कई देशों के लिए खतरा बना अमेरिका,अंतरिक्ष में कर दिया बड़ा कारनामा
अंतरिक्ष में बढ़ती सैन्य होड़ के बीच अमेरिका ने एक बड़ा खुलासा किया है. अमेरिका ने पहली बार सार्वजनिक तौर पर माना है कि उसने पृथ्वी की कक्षा में अंतरिक्ष हथियार तैनात किए हैं. अमेरिकी एयरफोर्स सेक्रेटरी ट्रॉय मैनिक ने कहा कि ये ‘ऑन-ऑर्बिट स्पेस कंट्रोल वेपन्स’ अमेरिकी सेनाओं को दुश्मन के संभावित हमले से बचाने के लिए जरूरी हैं. हालांकि, अमेरिका ने यह नहीं बताया कि ये हथियार किस तरह काम करते हैं, कितने हथियार तैनात किए गए हैं और इन्हें कब कक्षा में भेजा गया.ट्रॉय मैनिक का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका लगातार रूस और चीन की बढ़ती अंतरिक्ष सैन्य क्षमताओं को लेकर चिंता जताता रहा है. अमेरिका का कहना है कि रूस और चीन तेजी से अपनी अंतरिक्ष सैन्य क्षमताएं बढ़ा रहे हैं. चीन अपनी सेना को आधुनिक बनाने के लिए ऐसी तकनीक विकसित कर रहा है, जिससे अंतरिक्ष में मौजूद सिस्टम और दूसरे देशों के सैटेलाइट को प्रभावित किया जा सके. वहीं, रूस अंतरिक्ष को भविष्य के युद्ध का अहम हिस्सा मानता है.अमेरिका के मुताबिक, आने वाले समय में अंतरिक्ष में बढ़त किसी भी युद्ध में बड़ा फायदा दे सकती है.

अमेरिका 2007 से ही रूस और चीन के अंतरिक्ष हथियारों के परीक्षण और इस्तेमाल को लेकर चेतावनी देता रहा है. इन देशों की गतिविधियों के चलते अमेरिका का मानना है कि अब अंतरिक्ष भी युद्ध का एक मैदान बन चुका है. ऐसे में अमेरिका अपनी अंतरिक्ष सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दे रहा है.एयर, स्पेस एंड साइबर कॉन्फ्रेंस में ट्रॉय मैनिक ने कहा कि अमेरिका बदलते खतरों से निपटने के लिए तैयार है. अमेरिकी स्पेस फोर्स के प्रवक्ता के मुताबिक, अंतरिक्ष में मौजूद इन क्षमताओं का इस्तेमाल जरूरत पड़ने पर रक्षात्मक और आक्रामक, दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है. अमेरिका के लिए यह इसलिए अहम है क्योंकि आधुनिक युद्ध में सैटेलाइट की भूमिका काफी बढ़ गई है. सैनिकों के GPS, संचार, निगरानी, खुफिया जानकारी और टारगेटिंग जैसी कई जरूरी सेवाएं सैटेलाइट पर निर्भर हैं.ऐसे में अगर किसी देश के सैटेलाइट को नुकसान पहुंचता है, तो उसका असर सिर्फ सैन्य व्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संचार सेवाओं और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है. अमेरिकी स्पेस फोर्स के अनुसार, स्पेस कंट्रोल में वे सभी अभियान शामिल हैं, जिनके जरिए अंतरिक्ष में चुनौती देने और नियंत्रण बनाए रखने की क्षमता हासिल की जाती है. इसमें दुश्मन की क्षमताओं को प्रभावित, बाधित, कमजोर या जरूरत पड़ने पर नष्ट करने के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है.अमेरिका ने अभी यह साफ नहीं किया है कि कक्षा में तैनात किए गए हथियार वास्तव में किस तरह के हैं. अंतरिक्ष में इस्तेमाल होने वाली सैन्य तकनीक में साइबर सिस्टम, लेजर और ऐसे सैटेलाइट शामिल हो सकते हैं, जो दूसरे सैटेलाइट को प्रभावित या नुकसान पहुंचाने में सक्षम हों. अंतरिक्ष अब सिर्फ वैज्ञानिक खोज और सैटेलाइट भेजने की जगह नहीं रह गया है. अमेरिका, रूस और चीन के बीच यहां भी सैन्य ताकत बढ़ाने की होड़ तेज होती दिख रही है.अमेरिकी स्पेस फोर्स की स्थापना 2019 में हुई थी. इसका मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष में मौजूद अमेरिकी संपत्तियों की सुरक्षा करना है. इनमें संचार, निगरानी और दूसरी सैन्य जरूरतों के लिए इस्तेमाल होने वाले सैकड़ों सैटेलाइट शामिल हैं.अमेरिका का कहना है कि रूस और चीन की बढ़ती क्षमताओं को देखते हुए उसकी अंतरिक्ष संपत्तियों की सुरक्षा और जवाबी क्षमता मजबूत करना जरूरी है. इसी रणनीति के तहत अमेरिका अंतरिक्ष में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है.अंतरिक्ष में सैन्य गतिविधियां बढ़ने का एक बड़ा खतरा स्पेस डेब्रिस यानी अंतरिक्ष में घूमने वाले मलबे का है. अगर किसी सैटेलाइट को नष्ट किया जाता है, तो उसके टुकड़े तेज रफ्तार से कक्षा में फैल सकते हैं. इससे दूसरे सैटेलाइटों के टकराने का खतरा बढ़ जाता है और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए भी मुश्किलें पैदा हो सकती हैं.अमेरिका का अंतरिक्ष में हथियार तैनात करने की बात सार्वजनिक रूप से स्वीकार करना इसलिए अहम है, क्योंकि इससे अमेरिका, रूस और चीन के बीच चल रही अंतरिक्ष की सैन्य प्रतिस्पर्धा अब पहले से ज्यादा खुलकर सामने आ गई है.
