जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर!कैसे पड़ा बादशाह का ये नाम?

 जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर!कैसे पड़ा बादशाह का ये नाम?
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.तीसरे मुगल शासक अकबर के नाम को लेकर आज भी कौतुक बना रहता है. कोई अकबर तो कोई बादशाह अकबर, कोई बदरुद्दीन तो कोई जलालउद्दीन जैसे नाम का उल्लेख अपने-अपने तरीके से करता है. विद्वान भी इसे लेकर एक मत कम ही दिखाई देते हैं. हां, अबुल फजल के अकबरनामा जैसी महत्वपूर्ण किताब में इन सभी नामों का उल्लेख मिलता है. यह और बात है कि लगभग 50 सालों तक सिंहासन पर बैठने वाले इस बादशाह का सबसे प्रचलित नाम अकबर ही रहा. आइए, बादशाह अकबर की पुण्यतिथि (27 अक्तूबर) के बहाने इस मुद्दे को समझते हैं कि बचपन का बदरुद्दीन बाद में कैसे जलालुद्दीन बन गया? या यूं भी कह सकते हैं कि अकबर का नाम आखिर बार-बार क्यों बदला?ऐतिहासिक दस्तावेज बताते हैं कि अकबर का बचपन का नाम असल में बदरुद्दीन ही था. साल 1546 ई. में जब अकबर लगभग चार वर्ष के हुए तब खतना हुआ. उसी समय पिता हुमायूं ने उनका नाम बदलकर जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर रखा.

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यह बदलाव किसी सत्ता-संघर्ष या बादशाह बनने के बाद की घटना नहीं था, बल्कि उनके बचपन में हुआ था. कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अकबर का एक नाम अबुल-फतह जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर कहा जाता था. उसे अकबर-ए-आजम भी कहा गया. शहंशाह अकबर और महाबली शहंशाह के नाम से भी अकबर को जाना गया. अकबर के शुरुआती नाम निश्चित पिता हुमायूं ने रखे लेकिन बाद के नाम बादशाह बनने और समय के साथ सम्मानपूर्वक जुडते गए.अकबर का जन्म साल 1542 में अमरकोट में हुआ था. तारीख थी 15 अक्तूबर. अकबर ने लगभग 50 साल तक भारत पर शासन किया. उनके पिता मुगल बादशाह हुमायूं और माता हमीदा बानो बेगम थीं. उस समय हुमायूं का शासन अस्थिर था और उन्हें अपने प्रतिद्वंद्वियों से संघर्ष करना पड़ रहा था. ऐसे कठिन दौर में अकबर का जन्म हुआ. आगे चलकर वे मुगल साम्राज्य के तीसरे शासक बने और 1556 से 1605 तक शासन किया. उनका पूरा शाही नाम जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर था.जलालुद्दीन का शाब्दिक अर्थ सामान्य तौर पर धर्म की महिमा या धर्म का गौरव बताया जाता है. मुहम्मद इस्लामी नामों में प्रचलित सम्मान-सूचक नाम है. अकबर अरबी मूल का शब्द है, जिसका अर्थ महान या सबसे बड़ा होता है. नाम के अर्थों से यह समझा जा सकता है कि यह एक राजकुमार के लिए रखा गया औपचारिक और सम्मान-पूर्ण नाम था.बदर का संबंध अरबी में पूर्णिमा के चांद से है. इस कारण बदरुद्दीन का अर्थ प्रायः धर्म का पूर्ण चांद बताया जाता है. कुछ विवरणों में कहा गया है कि अकबर का जन्म पूर्णिमा के दिन हुआ था, इसलिए उन्हें यह नाम दिया गया. हालांकि, इस कारण को हर ऐतिहासिक स्रोत समान रूप से प्रमाणित नहीं करते. इसे एक प्रचलित व्याख्या के रूप में देखना बेहतर है, न कि निर्विवाद तथ्य के रूप में. बच्चों को जन्म के समय या बचपन में अलग नाम देना उस दौर में असामान्य नहीं था.परिवार के भीतर इस्तेमाल होने वाला नाम और राजपरिवार में औपचारिक अवसर पर दिया गया नाम अलग हो सकता था. अकबर के मामले में भी यही बात सबसे महत्वपूर्ण लगती है. बदरुद्दीन उनका आरंभिक नाम था, जबकि जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर उनका औपचारिक नाम बाद में बना.प्रचलित वेबसाइट भारत-कोश अकबर के परिचय में लिखता है कि साल 1546 में अकबर के खतने के अवसर पर हुमायूँ ने उनका नाम जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर रखा. यह विवरण बताता है कि नाम बदलना अकबर के बादशाह बनने से करीब दस वर्ष पहले हुआ. उस समय अकबर एक छोटा बच्चा था और उसका राजनीतिक अधिकार या शासन में कोई स्वतंत्र भूमिका नहीं थी. इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि अकबर ने स्वयं बादशाह बनने के बाद अपना नाम बदला. उपलब्ध विवरण के अनुसार, यह निर्णय उनके पिता हुमायूं ने लिया था. नामकरण का अवसर परिवार और दरबार की परंपराओं से जुड़ा रहा होगा.कुछ दस्तावेजों में यह दावा किया जाता है कि हुमायूं ने अपने बेटे का नाम किसी खास राजनीतिक संदेश के लिए बदला था. उस समय शाही परिवारों में औपचारिक नाम, धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराएं और राजकीय पहचान आपस में जुड़ी रहती थीं. संभव है कि नया नाम राजकुमार की औपचारिक पहचान के लिए चुना गया हो. नाम के अर्थ को देखकर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर एक गरिमापूर्ण शाही नाम था. लेकिन नाम का अर्थ अपने आप में यह प्रमाण नहीं है कि नामकरण किसी अभियान, भविष्यवाणी या खास राजनीतिक योजना के तहत हुआ था.अकबर नाम उनके औपचारिक नाम का हिस्सा था. बाद में यही नाम उनकी सबसे पहचानी जाने वाली पहचान बन गया. इतिहास में वे अकबर, बादशाह अकबर और जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर के नाम से जाने गए. अकबर महान या अकबर-ए-आज़म जैसे संबोधन उनके शासन और ऐतिहासिक प्रतिष्ठा से जुड़े बाद के सम्मान-सूचक नाम हैं. अपने पिता की मृत्यु के बाद अकबर साल 1556 में तेरह वर्ष की आयु में गद्दी पर बैठे. इस घटना के बाद उनका पूरा शाही नाम दस्तावेजों और दरबारी इतिहास में अधिक महत्त्व पाने लगा. लेकिन नाम की शुरुआत इससे पहले, उनके बचपन में ही हो चुकी थी.अकबर का बचपन का नाम बदरुद्दीन बताया जाता है. जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर नाम बदलने का यह प्रसंग अकबर के बादशाह बनने से पहले का है. सबसे संतुलित उत्तर यह है कि अकबर के नाम का परिवर्तन उनके बचपन में पिता हुमायूँ के समय हुआ. आगे चलकर अकबर ही उनका सबसे प्रसिद्ध नाम बना और इतिहास में उनकी पहचान उसी से स्थायी हुई. अबुल फजल के अकबरनामा के हवाले से अनेक स्थानों पर नाम बदलने की कहानियों का उल्लेख मिलता है.

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