UCC को लेकर मुस्लिम समाज नाराज,MP में मोहन सरकार के खिलाफ उतरे मौलाना!
देश में तेजी से बढ़ रहे लिव-इन रिलेशनशिप के कल्चर को लेकर मोहन सरकार मध्य प्रदेश में कड़े प्रावधान लागू करने की तैयारी में है. प्रदेश सरकार के यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) के ड्राफ्ट में इसे लेकर सख्त नियम प्रस्तावित किए गए हैं. जिसके तहत एमपी में लिव-इन में रहने के लिए अब रजिस्ट्रेशन करना अनिवार्य होगा. ऐसा नहीं करने पर तीन महीने की जिले भी हो सकती है. साथ ही, लिव-इन के दौरान पैदा होने वाले बच्चों को वैध माना जाएगा. पुरुष साथी के छोड़ने पर महिला पाटर्नर गुजारा भत्ते के लिए भी दावा कर सकती है.अब जानिए, एमपी में लव-इन में रहने के लिए 8 जरूरी नियम…लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़े को साथ रहने की शुरुआत के एक महीने के भीतर रजिस्ट्रार के पास जाकर रजिस्ट्रेशन कराना होगा.

पार्टनर्स की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए, वे प्रतिबंधित श्रेणी में और पहले से विवाहित नहीं होने चाहिए.अगर, कोई पार्टनर 21 साल से कम उम्र का है, तो लिव-इन के शुरू होने और खत्म होने की जानकारी उनके माता-पिता या अभिभावकों को भेजी जाएगी.लिव-इन पार्टनर का रिकॉर्ड रजिस्ट्रार को स्थानीय पुलिस स्टेशन में भी भेजना होगा.लिव-इन में रहने के दौरान पैदा हुए बच्चों को वैध माना जाएगा, उन्हें पूर्ण उत्तराधिकार मिलेगा.अगर,पुरुष पार्टनर महिला को छोड़ देता है, तो वह सक्षम अदालत के माध्यम से कानूनी पत्नी की तरह ही भरण-पोषण (गुजारा भत्ता) का दावा कर सकती है.बिना रजिस्ट्रेशन एक महीने से ज्यादा साथ रहने पर 3 महीने तक की जेल या 10,000 जुर्माना हो सकता है. गलत जानकारी देने पर 3 महीने की जेल और 25,000 जुर्माना लगाया जा सकता है.रजिस्ट्रार के नोटिस के बाद भी बयान न देने पर 6 महीने तक की जेल और 25,000 का जुर्माना हो सकता है।दरअसल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने रविवार 19 जुलाई को समान नागरिक संहित (UCC) के विधेयक जगदीशपुर किले में हुई कैबिनेट बैठक में मंजूरी दे दी है. जिसमें लिव-इन रिलेशनशिप समेत अन्य मामलों को लेकर कड़े प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं. अब यह विधेयक सोमवार 20 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र के दौरान विधानसभा में पेश किया जाएगा।यूसीसी के अधिनियम के लागू होने के बाद प्रदेश में बहुविवाह और तीन तलाक पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा. साथ ही इस्लामी कानून मेंकी गई वसीयत की एक तिहाई व्यवस्था भी इस कानून के लागू होने से समाप्त हो जाएगी. इस बिल पर मुस्लिम समाज की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है. मुस्लिम समाज का कहना है कि वे अपने निकाह, तलाक और विरासत जैसे मामलों में सरकार की दखलंदाजी नहीं होने देंगे. उन्होंने आदिवासी समाज की तरह ही मुस्लिम वर्ग को भी यूसीसी से बाहर रखने की मांग सरकार से है. खंडवा के शहर काजी सैयद निसार अली ने कहा कि यूसीसी लागू करने से पहले प्रदेश सरकार ने हर शहर में सर्वे के लिए बैठक बुलाई थी, जिसमें हमने विरोध दर्ज कराया था. अगर, प्रदेश सरकार सभी पर समान कानून लागू करने की बात करती है तो इससे आदिवासी समाज को दूर क्यों किया गया? मुस्लिम समाज के शादी, निकाह, विरासत और तलाक जैसे मामले शरीयत के द्वारा हल किए जाते रहे हैं और आगे भी उसी तरह से हम लोग करेंगे. शादी के लिए उम्र का तय नियम पहले से ही समाज के द्वारा माना जाता रहा है. मुख्यमंत्री मोहन याव से मांग है कि आदिवासी समाज की तरह मुस्लिम समाज को भी इस कानून से दूर रखा जाए, जिससे हम लोग अपने मामले शरीयत के हिसाब से आगे भी हल कर सकें.खंडवा मुस्लिम यूथ समाज के अध्यक्ष जाहिद अहमद ने मीडिया से बात करते हुए कहा- भाजपा शासित राज्यों में अनुच्छेद 44 का उपयोग करते हुए यूसीसी लागू करने का काम किया जा रहा है. इसके तहत संविधान सभी को समान अधिकार जरूर देता है, लेकिन इसके साथ ही अनुच्छेद 25, 26, 28 और 30 धार्मिक आधार पर भिन्नताओं को बताते हैं, जिनका पालन नहीं किया जा रहा है. उन्होंने कहा- यह सिर्फ मुस्लिम समाज की मान्यताओं को समाप्त करने की मंशा है. आदिवासी समाज को छोड़कर यूसीसी में मुस्लिम समाज को लाकर हमारी धार्मिक मान्यताओं में हस्तक्षेप किया जा रहा है. सरकार हिंदुओं को खुश करना चाहती है।
