नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी अब करेंगे छात्रों की बात,खड़ा करेंगे नई शिक्षा व्यवस्था

 नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी अब करेंगे छात्रों की बात,खड़ा करेंगे नई शिक्षा व्यवस्था
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NEET पेपर लीक विवाद में शनिवार को कई बड़े घटनाक्रम हुए, जिसकी शुरुआत देश भर में हफ्तों तक चले विरोध प्रदर्शनों के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से हुई. कुछ घंटों बाद, प्रह्लाद जोशी को नया शिक्षा मंत्री बनाया गया, जिन्हें नई और रिन्यूएबल एनर्जी और कंज्यूमर अफेयर्स, फूड और पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन के साथ अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गयी.इससे पहले केंद्र और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच तीसरे राउंड की बातचीत हुई, जिसके बाद सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने पर सहमत हो गई. बातचीत के बाद, CJP ने जंतर-मंतर पर अपने 36 दिन के आंदोलन को तुरंत वापस लेने की घोषणा की, और कहा कि सरकार द्वारा उनकी मुख्य मांगें मान लेने के बाद वे “अच्छी नीयत” से विरोध खत्म कर रहे हैं.वहीं, सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए विधेयक लाने का वादा किया. लोकसभा में सोमवार को केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह पेपर लीक रोकने को लेकर लाए जाने वाले अमेंडमेंट बिल को पेश करेंगे.ये घटनाक्रम NEET विवाद का सबसे बड़ा राजनीतिक नतीजा था, जिसकी वजह से देश भर में छात्रों के विरोध प्रदर्शन हुए, CBI जांच हुई और भारत के परीक्षा सिस्टम में बड़े सुधार हुए.धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के कुछ घंटों बाद, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर बीजेपी के वरिष्ठ नेता प्रह्लाद जोशी को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा.

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शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने पर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा, “मैं यह ज़िम्मेदारी कर्तव्य और विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूं. मैं प्रधानमंत्री का शुक्रगुजार हूं.”उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के पिछले 12 सालों में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल हुई हैं. पिछले चार-पांच सालों में धर्मेंद्र प्रधान ने नेशनल एजुकेशन पॉलिसी भी लागू की, और कई महत्वपूर्ण पहल की गईं. देश ने नए एजुकेशन सिस्टम में काफी तरक्की की है. प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में, मैं अपनी पूरी क्षमता से काम करूंगा और अपनी जिम्मेदारियों को लगन से पूरा करूंगा.तीसरे राउंड की बातचीत के बाद केंद्र और CJP के बीच समझौता हुआ. प्रधान के इस्तीफे के कुछ घंटों बाद, केंद्र और कॉकरोच जनता पार्टी के बीच तीसरे राउंड की बातचीत हुई, जिसके बाद CJP ने अपने 36 दिन के विरोध प्रदर्शन को तुरंत वापस लेने का ऐलान किया. केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ एक जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में, CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका और सौरव दास ने कहा कि सरकार द्वारा उनकी मुख्य मांगें मान लेने के बाद आंदोलन को अच्छी नीयत से वापस लिया जा रहा है.CJP ने कहा कि उसकी मुख्य मांग, प्रधान का इस्तीफा, पूरी हो गई है. इसने यह भी कहा कि केंद्र शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ FIR और कानूनी केस वापस लेने पर सहमत हो गया है और भरोसा दिलाया है कि कोई बदले की कार्रवाई नहीं की जाएगी.सरकार ने मौजूदा नियमों और कानूनों के अनुसार आत्महत्या करने वाले स्टूडेंट्स के परिवारों को मुआवजा देने पर भी सहमति जताई और एग्जामिनेशन सुधारों पर CJP के पांच-पॉइंट चार्टर पर विचार करने का वादा किया. जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार ने डेलीगेशन की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया है और एग्जामिनेशन सिस्टम को मजबूत करने के लिए लंबे समय के सुधारों पर आगे चर्चा करेगी.CJP का प्रोटेस्ट 20 जून को जंतर-मंतर पर शुरू हुआ था, जिसमें कथित NEET-UG पेपर लीक पर जवाबदेही तय करने, एग्जामिनेशन सिस्टम में बड़े सुधार और प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई थी.कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के साथ आंदोलन में शामिल होने के बाद इस आंदोलन ने देश भर में ध्यान खींचा. उनकी बिगड़ती सेहत और बाद में हॉस्पिटल में भर्ती होने से लोगों का ध्यान इस ओर गया और सरकार पर दबाव बढ़ा.हालांकि वांगचुक ने केंद्र से लिखित आश्वासन मिलने के बाद अपना 26 दिन का उपवास खत्म कर दिया, लेकिन CJP ने प्रधान के इस्तीफा देने और बाकी मांगों पर ध्यान दिए जाने तक अपना प्रोटेस्ट जारी रखा और शनिवार को केंद्र से समझौता होने के बाद 36 दिनों के बाद आंदोलन समाप्त कर दिया.विपक्ष ने प्रधान के इस्तीफे को छात्रों की बड़ी जीत बताया और एजुकेशन सिस्टम में बड़े सुधारों की मांग फिर से उठाईय लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस्तीफे को “भारत के भविष्य की जीत” बताया और कहा कि प्रधान भ्रष्टाचार, नाकाबिलियत और देश के एजुकेशन सिस्टम की गिरावट की निशानी बन गए हैंय उन्होंने कहा कि सरकार को अब सही सुधार लाने चाहिए और आरोप लगाया कि स्टूडेंट प्रोटेस्टर्स के खिलाफ पुलिस एक्शन का मुद्दा पार्लियामेंट के मॉनसून सेशन में भी अहम रहेगा.CJP के 36 दिन पुराने विरोध प्रदर्शन को खत्म करने के बाद, दिल्ली में मेट्रो का नॉर्मल एक्सेस फिर से शुरू हो गया. दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने उन सभी स्टेशनों के एंट्री गेट फिर से खोल दिए, जो सुरक्षा व्यवस्था के कारण बंद कर दिए गए थे. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और केंद्र के CJP के साथ आंदोलन खत्म करने के लिए समझौते पर पहुंचने के तुरंत बाद मेट्रो स्टेशन फिर से खुल गए.इससे पहले, दिन में, DMRC ने राजीव चौक, मंडी हाउस और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट स्टेशनों पर सर्विस फिर से शुरू कर दी थी, इससे पहले जंतर-मंतर के पास विरोध प्रदर्शन के कारण जिन 18 प्रभावित स्टेशनों पर रोक लगा दी गई थी, उन पर एंट्री और एग्जिट बहाल कर दिया गया था.केंद्र ने पब्लिक एग्जामिनेशन (गलत तरीकों से बचाव) एक्ट में बड़े बदलावों का प्रस्ताव दिया है ताकि पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के लिए तेजी से जांच, समय पर सुनवाई और सख्त सजा सुनिश्चित की जा सके. प्रस्तावित बिल में अपराधों की जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) बनाने, दो महीने के अंदर जांच पूरी करने, स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट में रोजाना सुनवाई और तीन महीने के अंदर हाई कोर्ट द्वारा अपीलों का निपटारा करने का प्रावधान है.इसमें सजा में भी काफी बढ़ोतरी की गई है, जिसमें संगठित पेपर लीक रैकेट के लिए 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है, साथ ही परीक्षा में धोखाधड़ी में शामिल सर्विस प्रोवाइडर और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. यह विधेयक सोमवार को मंत्री जितेंद्र सिंह लोकसभा में पेंश करेंगे.धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा NEET-UG पेपर लीक विवाद का सबसे बड़ा राजनीतिक नतीजा है, जो 3 मई की परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक के आरोपों के बाद शुरू हुआ था. इस विवाद के कारण परीक्षा रद्द कर दी गई, देश भर में CBI जांच हुई, बार-बार विरोध प्रदर्शन हुए, संसद में रुकावट आई, पेपर लीक विरोधी कानून में बदलाव हुए और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी का एक बड़ा पुनर्गठन हुआ.

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