पीएम मोदी ने सोने और तेल को लेकर फिर से की बड़ी अपील,समझिए क्या है खरीदारी न करने के मायने?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 घंटे में दूसरी बार देश की जनता से पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील की है। इसके साथ ही उन्होंने सोना नहीं खरीदने को कहा है और तेल की खपत कम करने की भी बात कही है। इससे पहले हैदराबाद में उन्होंने कहा था कि देश के नागरिकों को एक बार फिर कोरोनाकाल के उपायों के अमल में लाना चाहिए। इसमें वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन क्लास और वर्चुअल मीटिंग करना शामिल था। अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा युद्ध शुरू होने के हालात बन रहे हैं। अगर ऐसा हुआ तो भारत समेत दुनिया के कई देशों पर इसका गंभीर असर होगा। इसी वजह से पीएम मोदी देश के लोगों से उनकी आदतों में थोड़ा बदलाव लाने की अपील कर रहे हैं, ताकि देश पर होने वाले युद्ध के असर को कम किया जा सके।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान का प्रस्ताव ठुकरा दिया है और भीषण हमला करने की बात कही है। इजरायल ने भी ईरान पर हमला करने के संकेत दिए हैं। इसके बाद आशंका जताई जा रही है कि पश्चिमी एशिया में एक बार फिर युद्ध शुरू हो सकता है। ऐसा होने पर भारत में गैस की आपूर्ति प्रभावित होगी। स्ट्रेट ऑफ होर्मुस से जहाज नहीं निकल पाएंगे। कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। इन्हीं हालातों का सामना करने के लिए पीएम मोदी देश की जनता को सर्तक कर रहे हैं।गुजरात के वडोदरा में लोगों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जब भी भारत ने युद्ध या किसी बड़े संकट का सामना किया, नागरिकों ने सरकार की अपील पर अपनी जिम्मेदारी निभाई है। हमें अब भी ऐसा ही करना होगा। ईरान युद्ध से बने हालातों पर उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया का संकट इस दशक के सबसे भीषण संकटों में से एक है, जिस प्रकार हमने कोविड-19 महामारी पर विजय प्राप्त की, उसी प्रकार हम इससे भी उबर जाएंगे। उन्होंने बताया कि सरकार भारत को वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में एक प्रमुख भागीदार बनाने के लिए लगातार काम कर रही है।पीएम ने एक बार फिर देश की जनता से ईंधन की खपत कम करने और सार्वजनिक परिवहन या इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने लोगों से सोने की खरीदारी टालने का आग्रह किया। उन्होंने साफ किया कि हमें आयात का उपयोग कम करने के लिए हरसंभव प्रयास करना चाहिए और उन व्यक्तिगत गतिविधियों से बचना चाहिए, जिनमें विदेशी मुद्रा खर्च हो।पीएम मोदी ने हैदराबाद में कहा था कि लोगों को तेल की खपत कम करनी चाहिए।

भारत ने साल 2025-26 में 1.85 लाख करोड़ रुपये का तेल आयात किया था। अगर हर परिवार में तेल की खपत में थोड़ी भी कमी आती है तो देश में खाद्य तेल का आयात कम होगा और देश का विदेशी मुद्रा भंडार बचेगा। इसके साथ ही उन्होंने किसानों से कहा था कि फर्टिलाइजर का इस्तेमाल 50 फीसदी तक कम कर दें। उन्होंने साफ किया था कि इससे अनाज की क्वालिटी बेहतर होगी, जमीन की उर्वरक क्षमता बढ़ेगी और किसानों को खाद की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा।ईरान के साथ अमेरिका और इसराइल की जंग के बीच, शेयर बाज़ार से लेकर कच्चे तेल, सोने-चांदी और रुपये तक हर चीज़ में भारी अस्थिरता देखी जा रही है.सोने की ऐतिहासिक तेज़ी 2025 में ही देखने को मिल गई थी, जब गोल्ड प्राइस में 60 फ़ीसदी से ज़्यादा का उछाल आया था.सोने की तेज़ी के पीछे यूं तो कई कारण हैं, लेकिन सब एक दूसरे से जुड़े हुए हैं.अमेरिका-इसराइल और ईरान युद्ध की वजह से भू-राजनीतिक तनाव के कारण दुनिया में अस्थिरता बढ़ रही है, ऐसे समय में निवेशक जोखिम उठाने की बजाय पारंपरिक संपत्तियों में निवेश कर रहे हैं. जियोपॉलिटिकल टेंशन की वजह से ही डॉलर का इस्तेमाल भी घट रहा है और सोने पर निर्भरता बढ़ाई जा रही है.अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों की वजह से शेयर बाज़ार को कई झटके लगे हैं. इससे निवेशक अब सोने-चाँदी जैसे क़ीमती धातुओं पर निवेश कर रहे हैं. हाल ही में जियोपॉलिटिकल टेंशन की वजह से सोने की क़ीमतें बढ़ी हैं.अमेरिका ने वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ लिया, इसके बाद सोने की क़ीमतें बढ़ गईं. ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अपने अधीन करने की बात भी उठाई.सोने की तेज़ी के पीछे केंद्रीय बैंकों की भारी ख़रीदारी वाक़ई सबसे बड़ी वजहों में से एक है. 2022 से लगातार यह ट्रेंड मज़बूत हुआ है, 2025 में यह और तेज़ हो गया, जिससे सोने की क़ीमतें रिकॉर्ड स्तरों पर पहुंच गईं।
