बीजेपी के विरोध में ऐसे काम करेगी इंडिया गठबंधन!कल के बैठक के बाद अब विपक्ष में दिखी एकजुटता
नई दिल्ली में सोमवार को इंडिया गठबंधन की बैठक में विपक्षी दलों के नेताओं ने गठबंधन की एकता पर ज़ोर दिया और कहा कि ये गठबंधन देश में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और लोगों के रोज़गार से जुड़े मुद्दे जोर-शोर से उठाएगा.इंडिया गठबंधन के नेताओं ने विपक्षी दलों की एकता मज़बूत करने और भाजपा का मुकाबला करने के लिए नई रणनीति तैयार करने पर भी ज़ोर दिया.बीजेपी ने इंडिया गठबंधन पर तंज़ कसते हुए कहा कि वोट चोरी नहीं हुआ बल्कि ‘विपक्षी दलों का वजूद चोरी हुआ’ है.इंडिया गठबंधन की बैठक ऐसे समय में हुई है जब इसके कुछ घटक दलों के बीच गंभीर मतभेद खुलकर सामने आए हैं. बैठक में विपक्षी दल आम आदमी पार्टी और डीएमके शामिल नहीं हुए.इसके साथ ही एक प्रमुख पार्टी तृणमूल कांग्रेस जो बड़े राजनीतिक संकट से जूझ रही है, इस बैठक में शामिल हुई।समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि इंडिया गठबंधन की नज़र 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों पर है।उन्होंने कहा, “बंधु राज (भाईचारे का राज) स्थापित होना चाहिए और यही हमारी कोशिश रहेगी. उत्तर प्रदेश में आप देख रहे हैं कि क्या हो रहा है. अब महिलाएं भी उनसे नाराज़ हैं. इसलिए लोकतंत्र के मूल्यों की रक्षा करना ज़रूरी है.अखिलेश यादव ने कहा कि विपक्षी दलों को सामाजिक सद्भाव, भाईचारे और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए एकजुट होकर काम करना चाहिए.उन्होंने कहा, ”उत्तर प्रदेश में जनता के बीच बढ़ती असंतोष की भावना को देखते हुए इंडिया गठबंधन 2027 के चुनावों के लिए अपनी रणनीति तैयार कर रहा है.बैठक में हिस्सा लेकर बाहर निकले राष्ट्रीय जनता दल नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि चीफ़ जस्टिस को ‘चुनाव में हो रही गड़बड़ी’ को लेकर चिट्ठी लिखी जाएगी.उन्होंने कहा कि चुनाव ईवीएम पर हो रहे हैं और बैलट पेपर से चुनाव होंगे तो बीजेपी कहीं नहीं टिकेगी।गठबंधन की बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में बताया कि विपक्षी दलों की बैठक में क्या-क्या फै़सले किए गए.खड़गे ने कहा कि सभी दलों ने मिलकर पांच मुद्दों पर सहमति जताई है।उन्होंने कहा,एसआईआर, वोटर लिस्ट में हेरफेर और चुनाव की निष्पक्षता पर उठे गंभीर प्रश्नों पर भारत के मुख्य न्यायाधीश को जल्द ही एक चिट्ठी भेजी जाएगी.इसके साथ ही शिक्षा मंत्री से तुरंत इस्तीफ़े की मांग की जाएगी क्योंकि नीट और सीबीएसई की परीक्षा देने वाले लाखों युवाओं के साथ विश्वासघात हुआ है. उन्हें सड़कों पर उतरना पड़ा है.खड़गे ने कहा,इंडिया गठबंधन देश की ख़राब होती आर्थिक स्थिति, बढ़ती बेरोज़गारी, महंगाई और किसानों के मुद्दों पर केंद्र से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग करेगा. साथ ही जनसरोकारों और दूसरे अहम मुद्दे उठाता रहेगा.खड़गे ने बताया कि इंडिया गठबंधन हर दूसरे महीने अपनी बैठक करेगा. साथ ही मानसून सत्र में सदन में समन्वय बनाए रखेगा.

हर सुबह लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ सभी विपक्षी दलों की बैठक होगी.बैठक में कांग्रेस की सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी यादव, नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्लाह पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की महबूबा मुफ़्ती और वामपंथी दलों के नेता शामिल हुए.इसके अलावा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सुप्रिया सुले, सीपीएम के जॉन ब्रिटास, सीपीआई के डी. राजा और कुछ अन्य छोटे दलों के नेताओं ने भी बैठक में हिस्सा लिया.शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे बैठक में वर्चुअल मीडियम से इसमें शामिल हुए.डीएमके और आम आदमी पार्टी ने बैठक में हिस्सा नहीं लिया. हालांकि आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बैठक के लिए आईं तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी से मुलाक़ात की थी.डीएमके के प्रवक्ता टीकेएस एलनगोवन ने कहा, “हमने पहले ही कहा था कि कांग्रेस अब हमारे साथ नहीं है. वह अब टीवीके के साथ है. कांग्रेस ने यह भी कहा है कि भविष्य में वह स्थानीय निकाय चुनाव और लोकसभा चुनाव भी टीवीके के साथ गठबंधन में लड़ेगी. इसका मतलब है कि वह अब हमारे गठबंधन का हिस्सा नहीं है. फिर हम उनके साथ क्यों रहें?एलनगोवन ने कहा, ”तमिलनाडु की राजनीति में कांग्रेस और टीवीके के बीच बढ़ती नज़दीकियों को देखते हुए डीएमके ने इंडिया गठबंधन की इस बैठक से दूरी बनाई है.उनका कहना था कि जब कांग्रेस राज्य में किसी दूसरे राजनीतिक गठबंधन के साथ आगे बढ़ रही है, तो डीएमके के लिए उस प्लेटफ़ॉर्म पर बने रहने का कोई मतलब नहीं है।हालांकि सीपीएम ने इंडिया गठबंधन की बैठक में हिस्सा लिया.लेकिन केरल चुनाव के बाद से ही इंडिया गठबंधन में शामिल प्रमुख पार्टी कांग्रेस और सीपीएम के बीच दरार दिखने लगी थी।सीपीएम के जनरल सेक्रेट्री एमए बेबी ने पत्रकारों से कहा, ”इंडिया गठबंधन में शामिल हर दल को अधिक गंभीरता और साफ़ मक़सद के साथ काम करना चाहिए. दुर्भाग्य से, केरल चुनावों के दौरान कांग्रेस नेतृत्व का रवैया कुछ अलग था. उस समय यह बेबुनियाद आरोप लगाया गया था कि सीपीआई(एम) और एलडीएफ़ का भाजपा के साथ कोई समझौता है. जब गठबंधन की प्रमुख पार्टी अपने ही एक प्रमुख सहयोगी पर ऐसे आरोप लगाए, तो यह ठीक नहीं है. चुनाव के दौरान भी इस तरह के ग़ैर-ज़िम्मेदाराना आरोप नहीं लगाए जाने चाहिए।
