जनगणना के लिए सबसे पूछे जाएंगे ये 33 सवाल,मोबाइल से खुद भर सकते हैं अपनी जानकारी

 जनगणना के लिए सबसे पूछे जाएंगे ये 33 सवाल,मोबाइल से खुद भर सकते हैं अपनी जानकारी
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जनगणना-2026 का पहला चरण 1 अप्रैल यानि कि आज से शुरू हो रहा है। इसमें 33 सवाल पूछे जाएंगे। इसके मुताबिक, स्थिर रिश्ते में रहने वाले लिव-इन कपल्स को भी शादीशुदा माना जाएगा। ऐसा तब ही होगा जब कपल मानेगा कि उनका रिश्ता लंबा चलने वाला है।पहले फेज के लिए ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया गया है, जहां लोग खुद अपनी जानकारी भर सकेंगे। उनकी मदद के लिए इस पोर्टल पर FAQ भी दिए गए हैं।यह चरण ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना’ कहलाता है। इसका मकसद देश में घरों और बुनियादी सुविधाओं की जानकारी जुटाना है, ताकि सरकार बेहतर योजनाएं बना सके। दूसरे चरण में आबादी से जुड़ी डिटेल जानकारी ली जाएगी।केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने 8 जनवरी को बताया था कि देश में होने वाली जनगणना 2027 का पहला फेज 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच किया जाएगा। हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने यहां 30 दिनों में यह काम पूरा करेंगे।सरकार ने यह भी कहा कि घरों की लिस्टिंग शुरू होने से 15 दिन पहले लोगों को खुद से जानकारी भरने (सेल्फ एन्यूमरेशन) का विकल्प भी दिया जाएगा। दरअसल, जनगणना 2021 में होनी थी, लेकिन कोरोना महामारी की वजह से इसे टाल दिया गया था। यह अब 2027 में पूरी होगी।सरकार ने बताया कि इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। करीब 30 लाख कर्मचारी मोबाइल एप के जरिए जानकारी जुटाएंगे। मोबाइल एप, पोर्टल और रियल टाइम डेटा ट्रांसफर से जनगणना बहुत हद तक पेपरलेस होगी।ये ऐप Android और iOS दोनों पर काम करेंगे। जाति से जुड़ा डेटा भी डिजिटल तरीके से इकट्ठा किया जाएगा। आजादी के बाद पहली बार जनगणना में जाति की गिनती शामिल होगी। इससे पहले अंग्रेजों के समय 1931 तक जाति आधारित जनगणना हुई थी।यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ने अप्रैल में लिया था। 2011 की पिछली जनगणना के अनुसार, भारत की आबादी करीब 121 करोड़ थी, जिसमें लगभग 51.5% पुरुष और 48.5% महिलाएं थीं।दरअसल में कर्मचारी आपसे ये 3 बातें नहीं पूछेंगे-महीने की कमाई या बैंक बैलेंस से जुड़ा कोई भी सवाल।आधार,पैन या कोई भी अन्य पहचान पत्र दिखाने का दबाव।बैंक खाता नंबर या ओटीपी जैसे निजी जानकारी।

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जियो टैगिंग से बना डिजिटल लेआउट मैप बादल फटने, बाढ़ या भूकंप जैसी आपदा के समय उपयोगी साबित होगा। सुदूर हिमालयी क्षेत्र में बसे किसी गांव में बादल फटने जैसी घटना के समय इस मैप से तुरंत पता चल जाएगा कि किस घर में कितने लोग रहते हैं। होटलों में क्षमता के हिसाब से कितने लोग रहे होंगे। इस ब्योरे से बचाव के लिए जरूरी तमाम नौका, हेलिकॉप्टर, फूड पैकेट आदि की व्यवस्था करने में मदद मिलेगी।राजनीतिक सीमाएं जैसे संसदीय या विधानसभा क्षेत्रों का युक्तिसंगत तरीके से निर्धारण करने में भी इससे मदद मिलेगी। जियो टैगिंग से तैयार मैप से यह तस्वीर साफ हो जाएगी कि क्षेत्र में ग्रामीण और शहरी क्षेत्र का संतुलित बंटवारा कैसे हो। समुदायों को ऐसे न बांट दिया जाए कि एक मोहल्ला एक क्षेत्र में और दूसरा मोहल्ला किसी अन्य क्षेत्र में शामिल हो जए। घरों के डिजी डॉट से डिलिमिटेशन (परिसीमन) की प्रक्रिया में आसानी होगी।शहरों में सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों या पार्कों की प्लानिंग करने में भी यह मैप उपयोगी साबित होगा। अगर किसी जगह के घरों के डिजिटल लेआउट में बच्चों की अधिकता होगी तो पार्क और स्कूल प्राथमिकता से बनाने की योजना तैयार की जा सकेंगी। यदि किसी बस्ती में कच्चे मकानों या खराब घरों की अधिकता दिखेगी तो वहां किसी मेडिकल इमरजेंसी के समय तत्काल मोबाइल राहत वैन भेजी जा सकेंगी।इस जनगणना के दस साल बाद होनी वाली जनगणना में डिजिटल मैप के परिवर्तन आसानी से दर्ज किए जा सकेंगे। देश के विभिन्न हिस्सों में शहरीकरण की दर और पलायन के क्षेत्रों की मैपिंग की तुलना सटीक ढंग से की जा सकेगी।आधार की पहचान के साथ जियो टैगिंग मतदाता सूची को सटीक और मजबूत बनाने में सहायक होगी। जब वोटर किसी भौगोलिक स्थान से डिजिटली जुड़ा होगा तो दोहरे पंजीकरण के समय उसके मूल निवास का पता भी सामने आएगा।जनगणना में यह सभी पूछे जाएंगे जिसका उत्तर आपको देना है-1. भवन नंबर या जनगणना नंबर2. मकान नंबर3. मकान के फर्श में इस्तेमाल प्रमुख सामग्री. यानी कि फर्श सीमेंट का है, ग्रेनाइट है, मार्बल है.4. मकान की दीवार में इस्तेमाल सामग्री5. मकान की छत में इस्तेमाल सामग्री6. मकान का इस्तेमाल7. मकान की हालत8. परिवार क्रमांक9. परिवार के सदस्यों की संख्या10. परिवार के मुखिया का नाम11. परिवार के मुखिया का लिंग12. जाति, सामान्य, अनुसूचित जाति, जनजाति, ओबीसी.13. मकान के स्वामित्व की स्थिति14. मकान में कमरों की संख्या15. विवाहित दंपतियों की संख्या16. पेयजल का सोर्स17. पेयजल की उपलब्धता18. बिजली का सोर्स19. शौचालय की उपलब्धता20. शौचालय का प्रकार21. गंदे पानी की निकासी22. स्नानघर की उपलब्धता23. गैस कनेक्शन24. खाना पकाने का मुख्य ईंधन25. रेडियो या ट्रांजिस्टर26. टीवी27. इंटरनेट की सुविधा28. लैपटॉप या कंप्यूटर29. टेलीफोन, मोबाइल, स्मार्ट फोन30. साइकल, स्कूटर, मोटरसाइकल31. कार, जीप, वैन32. मुख्य अनाज33. मोबाइल नंबर

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