राम मंदिर दान चोरी मामले में SIT जांच की मांग हुई तेज,धर्म के नाम पर चल रहा अपना-अपना जेब भरने का खेल!
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर में दान पात्रों में दान की गई धनराशि चोरी मामले में फैल रही अफवाह को लेकर ट्रस्ट ने सीएम से जांच कराने का अनुरोध किया है. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दान चोरी की अफवाह फैलने से इस पूरे प्रकरण की SIT से जांच के लिए सीएम योगी से अनुरोध किया है. इस मामले में लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है, कोई कुछ कहा रहा है, कोई कुछ कहा रहा है.राम मंदिर दान चोरी प्रकरण के लिए ट्रस्ट ने सीएम से की SIT से जांच करवाने का अनुरोध किया है. मंदिर के दान पात्र से चोरी की मामले में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सीएम से एसआईटी से जांच कराने की बात कही है. इस मामले में अलग-अलग तरह की अफवाहें फैल रही हैं. इसी वजह से राम मंदिर की देखरेख करने वाले ट्रस्ट ने सने तय किया कि अब चुप रहना ठीक नहीं है. ट्रस्ट ने सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जांच कराने का अनुरोध किया.ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री योगी से तीन अनुरोध किया है. जिसमें पहली इस पूरे मामले की जांच एक SIT से करवाई जाए.

SIT एक खास जांच दल होती है जो किसी बड़े मामले की गहराई से, बिना किसी दबाव के जांच करती है. जांच को बिना किसी दबाव और निष्पक्ष कराने का अनुरोध किया है. वहीं ट्रस्ट ने ये भी कहा कि इस मामले में जांच के बाद जो भी दोषी पाया जाए उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए.राज्य सरकार और मुख्यमंत्री योगी का राम मंदिर से गहरा जुड़ाव है. अयोध्या और राम मंदिर योगी सरकार की सबसे पहली प्राथमिकताओं में से एक रही है. SIT का गठन करना राज्य सरकार के अधिकार में आता है, यही वजह है कि ट्रस्ट ने इस मामले में सीधे सीएम से यह अनुरोध किया.श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट कैम्प कार्यालय के प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने कहा कि पहले भी गड़बड़ी पाए जाने पर ट्रस्ट को जानकारी दी गई थी लेकिन तब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. पहले दान के पैसे एकत्रित करने और उसको बैंक भेजने की प्रक्रिया अलग थी, बाद में व्यवस्था बदली गई. पहले कैश काउंटर पर एकत्रित हुए दान ट्रस्ट के अधिकारी के पास आते थे और वहां से बैंक को जाता था. बाद में बैंक ने काउंटर अंदर ही बना दिया और एक स्टाफ़ बिठा दिया. कैश गिनने वाले लोग भी बैंक द्वारा ही लाए जाते थे. उनके द्वारा ही गड़बड़ी की गई है.प्रकाश गुप्ता ने महिपाल सिंह का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने भी गड़बड़ी पकड़ी थी और ट्रस्ट के वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी भी दी थी. जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो महिपाल सिंह वापस कोटा चले गए.
