बिहार में चालान चार गुना के करीब,क्या बिजली बिल में जुड़ सकता है बकाया?
देश में हर साल करोड़ों ई-चालान कट रहे हैं, लेकिन जुर्माना वसूलने की रफ्तार उस हिसाब से नहीं बढ़ रही. इसी पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया है कि चालान को बिजली के बिल में जोड़ देना चाहिए. अगर बिल नहीं भरा जाएगा तो घर की लाइट कट सकती है. हालांकि, यह अभी सिर्फ सुझाव है, इसे कोर्ट का ऑर्डर नहीं माना जाना चाहिए. इस सुझाव के बाद बिजली के बकाया बिल को लेकर फिर चर्चा तेज हो गई है.संसद में सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 2024 में अकेले उत्तर प्रदेश में 2,386 करोड़ रुपये और बिहार में 331 करोड़ रुपये के चालान बकाया थे. सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने 11 दिसंबर 2025 को लोकसभा में सांसद डॉ. गुम्मा तनुजा रानी के सवाल पर राज्यवार आंकड़े रखे. इसके मुताबिक, 2024 में देशभर में 8.19 करोड़ ई-चालान जारी हुए. इनसे 3,835 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया, जबकि 9,098 करोड़ रुपये बकाया रहे. बकाया हर साल बढ़ा है. 2022 में यह 3,668 करोड़ रुपये था, 2023 में 6,654 करोड़ और 2024 में 9,098 करोड़ रुपये हो गया. यानी दो साल में ढाई गुना से ज्यादा.सुप्रीम कोर्ट में सोमवार 28 सितंबर 2026 को जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने ई-चालान की वसूली से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि सिर्फ चालान काटते रहना काफी नहीं है, असली सवाल जुर्माने की वसूली का है.

कोर्ट ने कहा कि बकाया चालान बिजली बिल में जोड़ा जाए, ताकि न भरने पर बिजली कटने का डर हो.सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रजिस्ट्रेशन रिन्यू कराने और मालिकाना हक बदलने पर रोक, वाहनों को ब्लैकलिस्ट करना, फिटनेस और पीयूसी रोकना, ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यू कराने पर रोक, लाइसेंस सस्पेंड करना और बेतरतीब चेकिंग में चालान बकाया वाले वाहन जब्त करने जैसे सुझावों पर भी चर्चा की. ये सुझाव हैं, ऑर्डर नहीं.2024 में यूपी में 1.54 करोड़ ई-चालान कटे, जो देश के कुल चालान का करीब 19% है. राज्य में 541 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया, जबकि 2,386 करोड़ रुपये बकाया रहे. यह देश के कुल बकाये का करीब 26% है और बकाया वसूली का करीब 4.4 गुना है.2022 में यूपी में 92.8 लाख चालान कटे थे और बकाया 1,321 करोड़ रुपये था. 2023 में बकाया 2,078 करोड़ रुपये हुआ और 2024 में 2,386 करोड़ रुपये. चालान करीब 1.7 गुना और बकाया करीब 1.8 गुना हुआ है.बिहार में 2024 में 26.7 लाख ई-चालान कटे, जबकि 2023 में 12.6 लाख और 2022 में 7.2 लाख. यानी दो साल में चालान करीब 3.7 गुना हुए. जुर्माना वसूली इस दौरान 2022 में 284 करोड़ रुपये से 2023 में बढ़कर 334 करोड़ रुपये हो गई, जबकि 2024 में 310 करोड़ रुपये रही. मलतब चालान बढ़े हैं, लेकिन वसूली नहीं बढ़ी.वहीं, बकाया 2022 के 43 करोड़ रुपये से बढ़कर 2023 में 133 करोड़ और 2024 में 331 करोड़ रुपये हो गया, यानी करीब 7.7 गुना. बकाये के मामले में बिहार देश में सातवें नंबर पर है, जबकि वसूली में छठे नंबर पर. बड़े राज्यों में बिहार में बकाया और वसूली का रेशियो सबसे कम करीब 1.07 गुना है, यानी वसूली अपेक्षाकृत बेहतर रही है.दिल्ली में हर साल करीब 77-78 लाख चालान कट रहे हैं. संख्या लगभग स्थिर है, लेकिन बकाया 2022 के 1,133 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024 में 2,247 करोड़ रुपये हो गया, यानी लगभग दोगुना. वसूली सिर्फ 192 करोड़ रुपये रही. यूपी और दिल्ली मिलकर देश के कुल बकाये का करीब 51% रखते हैं.तमिलनाडु में बकाया 1,011 करोड़ रुपये है, केरल में 472 करोड़, ओडिशा में 379 करोड़ और महाराष्ट्र में 353 करोड़ रुपये. महाराष्ट्र में वसूली 398 करोड़ रुपये रही, जो बकाये से ज्यादा है. मध्य प्रदेश में 25.5 लाख चालान कटे, फिर भी बकाया सिर्फ 47 करोड़ रुपये है.मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 136A में सड़कों पर इलेक्ट्रॉनिक निगरानी का प्रावधान है. सरकार ने अगस्त 2021 में इसके तहत नियम 167A बनाया. नियम 167(5) के मुताबिक चालान का निपटारा 90 दिन में होना चाहिए. नियम 167(7) के मुताबिक इसके बाद चालान बकाया रहने पर लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन से जुड़े आवेदन प्रोसेस नहीं होंगे. परमिट, फिटनेस और टैक्स इसके अपवाद हैं. यानी कागज पर सख्ती है, फिर भी बकाया बढ़ता जा रहा है.
