12 अगस्त को लगेगा इस साल का दूसरा सूर्य ग्रहण,इन देशों में खासतौर पर दिखेगा ये ग्रहण
सूर्य और चंद्र ग्रहण का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. धर्म शास्त्रों में ग्रहण काल के दौरान के विशेष नियम बताए गए हैं. ग्रहण के समय कई सावधानियां बरती जाती हैं. खगोल वैज्ञानिकों के लिए सूर्य और चंद्र ग्रहण एक विशेष घटना मानी जाती है. सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या तिथि पर लगता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में साल का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को लगेगा. हालांकि, इस सूर्य ग्रहण की इतनी चर्चा नहीं की जा रही है, जितनी साल 2027 में लगने वाले सूर्य ग्रहण की जा रही है, क्योंकि इसे सदी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण कहा जा रहा है.साल 2027 में लगने वाला ये सूर्य ग्रहण 06 मिनट 20 या 23 सेकंड से तक रहेगा. इस दौरान दिन में धरती पर अंधेरा छा जाएगा. चंद्रमा के पृथ्वी के पेरिजी के करीब होने के कारण यह ग्रहण इतना लंबा होगा, लेकिन आज से 107 पहले भी एक ऐसा ही सबसे लंबा और पूर्ण सूर्य ग्रहण लगा था, जब धरती पर दिन में ही अंधेरा छा गया था.

29 मई 1919 का सूर्य ग्रहण मानव इतिहास और विज्ञान की दुनिया में सबसे महत्वपूर्ण खगोलीय घटनाओं में शामिल है. इस दौरान धरती पर पूरे 06 मिनट और 51 सेकंड के लिए अंधेरा छा गया था. इस ग्रहण से अल्बर्ट आइंस्टीन का ‘सामान्य सापेक्षता का सिद्धांत’ प्रमाणित हुआ था. इस पूर्ण ग्रहण की तस्वीर आर्थर एडिंगटन ने खींची थी.साल 2027 में लगने वाला ये सूर्य ग्रहण 02 अगस्त को लगेगा. वैज्ञानिकों के अनुसार, भारत में यह ग्रहण पूर्ण रूप में नजर नहीं आएगा, लेकिन देश के ज्यादातर भागों में यह एक आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में दिखाई देगा. इसका अर्थ ये हुआ कि भारत में दिन में पूरी तरह अंधेरा तो नहीं छाएगा, लेकिन फिर भी यहां चंद्रमा द्वारा सूर्य के एक बड़े हिस्से को ढकने की घटना होगी.ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, आंशिक हो या पूर्ण ग्रहण सूतक ग्रहण शुरू होने से 12 घंटे पहले शुरू हो जाता है और जब तक ग्रहण की अवधि समाप्त नहीं हो जाती है, तब तक सूतक काल रहता है, लेकिन ये तभी मान्य होता है जब ग्रहण आपके क्षेत्र में दृश्यमान हो. सदी का ये सबसे लंबा सूर्य ग्रहण पूर्ण तो नहीं, लेकिन आंशिक रूप में दिखाई देगा. इसलिए भारत में सूतक के नियमों का पालन होगा. सूतक के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैंऔर गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने के लिए कहा जाता है.ये ग्रहण खासतौर पर दक्षिणी यूरोप (स्पेन, पुर्तगाल), उत्तरी अफ्रीका (मिस्र, लीबिया), मध्य पूर्व (सऊदी अरब, यूएई) में नजर आएगा.
