पीएम मोदी ने ट्रम्प के दबाव में भारत का सम्मान रख दिया गिरवी,खरगे ने लगाया गंभीर आरोप

 पीएम मोदी ने ट्रम्प के दबाव में भारत का सम्मान रख दिया गिरवी,खरगे ने लगाया गंभीर आरोप
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लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने पीएम मोदी को अमेरिका से ट्रेड डील रद्द करने की चुनौती दी है. भोपाल में किसान महा चौपाल को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि ये डील किसानों के दिल में तीर है. उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रम्प के दबाव में बिना मंत्रिमंडल से बात किए पीएम मोदी ने समझौता कर लिया. भारत–अमेरिका व्यापार समझौते के ख़िलाफ़ किसानों को गोलबंद करने के लिए कांग्रेस ने “किसान महा चौपाल” की शुरुआत भोपाल से की है. सात मार्च को महाराष्ट्र के यवतमाल में और इसके बाद राजस्थान के श्रीगंगानगर में सभा होगी, जिसे राहुल गांधी और खरगे संबोधित करेंगे. कांग्रेस उन इलाकों पर फ़ोकस कर रही है जहां सोयाबीन, मक्का, कपास और फल के किसान बड़ी संख्या में हैं. ट्रेड डील के पहले चरण में इन फसलों के आयात का जिक्र है. संसद के बजट सत्र के दौरान राहुल गांधी ने किसान नेताओं से मुलाकात की थी और ट्रेड डील के ख़िलाफ़ देशव्यापी आंदोलन की रणनीति पर चर्चा की थी. भोपाल के किसान महाचौपाल के मंच से राहुल गांधी ने यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के प्रति भी समर्थन जताया. एआई सम्मेलन के दौरान भारत मंडपम में प्रदर्शन करने के बाद से यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष समेत आधा दर्जन से ज्यादा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. राहुल गांधी ने कहा, “यूथ कांग्रेस के बब्बर शेर, आप किसी से नहीं डरोगे”. वहीं, किसान महाचौपाल को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी ट्रेड डील को लेकर पीएम मोदी पर निशाना साधा. साथ ही यूथ कांग्रेस विवाद को लेकर पीएम पर पलटवार करते हुए खरगे ने कहा, मैं यूथ कांग्रेस को बधाई देता हूँ कि उन्होंने मोदी के सामने जा कर डट कर बता दिया कि आप समझौता मत कीजिए. खरगे ने आगे कहा, देश का अपमान करने वाले आप हैं क्यूंकि आपने ट्रम्प के आगे देश का सम्मान गिरवी रख दिया. किसान महाचौपाल में भोपाल के आसपास के इलाकों से कांग्रेस कार्यकर्ता और किसान इकट्ठे हुए थे. हालांकि ट्रेड डील को लेकर आशंकाओं से भरे किसानों ने पूछने पर लागत और आमदनी से जुड़ी स्थानीय समस्याओं की ज़्यादा बात की. किसानों का मानना था कि भारत के किसान अमेरिका के किसानों का मुक़ाबला नहीं कर पाएंगे. सभा में उज्जैन के कुछ ऐसे लोग भी मिले जो ख़ुद को बीजेपी का वोटर बता रहे थे लेकिन ट्रेड डील के विरोध में भी थे!बहरहाल, किसानों का मुद्दा हमेशा से सियासी तौर संवेदनशील रहा है. ट्रेड डील के बहाने कांग्रेस को मोदी सरकार को घेरने बड़ा मुद्दा मिल गया है. हालांकि केंद्र सरकार यह दावा कर रही है कि इस डील में देश के किसानों का हित पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है।कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट में पूछा, “आख़िर ऐसी क्या मजबूरी थी कि प्रधानमंत्री मोदी ने सुनिश्चित किया कि दो फ़रवरी 2026 की रात राष्ट्रपति ट्रंप ही भारत-अमेरिका ट्रेड डील की घोषणा करें? …

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अगर पीएम मोदी अपनी नाज़ुक छवि बचाने को लेकर इतने व्यग्र न होते और केवल 18 दिन और प्रतीक्षा कर लेते, तो भारतीय किसान इस पीड़ा और संकट से बच सकते थे और भारत की संप्रभुता भी सुरक्षित रहती.”उन्होंने आरोप लगाया कि ‘भारत-अमेरिका ट्रेड डील दरअसल एक ऐसी कठिन परीक्षा बन गई है, जिसका सामना देश को प्रधानमंत्री की व्यग्रता और आत्मसमर्पण के कारण करना पड़ रहा है.’कांग्रेस ने इस ट्रेड डील को लोगों से ‘विश्वासघात’ करने वाला बताया था लेकिन केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का दावा था कि ‘इस समझौते में कृषि और डेयरी सेक्टर को सुरक्षित रखा गया है.’कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार में वित्त मंत्री रहे पी चिदंबरम ने 20 फ़रवरी को एक्स पर एक पोस्ट में अपने 15 फ़रवरी के एक लेख का हवाला देते हुए लिखा, “मैंने लिखा था कि अगर राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ़ को सुप्रीम कोर्ट ख़ारिज़ करता है तो भारत और अमेरिका दो अप्रैल 2025 की पहले वाली स्थिति में पहुंच जाएंगे.”पी चिदंबरम ने इसी पोस्ट में पूछा कि ‘इस बीच अमेरिका ने भारत से कई रियायतें हासिल कर ली हैं, बिना अपनी ओर से कोई रियायत दिए. उन रियायतों का अब क्या होगा?’

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