2 सीटों पर होने वाले MLC चुनाव में तेजस्वी का फिर दिखेगा जलवा!कड़ी होने वाली है टक्कर
बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर सियासी बिसात बिछ चुकी है. सत्ता पक्ष अपने पुराने और मजबूत किलों को बचाने की रणनीति में जुटा है तो वहीं विपक्ष उन सीटों पर सेंध लगाने की तैयारी कर रहा है, जहां वर्षों से एनडीए का दबदबा कायम है. खास तौर पर लंबे समय से विधान पार्षद बीजेपी के वरिष्ठ नेता नवल किशोर यादव और जेडीयू के तेजतर्रार नेता नीरज कुमार को घेरने के लिए महागठबंधन ने अपनी चालें तेज कर दी हैं.नवल किशोर यादव भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शुमार हैं. वह विधान परिषद में सीनियर मोस्ट नेताओं में गिने जाते हैं. शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से लगातार पांच बार एमएलसी चुनाव जीत चुके नवल किशोर छठी बार जीत का दंभ भर रहे हैं. वह शिक्षकों के मसले को विधान परिषद में मुखरता से उठाते रहे हैं. हालांकि वित्त रहित शिक्षक का मुद्दा अब भी अनसुलझा है।. नवल किशोर यादव पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से लगातार 5 बार विधान परिषद सदस्य रह चुके हैं. उन्होंने 1996 में पहली बार जीत दर्ज की और तब से अजेय हैं. 2002 में दूसरी बार, 2008 में तीसरी बार, 2014 में चौथी बार और 2020 में पांचवीं बार विधान पार्षद बने. 2026 में भी छठी बार विधान परिषद पहुंचने की जुगत में हैं. नवल किशोर यादव ने अपनी जीत का दावा करते हुए कहा कि विरोधियों की जमानत जब्त होनी तय है.आरजेडी ने बीजेपी नेता नवल किशोर यादव की घेरने की तैयारी कर ली है. तेजस्वी यादव की तरफ से मुकाबले में पूर्व विधायक संजीव कुमार को उतारा जा सकता है. वह राष्ट्रीय जनता दल के टिकट पर परबत्ता विधानसभा सीट से चुनाव लड़े थे. हालांकि उनको लोजपा (रामविलास) के बाबूलाल शौर्य के हाथों हार का सामना करना पड़ा था. 30 वर्षों से यह सीट बीजेपी के कब्जे में है. ऐसे में पार्टी के लिए इसे बरकरार न केवल चुनौती है, बल्कि प्रतिष्ठा का भी सवाल है.वहीं, बिहार विधान परिषद में पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जीत की हैट्रिक लगा चुके जेडीयू के नीरज कुमार चौथी बार उतरने के लिए तैयार हैं. उनको घेरने के लिए भी महागठबंधन की ओर से भी तैयारी की जा रही है लेकिन मुश्किल ये है कि पिछली बार महागठबंधन के टिकट पर लड़े आजाद गांधी ने राष्ट्रीय जनता दल छोड़ दिया है और वह बीजेपी में शामिल हो गए हैं.नीरज कुमार अपनी आक्रामक राजनीतिक शैली और विपक्ष पर लगातार हमलों के कारण जेडीयू के मजबूत चेहरों में गिने जाते हैं.

ऐसे में उनके खिलाफ उम्मीदवार चयन को लेकर महागठबंधन काफी सावधानी बरत रहा है. फिलहाल तो विपक्ष के पास कोई मजबूत चेहरा नहीं है लेकिन तलाश जारी है.नीरज कुमार साल 2008 में ग्रेजुएट स्नातक क्षेत्र से पहली बार विधान परिषद चुनाव जीते थे और तब से वह लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं. नीरज कुमार जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता है और वह नीतीश कुमार के करीबी नेताओं में गिने जाते हैं. एक बार मंत्री भी रह चुके हैं. वह अब तक कुल 3 बार विधान परिषद का चुनाव जीत चुके हैं. 2008, 2014 और 2020 में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और 2026 चुनाव में जीत को लेकर आश्वस्त हैं।इन दोनों सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर एनडीए ने रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है. संगठन और पुराने वोटों को साधने की कोशिश चल रही है. बीजेपी और जेडीयू नेता अपने-अपने नेताओं की राजनीतिक पकड़ और कार्यकर्ताओं के नेटवर्क के भरोसे चुनावी किला बचाने में जुटे हैं तो वहीं महागठबंधन सामाजिक समीकरण, नाराज वोटरों और स्थानीय मुद्दों को हथियार बनाकर मुकाबले को रोचक बनाने की कोशिश कर रहा है.भले ही नवल किशोर यादव 30 वर्षों से और नीरज कुमार 18 सालों से जीत रहे हों लेकिन आरजेडी को लगता है कि इस बार ‘तवा पर रोटी बदलने’ का वक्त है. आरजेडी का दावा यूं ही नहीं है, हालिया भोजपुर-बक्सर स्थानीय प्राधिकार क्षेत्र के विधान परिषद उपचुनाव में जीत से पार्टी उत्साहित है।लोगों का कहना है कि राष्ट्रीय जनता दल एनडीए के मजबूत किले को ध्वस्त करने के लिए संघर्ष करेगा. नवल किशोर यादव के खिलाफ संजीव कुमार को उतारने की तैयारी हो रही है लेकिन नीरज कुमार के खिलाफ तो उम्मीदवार भी नहीं है. हालांकि अभी देखना होगा कि आखिर वक्त तक आरजेडी और तेजस्वी यादव किस पर दांव लगाते हैं।
