बुरे फंस गए मंत्री दीपक प्रकाश,दोबारा मंत्री बनाए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में फाइल की गई PIL

 बुरे फंस गए मंत्री दीपक प्रकाश,दोबारा मंत्री बनाए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में फाइल की गई PIL
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बिहार के पंचायती राज मंत्री के तौर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश की दोबारा नियुक्ति को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) फाइल की गई है. याचिका में कहा गया है कि दीपक प्रकाश राज्य विधानसभा के किसी सदन के सदस्य नहीं हैं. इसलिए वह राज्य सरकार के मंत्रालय में कोई पद नहीं संभाल सकते हैं.ऐसे में मंत्री दीपक प्रकाश की मुश्किलें बढ़ती दिख रही है. एक ओर एमएलसी चुनाव में उन्हें टिकट नहीं दिया गया, जिसके नामांकन का सोमवार (8 जून) को आखिरी दिन है. वहीं, दूसरी तरफ बिना किसी सदन के सदस्य होते हुए दोबारा मंत्री बनने का मामला अब कानूनी विवाद में घिर गया है. सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में सवाल उठाया गया है कि विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं होने के बावजूद उन्हें दोबारा कैसे मंत्री बनाया गया है?याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह ने दावा किया है कि आर्टिकल 164(4) के तहत, जो विधायक नहीं है, उसे छह महीने बाद दोबारा नियुक्त नहीं किया जा सकता है. यह मंत्रियों की नियुक्तियों में संवैधानिक सीमाओं, कानूनी मान्यता और लोकतांत्रिक जवाबदेही पर सवाल उठाता है. कोर्ट बड़े गवर्नेंस मुद्दों की जांच करेगा.याचिका में कहा गया है कि नियम के अनुसार, कोई भी गैर-विधायक अधिकतम 6 महीने तक मंत्री रह सकता है. इस अवधि के अंदर उसे विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना जरूरी होता है. याचिका में कहा गया है कि यह प्रावधान अस्थायी व्यवस्था के लिए है. इसका बार-बार लाभ नहीं लिया जा सकता है.बता दें कि दीपक प्रकाश को पहली बार 20 नवंबर 2025 को तत्कालीन सीएम नीतीश कुमार की सरकार में मंत्री बनाया गया था. उस समय भी दीपक किसी सदन के सदस्य नहीं थी. फिर 15 अप्रैल 2026 को सरकार गिरने के बाद 7 मई 2026 को सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार बनी. इसमें भी दीपक प्रकाश को फिर से मंत्री पद की शपथ दिलाई गई. याचिका में इसी पुनर्नियुक्ति को लेकर आपत्ति जतायी गई है.

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उपेद्र कुशवाहा के बेटे और बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश का एमएलसी का टिकट कट गया है. एनडीए ने 9 उम्मीदवारों की सूची में उनका नाम शामिल नहीं किया है. ऐसे में उनके मंत्री पद पर बड़ा संकट आ गया है. भारतीय संविधान के अनुसार, मंत्री पद की शपथ लेने के 6 महीने के अंदर किसी भी सदन का सदस्य बनना अनिवार्य होता है, नहीं तो मंत्री पद गंवानी पड़ती है. एनडीए ने 8 सीटों के बंटवारे में दीपक प्रकाश को टिकट नहीं दिया है. इसके अलावा 9वीं सीट पर चिराग पासवान की पार्टी ने अशरफ अंसारी को मैदान में उतारा है.इस बीच कयास लगाए जा रहे हैं कि बेटे दीपक प्रकाश का मंत्री पद बचाने के लिए उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता सासाराम विधायक पद से इस्तीफा दे सकती हैं. इसके बाद इस सीट पर उपचुनाव में दीपक प्रकाश को मैदान में उतारा जा सकता है. वहीं इस मामले में दीपक प्रकाश ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है.बीजेपी ने जिन चार लोगों को टिकट दिया है उनमें पवन सिंह, संजय मयूख और अनिल कुमार ठाकुर का नाम है. एक महिला उम्मीदवार शीला पंडित को भी मैदान में उतारा गया है. वहीं जदयू ने नीतीश कुमार के बेटे और स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार,भारती मेहता,शिवरानी प्रजापति और ललन प्रसाद को टिकट दिया है. वहीं आरजेडी से सुनील सिंह को टिकट दिया गया है.

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