सम्राट के आगे नहीं टिकेगा कोई नेता,जानिए कौन हो सकता है बिहार का सीएम?
बिहार में नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए नॉमिनेशन करने के बाद अब नए मुख्यमंत्री की तलाश हो रही है. मजबूत चेहरे के साथ-साथ जाति और सामाजिक समीकरण को ध्यान में रखते हुए ही कोई फैसला होगा. सीएम के साथ-साथ डिप्टी सीएम और मंत्रियों को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है. सम्राट चौधरी नंबर वन दावेदार माने जा रहे हैं लेकिन बीजेपी ने कई राज्यों में चौंकाने वाला फैसला लिया है. ऐसे में बिहार में भी 2029 और 2030 में होने वाले चुनावों को लेकर पार्टी कोई चौंकाने वाला फैसला ले सकती है. नीतीश कुमार पिछले 20 सालों से बिहार के मुख्यमंत्री हैं. वह कुर्मी समाज से आते हैं लेकिन लव-कुश वोट बैंक के साथ-साथ अति पिछड़ा वोट बैंक भी उनके साथ रहा है. पिछड़ा वर्ग में यादव को छोड़कर अन्य पिछड़ा वर्ग उनके साथ मजबूती से खड़ा रहा है. इसलिए 2 दशक से सत्ता में रहने के बावजूद उनको मुख्यमंत्री की कुर्सी से कोई हटा नहीं सका. अब जब वह राज्यसभा जा रहे हैं तो उनकी जगह किसी ऐसे शख्स को ही इस कुर्सी पर बिठाने की तैयारी है, जिसको समाज के हर तबके का समर्थन मिलता रहे।

पहले नीतीश कुमार के साथ बीजेपी का उपमुख्यमंत्री होता था. जब तक सुशील मोदी रहे, तब तक बीजेपी से एक ही उपमुख्यमंत्री होता था लेकिन बाद में दो मुख्यमंत्री बनाए जाने लगे. अभी भी बीजेपी के दो उपमुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ हैं लेकिन अब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने वाले हैं तो ऐसे में जब बीजेपी का मुख्यमंत्री होगा तो दो उपमुख्यमंत्री जेडीयू से बनाए जा सकते हैं, इसकी चर्चा हो रही है।यदि नीतीश कुमार के बेटे निशांत को उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी दी जाती है तो फिर एक उप मुख्यमंत्री सवर्ण समाज से बनाया जाएगा, यह तय है. जहां तक बीजेपी की ओर से मुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा है तो दावेदारों में सम्राट चौधरी नंबर एक पर हैं लेकिन बीजेपी हमेशा चौंकाने वाला फैसला लेती है. कई राज्यों में बीजेपी ने यह करके दिखाया है.नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार कैबिनेट का फॉर्मूला फाइनल हो गया है. सूत्रों की मानें तो बीजेपी को सीएम पद के साथ कुल 15 मंत्री मिल सकते हैं. जेडीयू को 2 डिप्टी सीएम मिल सकते हैं. साथ ही 15 मंत्री बनाए जा सकते हैं. इसके अलावे एलजेपीआर को 2 मंत्री पद मिल सकता है. वहीं, हम और आरएलएम को एक-एक कैबिनेट मिल सकता है. सूत्रों के मुताबिक अगर निशांत डिप्टी सीएम होंगे तो सिर्फ एक ही डिप्टी सीएम बनेगा.बिहार में पिछले 30 सालों से अधिक की राजनीतिक को देखें तो मुख्यमंत्री की कुर्सी पर 15 साल लालू यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी काबिज रहे, जो पिछड़ा वर्ग से हैं. उसके बाद 20 वर्षों से लगातार नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं, ये भी पिछड़ा वर्ग से आते हैं. यानी 30 सालों से अधिक समय से पिछड़ा वर्ग का शासन है. ऐसे में बीजेपी अति पिछड़ा वर्ग से किसी नए चेहरे को प्रोजेक्ट कर सकती है.जब सुशील मोदी उपमुख्यमंत्री थे तो वैश्य होने के बावजूद सवर्ण वर्ग को भी प्रभावित करते थे. इसी तरह का चेहरा बीजेपी सामने ला सकती है, जो पिछड़ा-अति पिछड़ा और सवर्ण वर्ग को सीधे प्रभावित करें. सम्राट चौधरी यदि मुख्यमंत्री बनते हैं तो उपमुख्यमंत्री अति पिछड़ा और अपरकास्ट से हो सकता है. अपरकास्ट से जेडीयू के विजय कुमार चौधरी उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं. वे नीतीश कुमार के नजदीकी भी माने जाते हैं और सरकार में लंबे समय से चीजों को देख भी रहे हैं.बिहार में 2025 विधानसभा चुनाव में यदि जातीय समीकरण के हिसाब से विधायकों को देखें तो ओबीसी के 83, ईबीसी के 37, सवर्ण के 72, दलित और आदिवासी के 40 के अलावे 11 मुस्लिम विधायक चुनाव जीत कर आए हैं. 243 सदस्यी विधानसभा में एनडीए के 202 विधायक हैं. इसका मतलब ये हुआ कि हर जाति समूह में एनडीए को सफलता मिली है.बीजेपी 2029 और 2030 में होने वाले चुनाव को लेकर ही अपनी रणनीति तैयार करेगी. उसी के हिसाब से मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और मंत्रियों का खाका तैयार होगा. बिहार में जातीय समीकरण को देखें तो अति पिछड़ा वोट बैंक 36% के आसपास है. पिछड़ा वर्ग 27 प्रतिशत है. 19% दलित वोट बैंक है. 10% से अधिक सवर्ण वोट बैंक है. 17% के करीब मुस्लिम आबादी है. ऐसे में सबको साधना नए सीएम के लिए आसान नहीं होगा.पिछड़ा वर्ग में सबसे अधिक आबादी 14% यादवों की है और इसका अधिकांश हिस्सा आरजेडी को जाता है. ऐसे में बीजेपी यादव जाति से किसी को मुख्यमंत्री बनाएगा, इसकी संभावना कम है. हालांकि नित्यानंद राय का नाम भी सीएम के दावेदारों में लिया जा रहा है लेकिन समीकरण के लिहाज से इसकी गुंजाइश कम ही है।नीतीश कुमार का वोट बैंक लव-कुश रहा है. 2025 में 40 विधायक इसी वर्ग से जीते हैं, जो ओबीसी में लगभग आधा है. ऐसे में इस वर्ग पर बीजेपी की भी नजर होगी. यदि नीतीश कुमार अपने बेटे निशांत को उपमुख्यमंत्री बनाते हैं तो यह वोट बैंक पूरी तरह से एनडीए के साथ बना रहेगा. वहीं दूसरा उपमुख्यमंत्री जेडीयू कोटे से बनता है तो वह सवर्ण वर्ग से ही होगा, क्योंकि इस वर्ग से 2025 में 72 विधायक चुनाव जीत कर आए हैं, जिसमें सबसे अधिक 32 राजपूत, 25 भूमिहार, 13 ब्राह्मण और दो कायस्थ हैं. बीजेपी ने नितिन नबीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर कायस्थ समाज को खुश कर दिया है, अब उपमुख्यमंत्री भी किसी सवर्ण को बनाकर एक मैसेज दे सकती है.बीजेपी ने सम्राट चौधरी को एक समय मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट किया था. जब नीतीश एनडीए में लौट गए तो सम्राट को डिप्टी सीएम बनाया गया. हालिया विधानसभा चुनाव के बाद गृह मंत्री का भी पद दिया गया है. पहली बार ऐसा हुआ कि नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री रहते हुए गृह मंत्री का पद बीजेपी को दिया है. सरकार में सम्राट चौधरी को दो नंबर की हैसियत वाला माना जाता है. वह कुशवाहा जाति से आते हैं.कोइरी वोट बैंक पर विपक्ष की भी नजर रही है. 2024 लोकसभा चुनाव में कुशवाहा वोट बैंक ने बिहार में कई सीटों पर खेल कर दिया था. इसलिए सम्राट चौधरी की स्थिति मजबूत है, क्योंकि सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने पर लव-कुश वोट पूरी तरह से बीजेपी-जेडीयू के साथ जुड़ जाएगा।सवर्ण समाज की भूमिहार जाति से आने वाले विजय कुमार चौधरी को बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है. निशांत के साथ-साथ उनको भी उप-मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है. नीतीश कुमार के साथ लंबे समय से वह काम कर रहे हैं. सरकार के कामकाज की बारीकियों को समझते हैं. विधानसभा अध्यक्ष से लेकर कई महत्वपूर्ण विभागों का दायित्व संभाल चुके हैं।
