्गों और स्थानीय नेटवर्क का समर्थन मिलने की उम्मीद है तो छोटे दलों और असंतुष्ट मतदाताओं का समर्थन मिला तो प्रभाव छोड़ने में कमयाब हो सकती है।
