सोनम वांगचुक की आंतरिक जीत के पीछे का ये है कारण,केंद्र सरकार ने मजबूरी में हटाया NSA!

 सोनम वांगचुक की आंतरिक जीत के पीछे का ये है कारण,केंद्र सरकार ने मजबूरी में हटाया NSA!
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पर्यावरणविद सोनम वांगचुक जेल से रिहा हो गए हैं, जिन सोनम वांगचुक को कुछ दिन पहले तक जिनको देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया जा रहा था, उन्हें केंद्र ने तत्काल रिहा करने का आदेश जारी किया. लेह हिंसा के बाद जिन्हें NSA यानी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था, अब ये धाराएं हटाकर जेल से रिहा कर दिया गया. वो 6 महीने से राजस्थान की जोधपुर जेल में बंद थे. उनके भाषणों को भड़काऊ बताकर उन्हें जेल में ही रखने की दलीलें दी जा रही थी, पर उब वो आजाद है. आइए जानें कैद से रिहाई तक की उनकी पूरी कहानी.2025 में लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग पर लेह में शांतिपूर्ण प्रदर्शन चल रहे थे और उनमें अचानक हिंसा भड़क गई थी. इन हिंसक प्रदर्शनों में 4 लोगों की मौत हुई थी और 22 पुलिसकर्मियों समेत 45 लोग घायल हुए थे.इसके दो दिन बाद, 26 सितंबर 2025 को सोनम वांगचुक को NSA के तहत हिरासत में लिया गया था. फिर उन्हें लेह से सीधे जोधपुर जेल लाया गया था, तबसे वो इसी जेल में बंद थे.इस दौरान ऐसी खबरें भी सामने आई थी कि जेल में बंद सोनम वांगचुक की हालत बिगड़ गई है, जिसके बाद उनकी पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी.

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4 फरवरी 2026 को उस याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से वांगचुक को NSA के तहत हिरासत में लेने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा था, हालांकि इसके बाद अगली ही सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि सोनम वांगचुक को रिहा नहीं किया जा सकता, समय-समय पर उनकी जांच की गई है वो पूरी तरह फिट हैं.पिछले 5 महीने में ये केस 24 बार कोर्ट में लिस्ट हुआ है और पिछले एक महीने के अंदर केंद्र सरकार के अनुरोध पर दो बार इसकी सुनवाई टाली गई है. हाल ही में दो बार सॉलिसिटर जनरल की बीमारी और उससे पहले वांगचुक के भाषणों की जांच पर जवाब तैयार करने के लिए आवश्यक समय का हवाला देते हुए सुनवाई टालने की मांग की गई थी.26 फरवरी को भी केंद्र सरकार के अनुरोध पर सुनवाई स्थगित कर दी गई थी. 10 मार्च को याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हुए वकील कपिल सिब्बल ने बार-बार सुनवाई टालने की मांग पर आपत्ति जताई थी. उन्होंने कहा था कि ऐसा करके सरकार पूरे देश में एक गलत संदेश भेज रही है.तब जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने संकेत दिया कि वो आगे सुनवाई नहीं टलेगी और मामले को 17 मार्च तक के लिए स्थगित करते हुए अगले सप्ताह के लिए अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था.इसके अलावा 16 फ़रवरी को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए दस्तावेजी सबूतों पर असंतोष जताया था. कोर्ट ने सरकार से वांगचुक के बयानों का वास्तविक और सटीक ट्रांसक्रिप्ट मांगा था. बेंच ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज से कहा था कि आपका अनुवाद 7 से 8 मिनट का है जबकि मूल भाषण केवल 3 मिनट का है. हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में हैं, जहां अनुवाद की सटीकता कम से कम 98 प्रतिशत होनी चाहिए. हमें वास्तविक भाषण का सही अनुवाद चाहिए.वहीं वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि वांगचुक के नाम पर ऐसे शब्द जोड़े गए हैं, जो उन्होंने कभी कहे ही नहीं. इस मामले की सुनवाई 17 मार्च को होनी थी, लेकिन उससे ठीक 3 दिन पहले सोनम वांगचुक को जेल से रिहा करने का आदेश आ गया.उनकी रिहाई पर गृह मंत्रालय की तरफ से एक बयान जारी किया गया कि सोनम वांगचुक निर्धारित हिरासत अवधि का लगभग आधा समय पहले ही पूरा कर चुके हैं. सरकार लद्दाख में आपसी विश्वास का माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है. सभी पहलुओं पर विचार के बाद, सोनम वांगचुक की हिरासत को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जा रहा है.अब सवाल ये है कि जब रिहा करना ही था तो फिर सोनम वांगचुक पर NSA क्यों लगाया था और अगर इतनी गंभीर धाराओं में, इतने गंभीर आरोप के साथ हिरासत में लिया था तो फिर हटा क्यों दिया? 24 सितंबर 2025 को लेह में उत्पन्न गंभीर कानून-व्यवस्था की स्थिति के संदर्भ में सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत हिरासत में लिया गया था.सोनम वांगचुक इस अधिनियम के तहत निर्धारित हिरासत अवधि का लगभग आधा समय पहले ही पूरा कर चुके हैं. सरकार लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास का माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि सभी हितधारकों के साथ रचनात्मक और सार्थक संवाद को आगे बढ़ाया जा सके. इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए और सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद, सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत उपलब्ध शक्तियों का उपयोग करते हुए श्री सोनम वांगचुक की हिरासत को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का निर्णय लिया है.

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