बिहार में ‘जंगलराज’ लौट आया?चिराग और बीजेपी सांसद के बयान से गरमाई सियासत
बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज है. 2025 में हुई कई आपराधिक घटनाओं के बाद एनडीए के अंदर से भी पुलिस और प्रशासन पर सवाल उठे. केंद्रीय मंत्री और एलजेपी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने जुलाई 2025 में कहा कि बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह खराब हो गई है और अपराधियों के सामने पुलिस-प्रशासन के झुकने जैसी स्थिति दिख रही है. उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी सरकार को समर्थन देने पर उन्हें दुख है.वहीं बीजेपी सांसद शंभू शरण पटेल ने भी पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि अपराधियों में कानून का डर खत्म हो गया है और कई बार पुलिस अधिकारी फोन तक नहीं उठाते. ये नेताओं के राजनीतिक बयान हैं, इसलिए इन्हें उनके दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए. लेकिन इन बयानों के साथ अगर 2004 और 2025 के अपराध आंकड़ों को सामने रखकर देखा जाए तो तस्वीर कुछ अलग और ज्यादा जटिल नजर आती है.2004 में बिहार में 3,861 हत्या, 1,297 डकैती, 9,199 दंगे और 1,063 रेप के मामले दर्ज हुए थे. वहीं 2025 में हत्या के मामले 2,556, डकैती 174 और दंगे 2,502 रह गए.

यानी कई गंभीर अपराधों में दो दशक के दौरान बड़ी गिरावट हुई है. हालांकि हर अपराध की कहानी एक जैसी नहीं है.2004 के हाल की बात करें, तो औसतन करीब हर दो घंटे में एक हत्या, हर दिन करीब 8 अपहरण और 3 रेप के मामले सामने आए. 2004 में कुल 1,15,216 संज्ञेय अपराध दर्ज हुए थे. उस समय बिहार में पुलिस-जनसंख्या अनुपात भी बेहद कम था, हर 1,000 लोगों पर सिर्फ 0.65 पुलिसकर्मी. हालांकि रिपोर्ट ने यह भी माना था कि कई अपराध दर्ज ही नहीं हो पाते थे.रेप के मामले 2025 में 2,025 रहे, जो 2004 के 1,063 मामलों से ज्यादा हैं. अपहरण और चोरी जैसे अपराधों में भी लंबे समय में बढ़ोतरी देखने को मिली है. बिहार में 2025 के दौरान कई बड़े अपराधों में कमी दर्ज हुई. DGP विनय कुमार के मुताबिक, हत्या के मामले 8.3%, डकैती 26.9%, लूट 21.1%, दंगे 21.5% और रेप के मामले 8.2% घटे. बैंक डकैती में सबसे बड़ी 80% की गिरावट दर्ज की गई.पुलिस ने 2025 में कुल 3,61,364 आरोपियों को गिरफ्तार किया और 4,963 अवैध हथियार बरामद किए. साथ ही 74 अवैध मिनी गन फैक्ट्रियों का खुलासा किया गया. हालांकि, साइबर अपराध नई चुनौती बना हुआ है, 2025 में 6,319 साइबर क्राइम केस दर्ज हुए.यानी 2004 की तुलना में 2025 में हत्या के मामले करीब 34% कम रहे. 2025 का आंकड़ा 2024 के 2,786 मामलों से भी 8.3% कम था. बिहार DGP विनय कुमार ने इसे पुलिस की त्वरित कार्रवाई और बेहतर निगरानी से जोड़ा है.यहां आंकड़े दूसरी तस्वीर दिखाते हैं. 2025 में मामले 2004 के मुकाबले ज्यादा रहे. हालांकि 2024 में 2,205 मामलों की तुलना में 2025 में 8.2% की कमी दर्ज हुई. यानी हाल के एक साल में कमी आई, लेकिन 2004 के मुकाबले संख्या अभी भी काफी ज्यादा है.यह सबसे बड़ी गिरावट वाली श्रेणियों में से एक है. करीब दो दशक में डकैती के मामले 80% से ज्यादा घटे हैं. 2025 में भी 2024 के 238 मामलों की तुलना में 26.9% कमी आई.यानी 2004 के मुकाबले 2025 में लूट के मामले करीब 46% कम रहे. हालांकि बीच के वर्षों में इस अपराध में उतार-चढ़ाव भी देखा गया. 2025 में 2024 के मुकाबले लूट में 21.1% की कमी बताई गई है.इसमें करीब 73% की गिरावट दिखाई देती है. 2025 का आंकड़ा 2024 के 3,186 मामलों से भी 21.5% कम था. DGP ने बेहतर खुफिया तंत्र को सामुदायिक तनाव से जुड़े मामलों में कमी की एक वजह बताया.हालांकि लंबे समय के आंकड़ों में अपहरण बढ़ने की बात सामने आई है. 2024 में बिहार में 7,305 अपहरण के मामले दर्ज हुए थे, जिनमें 52 मामले फिरौती के लिए अपहरण के थे. विशेषज्ञों के मुताबिक इस श्रेणी में प्रेम विवाह, गुमशुदगी और दूसरे मामलों की FIR भी शामिल हो सकती है. इसलिए कुल अपहरण और फिरौती के लिए अपहरण को अलग-अलग देखना जरूरी है.हालांकि 2001 से 2025 के अपराध डेटा के विश्लेषण में चोरी और सेंधमारी को उन अपराधों में बताया गया है, जिनमें हाल के वर्षों में बढ़ोतरी हुई है. यानी हत्या और डकैती की तरह चोरी की तस्वीर में गिरावट नहीं दिखती.बिहार के DGP विनय कुमार के मुताबिक 2025 में पुलिस ने 3,61,364 आरोपियों को गिरफ्तार किया. इस दौरान 4,963 अवैध हथियार और 30,133 कारतूस बरामद किए गए और 74 मिनी गन फैक्ट्रियों का खुलासा किया गया. साइबर अपराध भी पुलिस के लिए नई बड़ी चुनौती बनकर सामने आया. 2025 में साइबर थानों में 6,319 मामले दर्ज हुए और 1,050 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई. 1930 हेल्पलाइन पर 27.96 लाख साइबर से जुड़ी शिकायतें मिलीं.
