यूपी चुनाव में अखिलेश के साथ मिलकर लड़ेंगे ओवैसी!जानिए अंदर की कहानी
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी कुछ महीनों का वक्त बाकी है. लेकिन राज्य का सियासी पारा अभी से चुनावी रंग लेता नजर आ रहा है. सभी राजनीतिक दलों ने अपनी कमर कस ली है, लेकिन इस बार सबसे ज्यादा आक्रामक नजर आ रही है असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM, पश्चिम उत्तर प्रदेश को अपना नया गढ़ बनाने की कवायद में जुटे ओवैसी ने अपनी रैलियों और जनसभाओं के जरिए मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी जड़ें मजबूत करना शुरू कर दिया है. इसी कड़ी में सहारनपुर से ओवैसी ने UP की राजनीति में एक ऐसा बम फोड़ा है, जिसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है.असदुद्दीन ओवैसी ने अपने इरादे पूरी तरह से साफ कर दिए हैं. उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती को एक साथ आने का न्योता दिया है. ओवैसी ने खुले तौर पर कहा कि अगर यूपी में भारतीय जनता पार्टी को सत्ता में आने से रोकना है, तो अखिलेश यादव और मायावती को AIMIM के सहारे की जरूरत पड़ेगी और हम इसलिए गठबंधन का प्रस्ताव देते हैं.

ओवैसी का यह बयान साफ करता है कि वह यूपी में अकेले नहीं, बल्कि एक मजबूत गठबंधन के मोर्चे के साथ चुनाव लड़ने का वह एक प्रयास कर रहे हैं, उनका मानना है कि बीजेपी को सत्ता से रोकने के लिए इन तीनों ताकतों का एक मंच पर आना समय की मांग और जरूरत हैं ताकि मिलकर बीजेपी को वह रोक सके. हालांकि अब गेंद पूरी तरह से मायावती और अखिलेश यादव के पाले में जा चुकी है.ओवैसी भले ही यूपी की सियासत में लंबे समय से मुस्लिम मतदाताओं को साधने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन जमीनी और चुनावी आकड़ों की सच्चाई यह है कि पिछले चुनावों में उनका वोट शेयर महज 0.46% तक ही सिमट कर रह गया था. हालांकि, इस बार हालात अलग हैं. पार्टी जमीनी स्तर पर पहले से ज्यादा मजबूत और संगठित होने की कोशिश में जुटी दिखाई दे रही है. चुनावी अंकगणित को अपने पक्ष में करने के लिए ही ओवैसी गठबंधन की राजनीति पर जोर दे रहे हैं.इससे पहले बिहार विधानसभा चुनाव में भी ओवैसी ने RJD और कांग्रेस के सामने गठबंधन का प्रस्ताव रखा था, लेकिन तब बात नहीं बन पाई थी. बावजूद इसके, बिहार में ओवैसी की पार्टी ने 5 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया था. अब देखना यह है कि क्या अखिलेश और मायावती ओवैसी के इस खुले ऑफर को स्वीकार करेंगे या यूपी में एक नया सियासी समीकरण बनेगा? फिलहाल दोनों ही पार्टियों की तरफ से इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं आया है ना की कोई बयान जारी किया गया है.ओवैसी से उनके ऊपर लगने वाले ‘बीजेपी की B टीम’ के आरोपों पर सवाल किया गया, तो उन्होंने कांग्रेस पर जोरदार पलटवार किया. ओवैसी ने कांग्रेस के दोहरे मापदंडों की पोल खोलते हुए तीखा तंज कसा.ओवैसी ने यह भी पूछा, “जो लोग मुझे आज बीजेपी की B टीम कहते हैं, वो फिर तेलंगाना के जुबली हिल्स में हमारे समर्थन को खुशी-खुशी क्यों स्वीकार कर लेते हैं?कांग्रेस पर अपना हमला जारी रखते हुए AIMIM चीफ ने मुस्कुराते हुए कहा, “मुझे यह देखकर बहुत अच्छा लगता है कि आज देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस, AIMIM की बढ़ती ताकत से खौफ खाती है और डरती है वही कई चुनावो को हारने का तंज कसते हुए ओवैसी ने कांग्रेस को घेरा.एक ओर कांग्रेस और सपा के बीच भी पिछले कई दिनों से तल्खी बढ़ती जा रही है वहीं अखिलेश लगातार राम मंदिर के मुद्दे पर बीजेपी को घेरते दिख रहे हैं. कई मुद्दों पर अखिलेश यादव, राहुल गांधी और ओवैसी बीजेपी को घेरते दिखाई दे रहे हैं लेकिन सवाल अब यह बन गया है कि क्या यूपी में एक नए ‘महागठबंधन’ का उदय होगा? क्या मुस्लिम वोट बैंक किसी एक तरफ जाएगा या इसमें बिखराव आएगा? इन सभी सवालों के जवाब आने वाले 7 महीनों की सियासत और समय तय करेगा।उत्तर प्रदेश का यह चुनावी रण अब बेहद दिलचस्प मोड़ पर आ खड़ा हुआ है. ओवैसी ने अपनी तरफ से गेंद अखिलेश यादव और मायावती के पाले में डाल दी अब फैसला बुआ-भतीजे को करना होगा।
