ममता बनर्जी के लिए भाजपा बनी मुसीबत,TMC में मची विद्रोह
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में तृणमूल कांग्रेस की करारी हार के बाद पार्टी में विद्रोह अब लोकसभा तक पहुंच गया है. विद्रोही गुट का दावा है कि कुल 28 सांसदों में से 20 लोकसभा सांसद ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की लीडरशिप से अलग हो गए हैं.सूत्रों की माने तो इन सांसदों ने सोमवार को केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर 8 जून को गोपनीय बैठक भी की और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर अलग ब्लॉक बनाने तथा एनडीए को समर्थन देने की बात सोमवार को कही थी.हालांकि मंगलवार को ना तो काकोली घोष दस्तीदार ने और ना ही सुखेंदु शेखर रॉय ने मीडिया से बात की, लेकिन सूत्रों की माने तो बुधवार को लोकसभा स्पीकर के दिल्ली पहुंचने के बाद टीएमसी के बगावती सांसद स्पीकर से मुलाकात कर सकते हैं.टीएमसी में बगावत के बाद मंगलवार को भी सियासत में काफी उतर चढ़ाव रहा. जबकि, सोमवार को ही दिल्ली के 9, मोतीलाल नेहरू मार्ग स्थित भूपेंद्र यादव के आवास पर विद्रोही सांसदों की अहम बैठक हुई थी. सूत्रों की माने तो बैठक में काकोली घोष दस्तिदार जो बरसात से सांसद हैं उनकी प्रमुख भूमिका रहीं.उनके साथ शताब्दी रॉय, शर्मिला सरकार, प्रसून बनर्जी, जगदीश चंद्र बसुनिया, कालीपदा सोरेन, अरूप चक्रवर्ती, आसित मल, अबू ताहेर, खलीलुर रहमान समेत अन्य सांसद भी मौजूद थे. सूत्रों के मुताबिक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए थे.सूत्रों के मुताबिक इस बैठक के बाद बंगाल के सीएम इन विद्रोही गुट के एक नेता के घर पर भी मिलने गए थे, विद्रोहियों ने बैठक में फैसला लिया कि वे खुद को “असली तृणमूल कांग्रेस” मानते हुए अलग संसदीय दल बनाएंगे।.अब नजर बुधवार पर टिकी है, जब लोकसभा स्पीकर चंडीगढ़ से दिल्ली लौटेंगे. हालांकि मंगलवार को टीएमसी के इन विद्रोही नेताओं ने मीडिया से कोई बात नहीं की और ना ही कोई बयान दिया. अंदरखाने ये बात निकल कर सामने आ रही है कि सोमवार को हुई भाजपा नेता के साथ बैठक में ये निर्णय लिया गया था कि आगे के प्लान और योजनाओं के बारे में मीडिया में बयानबाजी ना करें.बहरहाल, सूत्रों की माने तो ये नेता राजधानी में हैं और अपने अगले कदम की योजनाओं पर मंथन कर रहे हैं. इसके लिए आगे की योजना भी तैयार कर ली गई है, जिसमें काकोली घोष दस्तिदार को चीफ व्हिप और शताब्दी रॉय को डिप्टी लीडर बनाए जाने की बात कही गई थी. हालांकि, काकोली घोष ने सोमवार को ये भी दावा किया था कि उन्होंने स्पीकर ओम बिरला को पत्र सौंपा है, जिसमें 20 सांसदों के हस्ताक्षर हैं.विद्रोही सांसदों का आरोप है कि बंगाल में टीएमसी के शासन में कानून-व्यवस्था चरमरा गई थी, भ्रष्टाचार बढ़ गया था और पार्टी में परिवारवाद हावी हो चुका है.

काकोली घोष दस्तीदार ने कहा, “हम ममता दीदी के मूल आदर्शों पर चलना चाहते हैं, न कि एक परिवार के इशारों पर. जनता की समस्याओं बेरोजगारी, हिंसा और विकास पर ध्यान नहीं दिया गया.”हालांकि यह विद्रोह विधानसभा चुनाव हार के तुरंत बाद ही शुरू हो चुका था जिसमें विधायकों ने बगावत करना शुरू किया था और वो ममता की तरफ से बुलाये गए बैठक में नहीं पहुंचे थे. उसके बाद अब ये मामला सांसदों के बीच भी फैल गया.हालांकि जब दिल्ली में ममता की पार्टी के सांसद बगावत कर रहे थे तब ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी दिल्ली में इंडिया ब्लॉक की बैठक में व्यस्त थे. लेकिन खबर मिलते ही पार्टी में हड़कंप मच गया. एक तरफ जहां कीर्ति आजाद जैसे वफादार सांसद विद्रोहियों पर गद्दारी का आरोप लगा रहे है और विद्रोहियों की संख्या पर सवाल उठाते हुए कह रहे कि, बैठक में उतने सांसद नहीं थे जितने का दावा किया जा रहा है.अब सबकी नजर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के फैसले पर है. अगर 20 सांसदों को अलग ब्लॉक मान लिया गया तो टीएमसी टूट जाएगी. विद्रोही गुट पार्टी के नाम और सिंबल पर भी दावा कर सकता है. एंटी-डिफेक्शन कानून से बचने के लिए दो-तिहाई बहुमत (लगभग 19-20) पर्याप्त माना जा रहा है.राजनीतिक विश्लेषक इसे टीएमसी के इतिहास का सबसे बड़ा संकट बता रहे हैं. ममता बनर्जी के लिए यह घातक साबित हो सकता है. स्थिति तेजी से बदल रही है और आगे और सांसद या विधायक जुड़ सकते हैं.
