कहीं बाजी न मार दें राजद प्रत्याशी,बांकीपुर सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला से डरी भाजपा
2025 का बिहार विधानसभा चुनाव जन सुराज पार्टी और प्रशांत किशोर के लिए सुखद नहीं रहा था. अकेले दम पर चुनाव लड़ने का दावा करने वाले पीके खाता तक नहीं खोल पाए. 2026 में प्रशांत किशोर ने एक और ‘जुआ’ खेला है. विपक्ष की आवाज बनने की चाहत रखने वाले प्रशांत ने बांकीपुर विधानसभा सीट पर दावेदारी ठोंक रखी है. हालाकि विपक्षी दलों का साथ उन्हें नहीं मिला है. ऐसे में सवाल है कि कहीं वह अपनी ही बनाई जाल में तो नहीं फंस जाएंगे?चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर के लिए 2026 का बांकीपुर उपचुनाव केवल एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि जन सुराज की राजनीतिक विश्वसनीयता की अग्निपरीक्षा भी है. 2025 चुनाव में अधिकांश उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई और पार्टी खाता भी नहीं खोल पाई. उस वक्त कहा गया था कि अगर पीके खुद लड़ते तो संदेश अलग जाता. ऐसे में इस बार उन्होंने दांव खेलने का फैसला लिया है.प्रशांत किशोर भले ही बांकीपुर में जीत का दावा कर रहे हैं लेकिन आंकड़े बताते हैं कि उनके लिए राह आसान नहीं है. पिछले साल हुए बिहार विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी तीसरे नंबर पर रही थी. जन सुराज कैंडिडेट वंदना कुमारी की जमानत भी नहीं बची थी.2025 चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी नितिन नबीन ने 52 हजार वोटों से जीत दर्ज की थी, उनको 98,299 वोट मिले थे.

वहीं दूसरे पर आरजेडी की रेखा गुप्ता थीं, जिनको 46,363 मत प्राप्त हुए. जन सुराज की वंदना कुमारी को महज 7,717 वोट मिले, जोकि कुल मत प्रतिशत का सिर्फ 4.92% था.ये स्थिति सिर्फ बांकीपुर की ही नहीं था, बल्कि पूरे बिहार में जन सुराज का ऐसा ही हाल रहा था. 2025 विधानसभा चुनाव में जन सुराज पार्टी की ओर से 238 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए गए थे, जिनमें 236 सीटों पर उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई. पार्टी को कुल 15 लाख वोट मिले, जोकि कुल मत का 4.44% था.हालांकि चुनावी आंकड़ों का दूसरा पक्ष यह भी है कि करीब 35 सीटों पर जन सुराज के उम्मीदवारों को मिले वोट, जीत-हार के अंतर से अधिक थे. यानी पार्टी कई मुकाबलों में ‘वोट कटवा’ नहीं, बल्कि निर्णायक फैक्टर साबित हुई.प्रशांत किशोर को राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस और वाम दलों से समर्थन की उम्मीद थी लेकिन आरजेडी ने अपने उम्मीदवार भी घोषित कर दिए. वैश्य समाज से आने वाली रेखा गुप्ता को फिर से मैदान में उतार गया है. पिछले विधानसभा चुनाव में वह दूसरे स्थान पर रहीं थीं.प्रशांत किशोर के लिए सुकून देने वाली बात यह है कि बिहारी बाबू अर्थात शत्रुघ्न सिन्हा ने उन्हें समर्थन देने का ऐलान किया है. शत्रुघ्न सिन्हा उसी कायस्थ जाति से आते हैं, जिनका बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में बहुलता है. वह पटना साहिब से बीजेपी के सांसद भी रह चुके हैं. वहीं 2020 में उनके बेटे लव सिन्हा कांग्रेस के टिकट पर चुनाव भी लड़ चुके हैं. हालांकि शत्रुघ्न की अपील का कितना असर होगा, ये देखना होगा. बांकीपुर में कायस्थ वोटर ही निर्णायक माने जाते हैं. वहां कायस्थ वोटरों की संख्या 60–70 हजार है. इसके अलावे वैश्य वोटरों की संख्या 40-45 हजार, ब्राह्मणों की संख्या 32–40 हजार, भूमिहार 28–35 हजार, यादव वोटरों की संख्या 32–40 हजार, मुस्लिम वोटरों की संख्या 28–35 हजार, दलित वोटरों की संख्या 32–40 हजार और ईबीसी मतदाताओं की संख्या 60–70 हजार के आसपास है. बीजेपी ने कायस्थ समाज से आने वाले अभिषेक कुमार को बांकीपुर उपचुनाव के लिए प्रत्याशी बनाया है. वह भाजयुमो उपाध्यक्ष और पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन के करीबी माने जाते हैं. उनके चुनाव लड़ने से अब ये साफ हो गया है कि कायस्थ मतदाता पूरी तरह से बीजेपी के साथ रहेंगे. वैसे भी इस सीट पर बीजेपी का लगातार कब्जा रहा है.बांकीपुर में जिस तरह से जातिगत समीकरण बीजेपी के साथ है, वैसे में प्रशांत किशोर के लिए लड़ाई बेहद कठिन होने वाली है. हालांकि ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या करीब 40 हजार है लेकिन एकमुश्त वोट उनको मिल जाएगा, ये कहना मुश्किल है. वैसे बीजेपी का दावा है कि सामाजिक समीकरण नहीं, बल्कि विकास कार्यों की बदौलत फिर से बांकीपुर में ‘कमल’ खिलेगा.प्रशांत किशोर लगातार बांकीपुर के स्थानीय मुद्दों को उठा रहे हैं. वह लोगों के बीच जाकर ये बताने की कोशिश कर रहे हैं कि सालों से इस सीट पर बीजेपी का कब्जा रहा है, इसके बावजूद क्षेत्र का विकास नहीं हो पाया है. अगर जन सुराज को मौका मिलेगा तो बांकीपुर विकास के पैमाने पर बाकी 242 सीटों के लिए उदाहरण बनेगा.वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक कौशलेंद्र प्रियदर्शी का मानना है कि पटना की सीट भाजपा की पारंपरिक सीट मानी जाती है. लंबे समय से भाजपा उम्मीदवार ही पटना की सीटों पर जीतते आ रहे हैं. ऐसे में अगर प्रशांत किशोर विपक्ष के साझा उम्मीदवार होते तो परिणाम कुछ भी हो सकता था लेकिन अब अकेले लड़कर वह कितना टक्कर जे पाएंगे, देखने वाली बात होगी.
