नेपाली बहुओं को भारतीय नागरिकता दे रही है सरकार,चलाया जा रहा है विशेष अभियान
भारत-नेपाल सीमा से जुड़े बिहार के सीमांचल इलाके में वर्षों से कायम ‘बेटी-रोटी’ के रिश्ते को अब कानूनी पहचान देने की दिशा में पहल तेज हो गई है. पूर्णियां जिला प्रशासन ने भारतीय नागरिकों से विवाह कर भारत में रह रही नेपाली महिलाओं को भारतीय नागरिकता देने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है. प्रशासन प्रखंड स्तर पर कैंप लगाकर महिलाओं को आवेदन प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी दे रहा है, जिससे की भारत में शादी कर रह ही नेपाली महिलाएं भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकें.सीमांचल के पूर्णियां, कटिहार, अररिया, किशनगंज, सुपौल, सहरसा और मधेपुरा जैसे जिलों में बड़ी संख्या में ऐसी नेपाली महिलाएं रह रही हैं, जिनकी शादी भारतीय युवकों से हुई है. वर्षों से भारत में रहने के बावजूद कई महिलाएं नागरिकता नहीं मिलने के कारण सरकारी योजनाओं और अन्य सुविधाओं से वंचित हैं.अब केंद्र सरकार के प्रावधानों के तहत उन्हें भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने का अवसर दिया जा रहा है. नेपाल से शादी करके सीमांचल आई कई महिलाएं इस बार एसआईआर के जद में आ गई थी, क्योंकि शादी करके आई महिलाओं के माता-पिता का डाक्यूमेंट्स नेपाल से जुड़ा हुआ था.पूर्णियां के जिलाधिकारी अंशुल कुमार के मुताबिक, जिन नेपाली महिलाओं की शादी भारतीय नागरिक से हुए सात वर्ष या उससे अधिक समय हो चुका है. वह भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकती हैं. इसके लिए गृह मंत्रालय के आधिकारिक पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा और निर्धारित शुल्क जमा 1000 रुपये जमा करना होगा. आवेदन के समय विवाह प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, शपथ पत्र, पासपोर्ट और पति की भारतीय नागरिकता से जुड़े दस्तावेज अपलोड करने होंगे.प्रशासन ने इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए विशेष टास्क फोर्स भी गठित की है. अपर समाहर्ता (विधि-व्यवस्था) की निगरानी में चल रहे इस अभियान में पुलिस प्रशासन, निर्वाचन विभाग और प्रखंड स्तर के अधिकारियों को शामिल किया गया है. सीमावर्ती इलाकों के सीएससी केंद्रों पर भी आवेदन कराने वालों की भीड़ बढ़ने लगी है.हालांकि, इसी बीच नेपाल की नीतियों को लेकर सीमावर्ती इलाकों में चर्चा तेज है. स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां भारत नेपाली महिलाओं को नागरिकता देने की प्रक्रिया आसान बना रहा है.

वहीं नेपाल में भारतीय पुरुषों के लिए नागरिकता और संपत्ति अधिकारों को लेकर नियम सख्त बने हुए हैं. इसके बावजूद सीमांचल के लोगों को उम्मीद है कि सदियों पुराने सामाजिक और पारिवारिक रिश्ते भविष्य में भी मजबूत बने रहेंगे.नेपाल में बने बालेन सरकार के नीतियों के कारण भारत-नेपाल के रिस्तो में खटास आ रही है. हाल के समय में 100 रुपये के नोट या छोटे लेन-देन पर टैक्स/प्रतिबंध की चर्चा ने लोगों में चिंता बढ़ाई है. इससे छोटे व्यापारियों और आम लोगों पर सीधा असर पड़ा है. इसके साथ ही नेपाल में भारतीय वाहनों पर भी प्रतिबंध लगा दिया है. पहले 25 किमी तक नेपाल की सीमा तक भारतीय वाहन जा सकते थे. अब बिना भंसार और रोड टैक्स दिए कोई भी भारतीय वाहन नेपाल में प्रवेश नहीं कर सकता है.वहीं नेपाल में बसे भारतीय नागरिक के लिए नेपाली नागरिकता के सख्त नियम हैं, जो पीढ़ी दर पीढ़ी से नेपाल में बसे हैं, उन्हें भी नागरिकता प्रुफ करने के लिए कागजातों की मांग की जा रही हैं.अगर कोई भारतीय महिला किसी नेपाली पुरुष से शादी कर लेती है तो भारतीय महिला को आसानी से नागरिकता मिल जाती हैं. वहीं कोई भारतीय पुरुष किसी नेपाली महिला से शादी कर लेता हैं और नेपाल में ही बस जाता हैं तो नेपाल में भारतीय पुरुष को नागरिकता नहीं मिलती हैं. भारतीय पुरुष अपने नाम पर जमीन भी नहीं खरीद सकता हैं. उसे हर हाल में नेपाली पत्नी के नाम से ही संपत्ति खरीदनी होगी. वहीं उनके बच्चे को नागरिकता दी जाएगी.वहीं नेपाल में नई बालेन सरकार नागरिकता से जुड़ी प्रक्रियाओं को और कड़े करने जा रही है. हालांकि बालेन शाह की खुद की नागरिकता और मधेशी (मैथिली) पृष्ठभूमि को लेकर चुनाव में सवाल उठाए गए थे. नेपाल के मूल निवासी भी बालेन शाह को नेपाली नागरिक नहीं मानते है.
