जेलेंस्की से नाराज हुए ट्रंप,रूस और यूक्रेन जंग को लेकर दे दी चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग में ‘एनर्जी सीजफायर’का ऐलान किया है. ट्रंप का यह ऐलान उनके उस बयान के एक दिन बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि यूक्रेन को अब नया राष्ट्रपति चुनने का वक्त आ गया है. उनका आरोप था कि वर्तमान राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की ओर से रूस के साथ जंग को खत्म करने के लिए पर्याप्त कोशिश नहीं की गई.राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया ट्रूथ पर अपने पोस्ट में कहा, “अभी से रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में ‘एनर्जी सीजफायर’ लागू हो गया है. दोनों पक्ष इस पर सीजफायर पर राजी हो गए हैं. अब इसे टूटना नहीं चाहिए! इस मामले पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद.” इससे पहले रविवार यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की उन्हें बदलने की मांग को खारिज कर दिया, हालांकि उन्होंने कहा कि अगर रूस 60 दिन के युद्धविराम के लिए सहमत हो जाता है तो उनका देश चुनाव करा सकता है।

शनिवार को, ट्रंप ने रूसी तेल रिफाइनरियों पर यूक्रेनी हमलों को लेकर जेलेंस्की की आलोचना की. उन्होंने तर्क दिया कि इन हमलों के कारण डीजल की कीमतें बढ़ गई हैं और सुझाव दिया कि यूक्रेनी लोगों को जेलेंस्की की जगह युद्ध खत्म करने में सक्षम नेता को लाना चाहिए.रविवार को ABC न्यूज के साथ एक टीवी इंटरव्यू में, जेलेंस्की ने कहा, “सबसे पहले, राष्ट्रपति ट्रंप के प्रति पूरे सम्मान के साथ, मैं यह कहना चाहता हूं कि नेता चुनना हमारे समाज और हमारे लोगों का अधिकार है.” फिर जेलेंस्की ने एक शर्त रखी. जेलेंस्की ने कहा कि उन्होंने ट्रंप की टीम से कहा था कि अगर वे चाहते हैं कि यूक्रेन चुनाव कराए, तो “पुतिन से कहें कि वे हमें दो महीने या 60 दिन, के लिए पूरी तरह से युद्धविराम दें, और हम चुनाव कराएंगे.इसके अलावा, जेलेंस्की ने आज X पर कहा, “अगर रूस हमारे ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले बंद कर देता है, तो यूक्रेन भी रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने को तैयार होगा. तनाव कम करने के किसी भी कदम के लिए दोनों पक्षों की ओर से पहल की आवश्यकता होती है और उसे ठोस गारंटी का समर्थन प्राप्त होना चाहिए।वहीं दूसरी तरफ सऊदी अरब पर यमन के हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों के बीच सऊदी अरब और ईरान के विदेश मंत्रियों ने फोन पर बातचीत की है. रविवार को सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से बात की. दोनों ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और उसे कम करने के तरीकों पर चर्चा की.सऊदी प्रेस एजेंसी के मुताबिक, हाल में हूतियों के हमले बढ़ने के बाद दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की यह पहली सार्वजनिक रूप से सामने आई बातचीत है. ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने टेलीग्राम पर बताया कि उनका देश सऊदी अरब और यमन के बीच बातचीत कराने के लिए हर संभव मदद देने को तैयार है.सऊदी विदेश मंत्री ने बहरीन और ब्रिटेन के विदेश मंत्रियों से भी बातचीत की. दोनों देशों ने रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हूतियों के हमलों की निंदा की. बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुल्लतीफ अल-जायानी ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई. उन्होंने सऊदी अरब की सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा में पूरा साथ देने का भरोसा दिया।ब्रिटेन के विदेश मंत्री एड मिलिबैंड ने आम लोगों और नागरिक ठिकानों पर हमलों की निंदा की. उन्होंने सऊदी अरब और यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन किया. दोनों देशों ने क्षेत्र में तनाव और उससे होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करने पर भी चर्चा की.सऊदी विदेश मंत्री ने रविवार को जॉर्डन के विदेश मंत्री अयमान सफादी और यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कलास से भी बातचीत की. सफादी ने घायल जॉर्डन के नागरिकों का इलाज कराने के लिए सऊदी सरकार की तारीफ की. कलास ने हमले को आतंकवादी कार्रवाई बताया. उन्होंने कहा कि आम नागरिकों पर हमले किसी भी हालत में सही नहीं हैं. उन्होंने समुद्री रास्तों की सुरक्षा के लिए देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
