RLM का भाजपा में होगा विलय?बेटे को मंत्री बनवाने के लिए उपेंद्र कुशवाहा देंगे बड़ी कुर्बानी!
बिहार की सियासत बहुत तेजी से बदलते हुए दिखाई पड़ रही है. चर्चा चल रही है कि हो सकता है आने वाले समय में राष्ट्रीय लोक मोर्चा का विलय भारतीय जनता पार्टी में हो जाए.दरअसल, बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार होना है. सम्राट चौधरी अपनी टीम गठित करने की तैयारी में है. इन सबके बीच एनडीए के सहयोगी दल मंत्रिमंडल में जगह पाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं. उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र दीपक प्रकाश के राजनीतिक भविष्य को लेकर संशय की स्थिति है. सवाल उठता है कि क्या बीजेपी उपेंद्र कुशवाहा को राज्यसभा भेजने के बाद उनके पुत्र को भी अपने कोटे से सदन में भेजेगी।बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो चुकी है. संभावित मंत्रिमंडल विस्तार ने राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा दी है. एनडीए खेमें में बेचैनी साफ दिख रही है. उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के भारतीय जनता पार्टी में संभावित विलय को लेकर सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज है.दरअसल, उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र दीपक प्रकाश नीतीश कैबिनेट में मंत्री थे. दीपक प्रकाश ने जब मंत्री पद के लिए शपथ लिया था तब वह किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे. नवंबर महीने में दीपक प्रकाश मंत्री बने थे और मार्च महीने तक उनका कार्यकाल रहा. इस बीच वह किसी भी सदन के सदस्य नहीं रहे. अब जबकि एक बार फिर मंत्रिमंडल विस्तार हो रहा है, और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी दीपक प्रकाश को मंत्रिमंडल में जगह दिलाना चाहती है. ऐसे में दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजने की कवायद तेज हो गई है।संविधान के मुताबिक मंत्री बनने के लिए शर्तें तय की गई है. मंत्री बनने के लिए संवैधानिक प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164 में दिए गए हैं. इसके तहत राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर मंत्रियों की नियुक्ति करते हैं. मंत्री वही बन सकता है जो विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य हो. जिस व्यक्ति को मंत्री पद के लिए शपथ दिलाया जाता है अगर वह किसी सदन का सदस्य नहीं रहता है तो उसे 6 महीने के अंदर किसी भी सदन की सदस्यता लेनी होती है. राज्य में मंत्रियों की संख्या कुल विधायकों के 15% से अधिक नहीं हो सकती है.उपेंद्र कुशवाहा एनडीए का हिस्सा हैं और उन्हें बीजेपी ने अपने कोटे से राज्यसभा भेजा था. मार्च महीने में उपेंद्र कुशवाहा को भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा भेजा. उपेंद्र कुशवाहा पहली बार 2002 में राज्यसभा के सदस्य बने थे. इसके बाद वे 2018 में फिर राज्यसभा पहुंचे, जब वे राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के नेता के रूप में एन डी ए के साथ थे।बिहार में एनडीए के लिए कुशवाहा वोट गेम चेंजर है.

इसे देखते हुए पार्टी ने कुशवाहा जाति से आने वाले सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाया. बिहार में कुशवाहा वोट 6 से 7% के बीच है, जबकि जाति का जनगणना के मुताबिक बिहार में कुशवाहा आबादी 4.21% आंका गया है. एनडीए के लिए यह सबसे बड़ा वोट शेयर है.इसी वोट बैंक को देखते हुए बीजेपी कुशवाहा वोट को साधने के लिये कुशवाहा नेताओं को तवज्जो देती है. उपेंद्र कुशवाहा उसी की एक कड़ी हैं. राजनीतिक रूप से उपेंद्र कुशवाहा मजबूत बारगेनर माने जाते हैं और खुद के लिए राज्यसभा टिकट हासिल करने के बाद वह बेटे को विधान परिषद भेजने की जुगत में जुट गए हैं.बीजेपी सूत्रों के मिल रही मुताबिक, आरएलएम के बीजेपी में विलय के बदले कुछ शर्तों पर बातचीत चल रही है. उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजने और पार्टी के कोटे से मंत्री पद को बरकरार कैसे रहे और इसके लिए कौन सा राजनीतिक समझौता तैयार किया जाए. बीजेपी की ओर से उपेंद्र कुशवाहा को विलय का प्रस्ताव दिया गया है. अगर उपेंद्र कुशवाहा विलय को तैयार हो जाते हैं तो वैसे स्थिति में उनके पुत्र दीपक प्रकाश के लिए विधान परिषद सदस्यता और मंत्रिमंडल की राहें आसान हो जाएगी.दीपक प्रकाश के एडजस्टमेंट में पेंच भी है. बीजेपी ने अब कुशवाहा जाति के नेता को मुख्यमंत्री के पद पर बिठा दिया है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या बीजेपी के लिए उपेंद्र कुशवाहा और दीपक प्रकाश उतने महत्वपूर्ण हैं जितने की पहले थे. बीजेपी और आरएलएम के बीच समझोते से ही कुशवाहा सियासत को धार दिया जा सकता है.दरअसल, मंगल पांडे के विधायक चुने जाने के बाद एक सीट खाली हुई थी और उसका नोटिफिकेशन भी हो चुका है. 30 अप्रैल को नामांकन की अंतिम तिथि है और उससे पहले बीजेपी को तय कर लेना है कि मंगल पांडे की सीट पर किस नेता को विधान परिषद भेजा जाएगा. आरएलएम को उम्मीद है कि बीजेपी दीपक प्रकाश के लिए सीट छोड़ सकती है।
