छात्रों को लेकर राहुल गांधी और भाजपा आमने-सामने,बिहार सरकार को भारी पड़ेगी ये 2 गलतियां

 छात्रों को लेकर राहुल गांधी और भाजपा आमने-सामने,बिहार सरकार को भारी पड़ेगी ये 2 गलतियां
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दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई दिनों तक चला छात्रों का आंदोलन अब भले ही शांत पड़ता दिख रहा हो, लेकिन इसका राजनीतिक और कानूनी असर अब बिहार में तेजी से दिखाई देने लगा है. बिहार बंद के दौरान पुलिस कार्रवाई, छात्रों की गिरफ्तारी और सीवान में एक पुलिसकर्मी द्वारा AK-47 से हवाई फायरिंग की घटना ने पूरे विवाद को नया मोड़ दे दिया है. विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बता रहा है, जबकि बिहार सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई को जरूरी बता रही है.इसी बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी, छात्र संगठन और आरजेडी सांसद मनोज झा की सक्रियता ने इस मुद्दे को सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा दिया है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या जंतर-मंतर का आंदोलन अब बिहार में नया केंद्र बना सकता है और क्या सरकार की कुछ कार्रवाई राजनीतिक रूप से उसके लिए भारी पड़ सकती है.

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पूरा विवाद उस समय और बढ़ गया जब सोशल मीडिया पर सीवान का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एक पुलिसकर्मी प्रोटेस्ट के दौरान AK-47 से हवा में गोलियां चलाता दिखाई दिया।घटना के बाद संबंधित पुलिसकर्मी को सस्पेंड कर दिया गया और जांच के आदेश दिए गए. दूसरी ओर, छात्र संगठनों का आरोप है कि बिहार बंद और छात्र प्रदर्शनों के दौरान बड़ी संख्या में छात्रों को हिरासत में लिया गया और कई पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज किए गए. विपक्षी दलों ने इसे छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश बताया है.वहीं बिहार सरकार और भाजपा का कहना है कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना पुलिस की जिम्मेदारी है और विपक्ष इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहा है. इस पूरे घटनाक्रम ने छात्र आंदोलन को केवल शिक्षा के मुद्दे तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि इसे कानून-व्यवस्था, लोकतांत्रिक अधिकार और राजनीति की बड़ी बहस में बदल दिया है.बिहार बंद के दौरान सीवान में एक पुलिसकर्मी द्वारा AK-47 से हवाई फायरिंग का वीडियो सामने आने के बाद सरकार सवालों के घेरे में आ गई. वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने इस कार्रवाई को उचित नहीं माना और संबंधित पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया. घटना की जांच जारी है. विपक्ष का आरोप है कि छात्रों के प्रदर्शन में इस तरह की कार्रवाई ने सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया है. हालांकि सरकार का कहना है कि मामले में तुरंत कार्रवाई कर दी गई और दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ विभागीय प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.पटना और अन्य स्थानों पर प्रदर्शन के बाद बड़ी संख्या में छात्रों को हिरासत में लिया गया. कुछ मामलों में गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज होने को लेकर भी सवाल उठे. CJP और विपक्षी दलों का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों पर कठोर कार्रवाई लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ है. दूसरी ओर बिहार सरकार का तर्क है कि जहां हिंसा, सरकारी संपत्ति को नुकसान या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश हुई, वहां पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की.बिहार में छात्र आंदोलन के दौरान AK-47 के इस्तेमाल को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि छात्रों के खिलाफ AK-47 का इस्तेमाल हुआ और सरकार से जवाब मांगा. इसके जवाब में भाजपा ने राहुल गांधी के दावे को झूठा और भ्रामक बताते हुए उन पर अराजकता फैलाने का आरोप लगाया तथा देश से माफी मांगने की मांग की. इस बीच सीवान में प्रदर्शन के दौरान AK-47 से हवाई फायरिंग करने वाले पुलिसकर्मी को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी गई है. मामला अब राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है.आरजेडी सांसद मनोज झा ने छात्र आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि केवल आंदोलन होने के आधार पर लाठीचार्ज को उचित नहीं ठहराया जा सकता और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन संविधान द्वारा संरक्षित अधिकार है. हालांकि, अदालत ने अभी मामले के तथ्यों पर अंतिम टिप्पणी नहीं की है और सुनवाई जारी है।

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