दिल्ली को दहलाने की साजिश हुई नाकाम,पाकिस्तान में बैठे चार हैंडलर चला रहे थे पूरा नेटवर्क

 दिल्ली को दहलाने की साजिश हुई नाकाम,पाकिस्तान में बैठे चार हैंडलर चला रहे थे पूरा नेटवर्क
Sharing Is Caring:

राजधानी दिल्ली को दहलाने की एक बड़ी साजिश को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने नाकाम कर दिया है. जांच एजेंसियों के मुताबिक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI, पाकिस्तान और दुबई में बैठे अंडरवर्ल्ड ऑपरेटिव और उनके भारत में मौजूद गुर्गे मिलकर देश के कई बड़े शहरों में आतंक फैलाने की तैयारी कर रहे थे. उनके निशाने पर सिर्फ आम लोग नहीं थे, बल्कि सुरक्षा प्रतिष्ठान, पुलिसकर्मी और देश की महत्वपूर्ण सरकारी संस्थाएं भी थीं. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक लंबे खुफिया ऑपरेशन के बाद इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया. इस कार्रवाई में देश के अलग-अलग हिस्सों से कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इनमें उत्तर प्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र, पंजाब और नेपाल के लोग शामिल हैं.पुलिस का दावा है कि अगर यह मॉड्यूल समय रहते नहीं पकड़ा जाता तो दिल्ली, मुंबई, पंजाब और चंडीगढ़ जैसे शहरों में बड़ी आतंकी वारदातें हो सकती थीं.जांच में सामने आया है कि इस पूरे मॉड्यूल को पाकिस्तान और दुबई में बैठे कई हैंडलर ऑपरेट कर रहे थे. इनमें सबसे प्रमुख नाम अमीर भट्ट, शाहजाद भट्टी, मुन्ना झिंगाड़ा और यावर खान के हैं. ये लोग सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड ऐप्स और दूसरे डिजिटल माध्यमों के जरिए भारत में मौजूद युवाओं और अपराधियों से संपर्क कर रहे थे.इनका तरीका बेहद खतरनाक था. पहले ऐसे युवकों की पहचान की जाती थी जिनका आपराधिक बैकग्राउंड हो या जो पैसों के लालच में आसानी से फंस सकते हों. फिर उन्हें छोटे-मोटे काम देकर नेटवर्क से जोड़ा जाता था. भरोसा बनने के बाद उन्हें हथियार, पैसे और टारगेट दिए जाते थे.स्पेशल सेल पिछले कुछ समय से शाहजाद भट्टी नेटवर्क से जुड़े कुछ लोगों की गतिविधियों पर नजर रख रही थी. खुफिया एजेंसियों से भी इनपुट मिल रहे थे कि पाकिस्तान और दुबई में बैठे कुछ लोग भारत में नई भर्ती कर रहे हैं. तकनीकी निगरानी, मोबाइल सर्विलांस, सोशल मीडिया गतिविधियों और मानव स्रोतों से मिली जानकारी को जोड़कर पुलिस ने कई संदिग्ध लोगों की पहचान की. इसके बाद एक-एक कड़ी को जोड़ते हुए जांच आगे बढ़ाई गई.जांच के दौरान पुलिस की नजर उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर निवासी 23 साल के विजय उर्फ शूटर पर गई. पुलिस को जानकारी मिली कि विजय लगातार पाकिस्तान और दुबई में बैठे हैंडलरों के संपर्क में था. 14 मई को स्पेशल सेल ने उसे पुणे से गिरफ्तार कर लिया. विजय की गिरफ्तारी इस पूरे ऑपरेशन का टर्निंग पॉइंट साबित हुई.पूछताछ में विजय ने कई अहम खुलासे किए. उसने बताया कि उसे दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में आतंक और आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने के निर्देश दिए गए थे. इतना ही नहीं, उसे दिल्ली-NCR में नए लड़कों की भर्ती कर उन्हें नेटवर्क से जोड़ने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक विजय का काम सिर्फ खुद वारदात करना नहीं था, बल्कि नए लोगों को तैयार कर पूरे नेटवर्क को फैलाना भी था.विजय से पूछताछ के दौरान झारखंड के साहिबगंज निवासी नितीश पासवान का नाम सामने आया.

1000052839

पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर 17 मई को उसे भी गिरफ्तार कर लिया. नितीश इस नेटवर्क का सक्रिय सदस्य था और विजय के संपर्क में रहकर कई गतिविधियों में शामिल था।विजय और नितीश से पूछताछ के बाद जांच का दायरा मुंबई तक पहुंच गया. वहां पुलिस ने 27 मई को तौकीर रिजवान अहमद शेख और साजिद महबूब शेख उर्फ अरबाज खान को गिरफ्तार किया. दोनों आरोपी सीधे तौर पर ISI हैंडलर यावर खान और मुन्ना झिंगाड़ा के संपर्क में थे. जांच में पता चला कि इन्हें मुंबई के रहने वाले हुजैफा नाम के व्यक्ति ने भर्ती किया था. अब मुंबई पुलिस ने हुजैफा को पकड़ लिया है.जांच एजेंसियों के मुताबिक तौकीर और अरबाज को दिल्ली और मुंबई में ग्रेनेड हमले और फायरिंग की जिम्मेदारी दी गई थी. उन्हें संभावित टारगेट की रेकी करने और सही समय का इंतजार करने को कहा गया था.आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच में पाकिस्तान में बैठे हैंडलरों के साथ हुई कई बातचीत मिली हैं. पुलिस को ऐसे चैट, ऑडियो मैसेज और डिजिटल सबूत मिले हैं जो सीधे तौर पर इस नेटवर्क को पाकिस्तान स्थित हैंडलरों से जोड़ते हैं. जांच एजेंसियां अब इन मोबाइल फोन और डिजिटल डिवाइस से डाटा रिकवर कर पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हैं.पूरी जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाला खुलासा नेपाल कनेक्शन का रहा. पुलिस ने नेपाल के नागरिक अंग कामी लामा को गिरफ्तार किया है. उसकी भूमिका बेहद अहम बताई जा रही है. जांच में सामने आया कि दिल्ली में आतंकियों के ठहरने के लिए सुरक्षित ठिकानों की व्यवस्था करना और उन्हें पैसे पहुंचाना उसकी जिम्मेदारी थी. यानी वह इस पूरे मॉड्यूल का लॉजिस्टिक और फाइनेंस मैनेजर बनकर काम कर रहा था।अंग कामी लामा की कहानी भी बेहद दिलचस्प है. जांच में पता चला है कि वह 2001 से 2018 तक थाईलैंड की जेल में एक ड्रग्स मामले में बंद रहा था. उसी जेल में उसकी मुलाकात पाकिस्तान के एजाज रसूल और मोहम्मद सलीम उर्फ मुन्ना झिंगाड़ा से हुई थी. जेल में बनी यही पहचान बाद में गहरी दोस्ती में बदल गई. जेल से बाहर आने के बाद भी लामा लगातार मुन्ना झिंगाड़ा के संपर्क में रहा और धीरे-धीरे उसके नेटवर्क का हिस्सा बन गया।

Comments
Sharing Is Caring:

Related post