हिजाब वाले ओवैसी के बयान से गरमाई सियासत,भाजपा ने लगाया भेदभाव करने का आरोप!
देश के दो अलग-अलग क्षेत्रों के दो बड़े नेता असदुद्दीन ओवैसी और हिमंत बिस्व सरमा एक बार फिर न केवल चर्चा के केंद्र में बल्कि आमने सामने भी हैं. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के हालिया बयानों ने ‘देश में संविधान’ की अहमियत के पुराने सवाल को नए शब्द दे दिए हैं. फर्क बस इतना है कि इस बार मुद्दा सीधे प्रधानमंत्री पद तक जा पहुंचा है.महाराष्ट्र में 15 जनवरी को होने वाले नगर निगम चुनावों से पहले राज्य के सोलापुर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा था कि एक दिन हिजाब पहनने वाली महिला भारत की प्रधानमंत्री बनेगी क्योंकि देश का संविधान सभी समुदायों के लोगों को समान दर्जा देता है जबकि पाकिस्तान में ऐसा नहीं होता और वहां केवल एक ही धर्म के लोग सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर आसीन हो सकते हैं।

यह कोई चुनावी घोषणा नहीं थी, बल्कि एक संवैधानिक कल्पना थी- एक ऐसा सपना, जो बाबासाहेब आंबेडकर के दिए संविधान की सीमा में पूरी तरह संभव है. पर इसके जवाब में हिमंत बिस्व सरमा ने ये कह कर नई बहस पैदा कर दी कि, “संवैधानिक तौर पर कोई रोक नहीं है, लेकिन भारत का प्रधानमंत्री हमेशा एक हिन्दू व्यक्ति ही होगा.कांग्रेस के प्रवक्ता रह चुके बीजेपी प्रवक्ता प्रोफेसर गौरव वल्लभ बोले,ओवैसी मुस्लिम महिला को पीएम नहीं बनाना चाहते हैं बल्कि हिजाब पहनने वाली महिला को बनाना चाहते हैं. उन्होंने यह नहीं कहा कि मुस्लिम महिला का प्रतिनिधित्व देश में हो, बल्कि कहा कि हिजाब वाली मुस्लिम महिला पीएम बने. यह व्यक्ति सिर्फ अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए मुस्लिम समुदाय को गुमराह करने की कोशिश करता है।केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार ने तो ओवैसी को चुनौती दे डाली. उन्होंने चुनौती दी कि वह अपनी पार्टी की प्रमुख पहले ऐसी महिला को बनाएं. बंडी संजय कुमार ने ये भी पूछा,मजलिस में कितनी मुस्लिम महिलाएं वास्तविक निर्णय लेने वाले पदों पर हैं? नारे शून्य प्रतिनिधित्व को नहीं छिपा सकते.उन्होंने कहा, 2018 के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने इस पुराने शहर में एआईएमआईएम नेता अकबरुद्दीन ओवैसी के खिलाफ शहजादी सैयद को मैदान में उतारा था. उन्हें धमकाया गया, निशाना बनाया गया और हराया गया. यही उनका असली चेहरा है. आज शहजादी राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में कार्यरत हैं.बीजेपी नेता पूनम महाजन ने भी ओवैसी के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी. वे बोलीं, “ओवैसी की राजनीति पूरी तरह ‘बांटो और राज करो’ की नीति पर आधारित है.”इतना ही नहीं ओवैसी के इस बयान का कथावाचक देवकी नंदन ठाकुर ने न केवल विरोध किया बल्कि हिंदू राष्ट्र, सनातन परंपरा और वैश्विक स्तर पर हिंदू एकता की बात छेड़ते हुए बोले, हमारा सपना है कि एक तिलकधारी और भगवाधारी न केवल भारत में, बल्कि बांग्लादेश और पाकिस्तान में भी शासन करेगा.हिमंत सरमा के बयान के बाद ओवैसी ने भी उन्हें कड़ा जवाब दिया. हिमंत बिस्व सरमा की बातों पर ओवैसी बोले, “उनके दिमाग में ट्यूबलाइट है. उन्होंने संविधान की कसम खाई है. संविधान में कहां लिखा हुआ है? वो पाकिस्तान की जहनियत (मानसिकता) रखते हैं. पाकिस्तान के संविधान में लिखा है कि सिर्फ एक समुदाय का व्यक्ति ही उस देश का प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति बन सकता है. हमारे देश में बाबासाहेब आंबेडकर का संविधान जो दिया हुआ है, उनके पास हिमंत बिस्व सरमा से ज्यादा दिमाग था, ज्यादा पढ़े लिखे थे. अफसोस ये है कि वो न संविधान को समझते हैं, न उसकी आत्मा को समझते हैं.ओवैसी बोले,ये देश किसी मजहब, समुदाय का नहीं है. इस देश की खूबसूरती यही है कि जो लोग भगवान, अल्लाह को नहीं मानते ये उनका भी देश है. उनकी सोच छोटी है, वो छोटे दिमाग के आदमी हैं. इसलिए छोटी बात करते हैं।
